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Japan Nuclear Shift : ‘परमाणु बम बनाएगा जापान’? चीन ने किया ‘भस्मासुर’ वाला कांड, टूट जाएंगी वो 3 कसमें

दूसरे विश्व युद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों का दर्द झेलने के बाद जापान के एक कसम खाई थी, जो अब तोड़ दी है. चीन और उत्तर कोरिया की दादागीरी ने जापान को रौद्र रूप दिखाने के लिए मजबूर कर दिया है. जापान अब परमाणु हथियार बनाने पर उतर आया है. हाल ही में जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने दहाड़ते हुए ऐसा ऐलान कर दिया है, जिसे सुनकर दुनिया सन्न रह गई है. उन्होंने जापान की परमाणु नीति पूरी तरह पलटने का इशारा दिया है. भले ही ये दूर की बात है लेकिन अगर जापान ने वाकई परमाणु हथियार हासिल कर लिया तो सबसे बड़ा खतरा चीन को होगा.

जापान के रक्षा मंत्री ने न्यूक्लिय हथियारों पर दिया बड़ा बयान

जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान ये सनसनीखेज बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में जापान के चारों तरफ जैसा सुरक्षा संकट मंडरा रहा है, उसे देखते हुए परमाणु हथियारों के मुद्दे पर बात तक न करना बहुत बड़ी भूल होगी. कोइजुमी ने बेहद सीधे शब्दों में कहा ‘ये सोचना कि हम इस मुद्दे पर चर्चा तक नहीं कर सकते, हमारे सामने खड़े संकट से आंखें मूंदने जैसा है’.

उन्होंने आगे कहा कि जापान को अब बिना किसी झिझक या पाबंदी के अपनी परमाणु नीति की समीक्षा करनी चाहिए. इसमें देश के सालों पुराने गैर-परमाणु सिद्धांतों को बदलने और नौसेना के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने जैसे बेहद सेंसेटिव मुद्दे भी शामिल हैं.

क्या हैं जापान के ‘3 गैर-परमाणु सिद्धांत’? जिन्हें बदलने की तैयारी है

बता दें कि सन 1967 में जापान ने एक ऐतिहासिक नीति अपनाई थी, जिसे ‘थ्री नॉन-न्यूक्लियर प्रिंसिपल्स’ कहा जाता है. इस नीति के तहत जापान ने 3 कसमें खाई थीं.

परमाणु हथियार न बनाना: जापान खुद कभी परमाणु बम का निर्माण नहीं करेगा.
परमाणु हथियार न रखना: जापान अपने पास कोई परमाणु हथियार नहीं रखेगा.
जमीन पर आने न देना: जापान अपनी सीमा के अंदर किसी भी देश को परमाणु हथियार लाने की इजाजत नहीं देगा.

दशकों से जापान इन नियमों का सख्ती से पालन करता आ रहा था. लेकिन अब रक्षा मंत्री का मानना है कि बदलती दुनिया में सिर्फ पुराने नियमों से चिपक कर बैठना देश की सुरक्षा के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

चीन, रूस और उत्तर कोरिया का खौफ: क्यों झुका जापान?

जापान का ये अचानक बदला हुआ रुख यूं ही सामने नहीं आया है. इसके पीछे उसके पड़ोस में मौजूद तीन बड़े देशों का बढ़ता खतरा है.

उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट: उत्तर कोरिया आए दिन जापान के समुद्र में परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है.
चीन की बढ़ती ताकत: चीन लगातार ताइवान और पूर्वी चीन सागर में अपना सैन्य प्रभाव बढ़ा रहा है, जिससे जापान की सीमाएं खतरे में हैं.
रूस की आक्रामक नीति: यूक्रेन जंग के बाद रूस का रुख भी काफी आक्रामक हुआ है और वो जापान के नजदीकी इलाकों में अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर स्टीफन नागी ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जापान की परमाणु हथियारों से जो पुरानी एलर्जी थी, वो अब खत्म होती दिख रही है. इस एलर्जी का इलाज टोक्यो ने नहीं, बल्कि बीजिंग, प्योंगयांग और मॉस्को ने अपनी हरकतों से किया है.

