Shri Ramayan Katha Review: बेवजह खिंचाव के पर्दे पर उतरी मर्यादा, आस्था और धर्म के महासंग्राम की कहानी

नई दिल्ली. भारतीय संस्कृति की आत्मा में गहराई से बसी महाकाव्य ‘रामायण’ की अमर गाथा को पर्दे पर जीवंत करना कभी भी आसान चुनौती नहीं रही है. इसका मुख्य कारण यह है कि इस महाकाव्य का हर किरदार, हर घटना और हर संवाद हर भारतीय के दिल में गहराई से बसा हुआ है. इसलिए चुनौती कहानी को बदलने की नहीं, बल्कि इस जानी-पहचानी कहानी को एक नए सिनेमाई प्रभाव, सादगी और भक्ति के प्रवाह के साथ पेश करने की है. डायरेक्टर अभिषेक सिंह की फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’, जो 25 सितंबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, इस दिशा में एक बहुत ही ईमानदार, संयमित और असरदार कोशिश के तौर पर सामने आती है.
कहानीफिल्म की कहानी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की अमर यात्रा को बयां करती है, जिसे हर पीढ़ी ने आस्था के साथ सुना और देखा है. हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका क्रिस्प और तेज-तर्रार स्क्रीनप्ले है. कहानी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती है, अयोध्या की शान और श्री राम के राजतिलक की तैयारियों से शुरू होकर, वनवास के फैसले, पंचवटी में सीता के अपहरण, किष्किंधा में श्री हनुमान के आने, समुद्र पर पुल बनने और आखिर में लंका में रावण के साथ धर्म और अधर्म के बीच निर्णायक लड़ाई पर खत्म होती है. डायरेक्टर अभिषेक सिंह ने सीन को बेवजह खींचने के बजाय कहानी के मुख्य प्वाइंट्स पर फोकस किया है. राम और सीता के बीच का दिव्य प्रेम, लक्ष्मण की भाईचारे की भक्ति, हनुमान की अटूट भक्ति और राम और रावण के बीच व्यक्तित्व और विचारधाराओं की महायुद्ध कहानी का मुख्य इमोशनल कोर बनाते हैं. स्क्रीनप्ले एक घटना से दूसरी घटना पर इतनी आसानी से बदलता है कि दर्शक पूरे समय जुड़े रहते हैं.
एक्टिंगकलाकारों की परफॉर्मेंस फिल्म को एक पारंपरिक गरिमा और ताकत देती है. देव शर्मा ने भगवान श्री राम के सदाबहार किरदार में कमाल का संयम और शांति दिखाई है. रोल को बहुत ज्यादा ड्रामैटिक या एग्रेसिव बनाने के बजाय वह इसे शांत, दयालु और गरिमापूर्ण रखते हैं. उनके चेहरे के हाव-भाव और डायलॉग डिलीवरी में एक अनोखी नरमी है, जो देखने वाले में अपने आप ही श्रद्धा की भावना जगाती है. माता सीता के रूप में अंजलि अरोड़ा स्क्रीन पर सादगी, नरमी और इमोशनल गहराई लाती हैं. वनवास की मुश्किलों और रावण की अशोक वाटिका में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावशाली और एक्सप्रेसिव है.
लंका के राजा रावण के रूप में रजनीश दुग्गल दमदार हैं. उन्होंने एक विद्वान के रूप में रावण के घमंड, अपार शक्ति और विनाशकारी घमंड के मेल को बड़ी शान और तेजी से दिखाया है. राम की शांत गरिमा और रावण के गरजते घमंड के बीच टकराव फिल्म का एक बड़ा आकर्षण है. शील वर्मा ने लक्ष्मण के भाईचारे के प्यार और पक्की वफादारी को शानदार ढंग से दिखाया है. श्री हनुमान के रूप में निर्भय वाधवा ने जबरदस्त एनर्जी और भक्ति दिखाई है. उनके सीन थिएटर के अंदर आध्यात्मिक उत्साह का माहौल बनाते हैं.
