बाढ़ में बहा घर, मलबे में तब्दील आशियाना… फिर भी पुरानी चौखट छोड़ जाने को तैयार नहीं नेपाल का ये डॉगी

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बाढ़ में बहा घर, मलबे में तब्दील आशियाना… पुरानी चौखट पर डटा नेपाल का ये डॉग
Last Updated:August 31, 2026, 21:22 IST
नेपाल के त्रिशूली बाजार में आई विनाशकारी बाढ़ में चार घर बह जाने के बाद भी एक वफादार कुत्ता अपने ढह चुके घर की चौखट छोड़कर जाने को तैयार नहीं है. आसपास भारी जेसीबी मशीनों के शोर और मलबे की सफाई के बावजूद, गले में पट्टा बांधे यह बेजुबान अपने परिजनों के लौटने के इंतजार में उसी कीचड़ पर डटा हुआ है और लोगों द्वारा दिए जाने वाले खाने-पानी को भी केवल सन्नाटा होने पर ही स्वीकार करता है.नेपाल त्रास्दी की बेहद मार्मिक कहानियां सामने आ रही हैं.
अगर आपको लगता है कि वफादारी और दर्द सिर्फ इंसानों के सीने में होता है तो नेपाल के त्रिशूली बाजार (नुवाकोट) की यह तस्वीर आपकी सोच को हिलाकर रख देगी. पिछले हफ्ते आई तबाही और खौफनाक बाढ़ में चार घर पूरी तरह से बह गए, सब कुछ मलबे में तब्दील हो गया. एक ब्लैक एंड व्हाइट कुत्ता, जिसके गले में आज भी अपने मालिक का पट्टा बंधा हुआ है, अपने ढह चुके घर की चौखट छोड़ने को तैयार नहीं है. आसपास आधे दर्जन से ज्यादा जेसीबी (JCB) और भारी मशीनें शोर मचा रही हैं. रेस्क्यू वर्कर्स मलबे और गाद को साफ कर रहे हैं लेकिन वो बेजुबान एकटक उसी कीचड़ के छोटे से टुकड़े को ताक रहा है. न उसकी पूंछ हिलती है, न आंखों में कोई खौफ है. बस एक बेजुबान इंतज़ार है कि शायद उसकी फैमिली अभी लौट आएगी.
बिस्कुट ठुकराए, नाम पर भी सिर नहीं घुमायाराहत कार्य में जुटे वॉलंटियर बिक्रम थापा ने बताया कि शुरुआत में हर किसी ने उस कुत्ते को पुचकारने और वहां से हटाने की कोशिश की. लोगों ने बिस्कुट दिए, जाने-पहचाने पेट नेम्स पुकारे लेकिन उसने एक बार भी मुड़कर नहीं देखा. उसके गले का पट्टा आज भी सही-सलामत है जो इस बात का सबूत है कि कुछ दिनों पहले तक उसका भी एक प्यारा सा घर था. भारी मशीनों के ऑपरेटर सुनील तामांग बताते हैं कि जेसीबी का भयानक शोर भी उसे हिला नहीं पाता. बड़ी-बड़ी खुदाई करने वाली मशीनें उसके बिल्कुल करीब से गुजर जाती हैं, फिर भी वो उसी कीचड़ के गड्ढे में बैठा रहता है. वो अपने पुराने घर की बाउंड्री (आंगन) के पार जाने से साफ इनकार कर चुका है.
सिर्फ कीचड़ और मलबे के बीच वफादारी का पहराइस खौफनाक बाढ़ ने पूरे के पूरे मोहल्ले का वजूद मिटा दिया. चार घरों की कतार की जगह अब सिर्फ कीचड़, बिखरा हुआ मलबा और तबाही के निशान बचे हैं. मौके पर काम कर रहे रेस्क्यू वर्कर्स में से कोई नहीं जानता कि उसके मालिक कौन थे या वो उन चार बहे हुए घरों में से किस घर का हिस्सा था. लेकिन उसका बार-बार उसी पुरानी चौखट पर जाकर बैठना और आंगन की हद को न लांघना यह साफ बताता है कि यही उसका आशियाना था. जहां बाढ़ आने पर बाकी जानवर जान बचाकर ऊंचाइयों की तरफ भाग गए, यह अकेला वहीं डटा रहा.
जब तक वो न आए, जाना नहीं हैस्थानीय दुकानदारों और बेघर हुए लोगों का भी दिल इस वफादार बेजुबान को देखकर पसीज गया है. कम्युनिटी एनिमल रेस्क्यू वॉलंटियर रीता गुरुंग ने बताया कि अब वर्कर्स ने उसे जबरदस्ती हटाने की कोशिश बंद कर दी है. उसके पास हर कुछ घंटों में सूखा खाना और पानी रख दिया जाता है, जिसे वो सन्नाटा होने पर चुपचाप खा लेता है.
बाढ़ से बेघर हुए दिनेश बस्थाल का कहना है, “हम इंसानों ने अपने घर खोए हैं, लेकिन हम समझते हैं कि क्या हुआ है. पर यह बेजुबान यह नहीं समझ पा रहा कि उसकी पूरी दुनिया (उसके लोग) कहां गायब हो गए… वो बस इतना जानता है कि जब तक उसके अपने वापस नहीं आते, उसे यह जगह छोड़कर कहीं नहीं जाना है.”
About the AuthorSandeep GuptaChief Sub Editor
पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
August 31, 2026, 21:21 IST



