Rajasthan

Pan Methi Farming I हरी मैथी बेचें या सुखाकर बनाएं सूखी मैथी, किसान ऐसे उठा सकते हैं फसल से फायदा

Last Updated:October 02, 2026, 12:52 IST

Pan Methi Farming: नागौर में रबी सीजन की शुरुआत के साथ किसान पान मैथी की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. अक्टूबर से नवंबर का समय इसकी खेती के लिए अनुकूल माना जाता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, भुरभुरी मिट्टी, उचित सिंचाई और जल निकासी का ध्यान रखकर किसान अच्छी फसल ले सकते हैं.

नागौर. जिले में रबी सीजन की आहट के साथ किसानों ने ऐसी फसलों की तैयारी शुरू कर दी है, जो कम समय में तैयार होकर बाजार में अच्छी मांग दे सकें. इन्हीं फसलों में पान मैथी भी शामिल है, जिले के कई किसान अक्टूबर से नवंबर के बीच पान मैथी की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. ठंडा और शुष्क मौसम इस फसल के लिए अनुकूल माना जाता है. खास बात यह है कि किसान इससे हरी पत्तियों की बिक्री के साथ बाद में सूखी मैथी तैयार कर भी कमाई कर सकते हैं.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि पान मैथी की खेती के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय उपयुक्त माना जाता है. बहुत अधिक गर्मी या लगातार नमी वाली परिस्थितियां फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं. बुवाई के समय मौसम में हल्की ठंडक रहने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. किसान अपने क्षेत्र के मौसम और खेत की स्थिति के अनुसार बुवाई का समय तय कर सकते हैं.

खेत तैयार करते समय इन बातों का रखें ध्यान

उन्होंने बताया कि पान मैथी की अच्छी फसल के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए. मिट्टी भुरभुरी होने पर बीज का अंकुरण बेहतर होता है. खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए, इसलिए जहां जरूरत हो वहां पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था करें. इसके अलावा खेत को समतल करने के बाद कतारें बनाकर बुवाई करने से सिंचाई और निराई-गुड़ाई में भी आसानी रहती है.

बुवाई में बीज और दूरी का रखें ध्यान

पान मैथी की खेती में किसानों को प्रमाणित और साफ बीज का इस्तेमाल करना चाहिए. बीज को बहुत अधिक गहराई में बोने के बजाय उचित गहराई पर बोना बेहतर रहता है. कतारों में बुवाई करने से पौधों के बीच हवा का आवागमन बना रहता है और खेत में खरपतवार नियंत्रण भी आसान होता है. बीज की मात्रा का निर्धारण खेत की मिट्टी, बुवाई की विधि के अनुसार करना चाहिए. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि पान मैथी में जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करनी चाहिए. खेत में ज्यादा पानी भरने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. शुरुआती अवस्था में खरपतवार फसल की बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना जरूरी है. किसान खेत की नियमित निगरानी करें और किसी तरह के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर तुरत इसका उपचार करें.

हरी पत्तियों के साथ सूखी मैथी से भी कमाई

पान मैथी की खासियत यह है कि किसान इसे केवल एक ही तरीके से बेचने तक सीमित नहीं रहते. तैयार होने पर हरी पत्तियों की बिक्री की जा सकती है. वहीं कुछ किसान पत्तियों को सुखाकर सूखी मैथी के रूप में भी बाजार में बेचते हैं. इससे किसानों को फसल के उपयोग और बाजार की स्थिति के अनुसार बिक्री का विकल्प मिलता है. नागौर और आसपास के बाजारों सहित कई राज्यों में नागौर की मैथी की मांग बनी रहती है, लेकिन इसके भाव स्थिर नहीं रहते. बाजार में आवक बढ़ने या मांग कम होने पर कीमतों में बदलाव हो सकता है.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Nagaur,Rajasthan

First Published :

October 02, 2026, 12:52 IST

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