Indias Proud : 21 साल का लड़का बना जर्मन कंपनी का हेड, बनाई 360 किलोमीटर रफ्तार वाली ट्रेन

Last Updated:September 30, 2026, 23:25 IST
Indias Proud : भारत के 21 साल के युवा ने जर्मनी में खुद की कंपनी बनाकर हाई स्पीड ट्रेनों का निर्माण शुरू किया है. देश में जहां 200 की स्पीड से ट्रेनें चलाने पर काम चल रहा है, वहीं इस युवा ने 360 किलोमीटर प्रति घंटे वाली ट्रेन बनाकर कई देशों को सप्लाई भी कर दिया है. इस युवा का सपना आने वाले समय में भारत में भी हाई स्पीड कनेक्टिवटी को सुलभ बनाना है और यहां रोजगार पैदा करने पर भी जोर देने की बात कही है.भारत के युवा हेमेंद्र कुमार ने हाई स्पीड ट्रेन बनाई है.
नई दिल्ली. 21 साल की उम्र में जब युवा अपने करियर को रास्ता देने की कोशिश में लगे रहते हैं, तब भारत के एक युवा ने जर्मनी में जाकर अपना झंडा गाड़ दिया. उसने न सिर्फ 21 साल की उम्र में अपना करियर बना लिया, बल्कि वह जर्मनी की एक कंपनी का हेड भी बन बैठा. उसके कारनामे आज दुनियाभर में मिसाल बन रहे हैं और सिर्फ भारत ही नहीं तमाम देश उसकी उपलब्धि आश्चर्य से देख रहे हैं. इस युवा ने 360 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड वाली ट्रेन बनाकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
हम बात कर रहे हैं YSR कडप्पा जिले के युवा सेंसेशन हेमेंद्र कुमार की. वह अकल्पनीय कारनामों को मुमकिन बनाते हुए जर्मनी के फ्रैंकफर्ट स्थित ‘ज़ेब्रॉल्ड IHL’ नाम की रेलवे वाहन और टेक्नोलॉजी बनाने वाली कंपनी को सफलतापूर्वक चला रहे हैं. इस तेलुगु युवा के टैलेंट और लगन को देखकर बड़े-बड़े देशों की टॉप कंपनियां भी हैरान हैं. हेमेंद्र कुमार ने के प्रतिनिधि मस्तान वली को अपने काम के बारे में काफी कुछ बताया. फ्रैंकफर्ट में स्थापित यह कंपनी ट्रेन, रेलवे कोच, स्पेयर पार्ट्स, सिग्नलिंग सिस्टम और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में काम करती है.
क्या है कंपनी का लक्ष्यहेमेंद्र ने बताया कि 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली अल्ट्रा-मॉडर्न हाई-स्पीड ट्रेनों के साथ-साथ, यह कंपनी भविष्य की ट्रांसपोर्ट जरूरतों के हिसाब से ड्राइवरलेस ट्रेनें भी विकसित कर रही है. हेमेंद्र ने जर्मनी को अपना मुख्य मैन्युफैक्चरिंग सेंटर चुना, क्योंकि उन्हें पता था कि वहां बहुत कम कीमत पर अच्छी क्वालिटी के ऑटोमोटिव स्पेयर पार्ट्स मिल जाते हैं. वे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के साथ रेलवे सेक्टर में एक नई क्रांति का रास्ता बनाकर अपनी काबिलियत साबित कर रहे हैं.
कंपनी के पास कई बड़े ऑर्डरउनकी कंपनी जर्मनी में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के जरिए ट्रेनें बनाती है और बड़े कार्गो कंटेनरों का इस्तेमाल करके उन्हें दुनिया भर के अलग-अलग देशों में एक्सपोर्ट करती है. अभी दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन के लिए एक रेलवे प्रोजेक्ट पर तेज़ी से काम चल रहा है. इसके साथ ही जेब्रॉल्ड कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया में रेलवे सेवाओं को बढ़ाने पर खास ध्यान दिया है. इंटरनेशनल स्टैंडर्ड वाले अपने बेहतरीन प्रोडक्ट्स को ग्लोबल मार्केट में लाकर यह 21 साल का युवा गर्व के साथ दुनिया के नक्शे पर खड़ा है.
हेमेंद्र कुमार ने जर्मनी में हाई स्पीड ट्रेन बनाई है.
2 साल के अनुभव से बड़े-बड़े कारनामेहेमेंद्र को महज दो साल का रेलवे डिजाइन सेक्टर में अनुभव है. ठीक 11 महीने पहले जर्मनी में कंपनी शुरू करने के बाद, उन्होंने चार महीने पहले आधिकारिक तौर पर कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया. हालांकि, मुख्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जर्मनी में है, लेकिन इस कंपनी के डिजाइन सेंटर दुनियाभर में कुल पांच जगहों पर हैं, जिनमें हमारे देश के IT हब, हैदराबाद और बेंगलुरु भी शामिल हैं. वे अपने देश में प्रतिभाशाली युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करके अपनी मातृभूमि के प्रति अपना योगदान देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं.
क्या है भविष्य की योजनाभविष्य की योजनाओं के बारे में उन्होंने बताया कि वे हल्की और ड्राइवरलेस ट्रेनों पर काम कर रहे हैं. उनका मुख्य लक्ष्य अपने गृह राज्य में आधुनिक जर्मन तकनीक लाना और यहां के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराना है. कडप्पा जिले से निकलकर जर्मनी में खुद को स्थापित करने और कम उम्र में ही एक अंतरराष्ट्रीय उद्यमी के तौर पर पहचान बनाने वाले हेमेंद्र कुमार का सफर निश्चित रूप से आज के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
September 30, 2026, 23:23 IST



