झुंझुनूं में 7 साल पुराने ज्वैलर्स लूट-हत्या केस में आया फैसला, 5 को सुनाई सजा, 2 बरी

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं शहर में 7 साल पहले दिनदहाड़े हुई हत्या और लूट के चर्चित मामले में कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया गया. अपर सेशन कोर्ट-2 के जज कालूराम ने 5 आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. वहीं, सबूतों के अभाव में एक आरोपी प्रमोद कुमार उर्फ धोलिया को बरी कर दिया गया. आरोपियों ने न्यू प्रकाश ज्वैलर्स में डकैती, लूट और ज्वैलर जतिन सोनी की हत्या की थी.
कोर्ट ने दीपक पहल, योगेश कुमार और विनोद कुमार को उम्रकैद के साथ हर आरोपी पर 1 लाख 26 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. वहीं, अंकित कुमार उर्फ मीठू और प्रताप सिंह को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. हर व्यक्ति को 1 लाख 32 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है.
कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी दोषियों की मूल सजाएं साथ-साथ चलेंगी. पुलिस और न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को नियमानुसार सजा में जोड़ा जाएगा.
क्या है पूरा मामला
यह वारदात 15 सितंबर 2019 को हुई थी. दोपहर करीब 2:37 बजे बाइक और सफेद बोलेरो से आए हथियारबंद बदमाशों ने माननगर स्काईलाइन हॉस्पिटल के पास स्थित न्यू प्रकाश ज्वैलर्स पर धावा बोल दिया था.
शोरूम में उस समय ज्वैलर संदीप सोनी के भाई बाईसराम उर्फ जतिन सोनी और कर्मचारी नवीन मौजूद थे. बदमाशों ने पिस्टल तानकर ज्वैलरी बैग में भरने के लिए कहा. विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई. बदमाशों ने जतिन के गले से चेन भी उतरवा ली और सीसीटीवी की डीवीआर तलाशने लगे.
इसी दौरान एक आरोपी ने ज्वैलर को अपना आईडी कार्ड थमाकर चुनौती दी थी कि अगर दम है तो उसे पकड़कर दिखाए. यही आईडी कार्ड बाद में पुलिस की जांच में अहम सुराग बना.
जान बचाकर भागे ज्वैलर को सड़क पर मारी गोली
जब बदमाश ज्वैलरी समेट रहे थे, तभी जतिन सोनी ने मौका देखकर दुकान का शीशा खोला और बाहर की ओर भागे. बदमाशों ने उनका पीछा किया और सड़क पर ही उन पर गोली चला दी. गोली लगने से जतिन गंभीर रूप से घायल होकर गिर गए.
बदमाश लाखों रुपए के आभूषण लेकर मौके से फरार हो गए. गंभीर हालत में जतिन को अस्पताल में भर्ती कराया गया. करीब 25 दिन तक इलाज के बाद 9 अक्टूबर 2019 को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
5 महीने बाद बीकानेर से पकड़ा गया था आरोपी
मामले की जांच तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी गोपाल सिंह ढाका और टीम ने की थी. पुलिस ने मुख्य आरोपी योगेश चारणवासी के आईडी कार्ड को अहम सुराग बनाया. इसके आधार पर राजस्थान और गुजरात के कई इलाकों में दबिश दी गई. करीब 5 महीने बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी को बीकानेर से गिरफ्तार कर लिया था.