दुनिया बदल रही है: फ्रांस और फिनलैंड की मिसाल

अपने बयान को सही ठहराते हुए रक्षा मंत्री कोइजुमी ने यूरोप का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि किस तरह रूस के खतरे को देखते हुए फिनलैंड ने अपने कानूनों में बदलाव किया है ताकि उसकी जमीन पर परमाणु हथियार तैनात किए जा सकें. इसके अलावा फ्रांस भी यूरोप की सुरक्षा के लिए अपने परमाणु डिफेंस को मजबूत कर रहा है.

कोइजुमी ने कहा कि पूरी दुनिया अब ऐसे दौर की तरफ बढ़ रही है जहां सुरक्षा को लेकर कड़े और बिना किसी झिझक के फैसले लिए जा रहे हैं. जब दुनिया के बाकी देश अपने बचाव के लिए नियम बदल रहे हैं, तो जापान को भी अपने खिलाफ उठने वाले हर खतरे का मजबूती से जवाब देने के लिए खुद को तैयार रखना होगा.

साल के अंत में नया सुरक्षा ड्राफ्ट: क्या हटेंगे पुराने नियम?

जापान सरकार इस साल के अंत तक अपने तीन अहम राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेजों की समीक्षा करने जा रही है. माना जा रहा है कि इस नई सुरक्षा नीति में गैर-परमाणु सिद्धांतों पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

खास तौर पर तीसरे सिद्धांत, यानी जापान की जमीन पर परमाणु हथियार लाने की इजाजत न देने पर सबसे ज्यादा बहस छिड़ी हुई है. अगर इस नियम को हटाया जाता है, तो भविष्य में अमेरिका अपने परमाणु हथियार जापान में तैनात कर सकेगा, जिससे चीन और उत्तर कोरिया पर सीधा दबाव बनेगा.

इसके अलावा परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों की खरीद को लेकर भी बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. अमेरिकी नौसेना के एक शीर्ष अधिकारी ने भी हाल ही में जापान के इस विचार का समर्थन किया था.

जापान के अंदर ही छिड़ा भारी विरोध: ‘परमाणु बम एक महा-पाप है’

भले ही रक्षा मंत्री परमाणु बहस की वकालत कर रहे हों, लेकिन जापान के भीतर इस मुद्दे पर एक राय नहीं है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे, जिसमें लाखों बेकसूर लोग पल भर में मारे गए थे. इसी वजह से जापान की जनता में परमाणु हथियारों को लेकर बहुत गहरा डर और नफरत है.

नागासाकी के मेयर का कड़ा रुख: नागासाकी शहर के मेयर सुजुकी शिरो ने रक्षा मंत्री के इस विचार पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने परमाणु हथियारों को ‘महा-पाप’ करार दिया. मेयर ने जापान सरकार से अपील की कि वह परमाणु हथियारों के बल पर शांति स्थापित करने का भ्रम छोड़ दे और अपने गैर-परमाणु सिद्धांतों पर मजबूती से टिकी रहे.
प्रधानमंत्री की सावधानी: जापान की पीएम सानाए ताकाइची का कहना है कि उनका देश अभी अपने गैर-परमाणु नियमों का पालन कर रहा है. वो परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के पक्ष में हैं. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या नई सुरक्षा नीति से इन नियमों को हटा दिया जाएगा, तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया.

यूएन (UN) की चेतावनी: ‘कोल्ड वॉर के बाद सबसे खतरनाक मोड़ पर दुनिया’

जापान में छिड़ी इस परमाणु बहस के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी पूरी दुनिया को बहुत बड़ी चेतावनी दी है. न्यू यॉर्क में एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि दुनिया इस वक्त कोल्ड वॉर के बाद के सबसे खतरनाक परमाणु दौर से गुजर रही है.

गुटेरेस ने चिंता जताते हुए कहा ‘दुनिया भर के देश अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ा रहे हैं और उनका आधुनिकीकरण कर रहे हैं. अगर समय रहते देशों ने बातचीत का रास्ता नहीं अपनाया, तो कोई भी छोटी सी गलतफहमी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है. परमाणु युद्ध में कोई नहीं जीत सकता, इसलिए इसे कभी नहीं लड़ा जाना चाहिए’. यूएन में जापान के राजदूत काजुयुकी यामाजाकी ने भी कहा कि जापान परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के लिए प्रतिबद्ध है और वो हिरोशिमा-नागासाकी के कड़वे सबक दुनिया को याद दिलाता रहेगा.

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