डायरेक्शनअभिषेक सिंह का डायरेक्शन अल्ट्रा-मॉडर्न एक्सपेरिमेंट में फंसने के बजाय पारंपरिक मान्यताओं का सम्मान करने पर फोकस करता है. जब पौराणिक कहानियों को कम समय (लगभग दो से ढाई घंटे) में ठूंस दिया जाता है, तो अक्सर पेस या इमोशन की बलि चढ़ जाती है. हालांकि, इस फिल्म का स्क्रीनप्ले समझदारी से बनाया गया है. फिल्म दर्शकों को भारी या बोरिंग नहीं लगती. इस तेज पेस का एक और पहलू यह है कि कुछ सबसे इमोशनल सीन (जैसे भरत-मिलाप या लक्ष्मण का बेहोश होना) अगर और समय दिया जाता तो और गहरा इमोशनल असर डाल सकते थे. इसके बावजूद, फिल्म का ओवरऑल फ्लो इस छोटी सी कमी को छिपा देता है.
म्यूजिकफिल्म का म्यूजिक और ऑडियो डिपार्टमेंट इसे एक यूनिक सिनेमैटिक एज देता है. बैकग्राउंड स्कोर इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. भक्ति, युद्ध और दुखद सीन में BGM दिल को छू जाता है. यह सीन पर हावी होने के बजाय इमोशन को बढ़ाता है. जावेद अली की मखमली आवाज में गाया गया गाना ‘सिया राम’ एक स्पिरिचुअल टच देता है. ट्रैक ‘राम जी की सेना’ जबरदस्त एनर्जी और जोश दिखाता है, जबकि कैलाश खेर का भजन ‘हे हनुमान’ एक रोंगटे खड़े कर देने वाला भक्ति का अनुभव देता है. शान, शाहिद माल्या और वैशाली सामंत जैसे पुराने कलाकारों के गाने एल्बम में रिचनेस और वैरायटी लाते हैं.
सिनेमैटोग्राफीफिल्म का कैमरावर्क अयोध्या के महलों, जंगलों की नेचुरल खूबसूरती और लंका के बड़े सेट को खूबसूरती से कैप्चर करता है. लाइटिंग और विजुअल टेक्सचर भक्ति कहानी के हिसाब से हैं. फिल्म की सबसे कमजोर बात इसका VFX है. लंका का जलना, समुद्र पार करना और आखिरी लड़ाई जैसे कुछ बड़े विजुअल सीन में आज के दर्शकों को मिलने वाले VFX का लेवल नहीं है. उन्हें थोड़ी और फिनिशिंग और रियलिस्टिक टच की जरूरत है. हालांकि, ये टेक्निकल कमियां फिल्म की मुख्य कहानी और भक्ति के सार को पूरी तरह से कम नहीं करती हैं.
कमियांVFX में फिनिशिंग की कमी: बड़ी लड़ाई और भगवान के सीन में विजुअल इफेक्ट और बेहतर हो सकते थे.
कुछ सीन में जल्दबाजी: फिल्म की तेज रफ्तार की वजह से कुछ खास इमोशनल पलों को थोड़ा कम स्क्रीन टाइम मिलता है.
जानी-पहचानी कहानी: क्योंकि कहानी जानी-पहचानी है, इसलिए कोई नया सरप्राइज नहीं है. फिल्म पूरी तरह से अपने प्रेजेंटेशन पर डिपेंड करती है.
अंतिम फैसला‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ एक ऐसा सिनेमाई प्रेजेंटेशन है जो अपनी असली कहानी, आस्था और गरिमा के प्रति पूरी तरह वफादार है. बिना किसी फालतू विवाद या मॉडर्न एक्सपेरिमेंट के फिल्म श्री राम के जीवन दर्शन को आसान, भक्ति और खूबसूरत तरीके से दिखाती है. बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर, मधुर भक्ति गीत, एक्टर्स की बैलेंस्ड परफॉर्मेंस और तेज रफ्तार स्क्रीनप्ले इसे एक फैमिली-फ्रेंडली और मजेदार फिल्म बनाते हैं. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार.



