Onion Peel Natural Dye: फेंके नहीं, संभालकर रखें प्याज के छिलके, कपड़ों को रंगने में आएंगे बेहद काम

Last Updated:September 30, 2026, 11:10 IST
Onion Peel Natural Dye: रसोई में रोज निकलने वाले प्याज के छिलके कचरा नहीं, बल्कि प्राकृतिक रंग का बेहतरीन स्रोत हैं. इन्हें उबालकर कपड़ों के लिए सुनहरा-पीला नेचुरल डाई तैयार की जा सकती है. मॉर्डेंटिंग की मदद से रंग को कपड़ों पर लंबे समय तक टिकाया भी जा सकता है. यह आसान तरीका केमिकल रंगों का पर्यावरण अनुकूल विकल्प होने के साथ जीरो-वेस्ट और सस्टेनेबल टेक्सटाइल को भी बढ़ावा देता है.
जयपुर. आमतौर पर हर घर की रसोई में प्याज का इस्तेमाल रोजाना होता है लेकिन उसके छिलकों को बेकार या कचरा मानकर कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है. हालांकि, सही तकनीक और पारंपरिक सूझबूझ से यही अनुपयोगी छिलके पर्यावरण अनुकूल नेचुरल डाई का बेहतरीन जरिया बन रहे हैं. रासायनिक रंगों के बढ़ते दुष्प्रभावों और पर्यावरण प्रदूषण के बीच प्राकृतिक डाई बनाने की यह आसान विधि न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है बल्कि सस्टेनेबल टेक्सटाइल और जीरो-वेस्ट जीवनशैली को भी मजबूती से बढ़ावा दे रही है. प्याज के छिलकों से कपड़ों के लिए रंग तैयार करने की विधि पूरी तरह सुरक्षित और सरल है. सबसे पहले एकत्र किए गए सूखे छिलकों को पानी में डालकर लगभग 15 से 20 मिनट तक अच्छी तरह उबाला जाता है.
उबालने के दौरान छिलके पानी में अपना गहरा पीला-सुनहरा अर्क छोड़ देते हैं. इसके बाद तरल को छानकर अलग कर लिया जाता है जिससे शुद्ध और चमकदार रंग का घोल प्राप्त होता है. प्राकृतिक रंगों से कपड़े रंगते समय सबसे महत्वपूर्ण चरण मॉर्डेंटिंग का होता है. कपड़े को सीधे रंग के घोल में डालने से पहले मॉर्डेंट प्रक्रिया से गुजारा जाता है. इसमें फिटकरी या अन्य प्राकृतिक घटकों के पानी में कपड़े को पहले संसाधित किया जाता है. इस प्रक्रिया से फैब्रिक के रेशे खुलते हैं और रंग सीधे कपड़ों के रेशों में गहराई तक समा जाता है जिससे धोने के बाद भी रंग पक्का बना रहता है और उड़ता नहीं है.
तैयार घोल में कपड़े को धीरे-धीरे डुबोया जाता है. यदि कपड़े पर हल्का सुनहरा या पीला शेड चाहिए तो उसे कम समय के लिए डुबोया जाता है जबकि गहरा और चटक रंग पाने के लिए कपड़े को घोल में थोड़ी देर और उबाला जाता है. रासायनिक रंगों से भूजल और मिट्टी को होने वाले गंभीर नुकसान के मुकाबले यह घरेलू और प्राकृतिक विधि पूरी तरह सुरक्षित है. कृषि व रसोई के जैविक कचरे का यह पुनःउपयोग न केवल वेस्ट प्रबंधन का बेहतर समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि हथकरघा और स्थानीय कारीगरों के लिए किफायती और हरित विकल्प भी साबित हो रहा है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
September 30, 2026, 11:10 IST



