Crying Health Benefits : रोना कमजोरी नहीं, मेंटल हेल्थ के लिए टॉनिक: जानिए आंसू कैसे कम करते हैं आपका तनाव

Benefits of Crying : कभी गुस्सा, कभी दुख, कभी किसी बात की निराशा और कभी खुशी में भी आंखों से आंसू निकल आते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोने के बाद मन थोड़ा हल्का क्यों महसूस होता है? बचपन से ही कई लोगों को यह सिखाया जाता है कि मजबूत इंसान नहीं रोता. जबकि हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोना इंसानी भावनाओं की एक सामान्य प्रतिक्रिया है और इसे कमजोरी से जोड़ना सही नहीं है. क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक रोना कई तरह की भावनाओं के साथ हो सकता है. दुख, गुस्सा, खुशी, तनाव या किसी भावनात्मक घटना के कारण आंखों में आंसू आ सकते हैं. इमोशनल होकर रोना खास तौर पर तब होता है, जब हमारे अंदर भावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं और उन्हें व्यक्त करने की जरूरत महसूस होती है.
रोना खास तौर पर तब होता है, जब हमारे अंदर भावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं और उन्हें व्यक्त करने की जरूरत महसूस होती है. (Canva)
रोने के बाद मन हल्का क्यों लगता है?जब हम किसी परेशानी को लगातार मन में दबाए रखते हैं, तो भावनात्मक तनाव बढ़ सकता है. हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, भावनाओं को दबाकर रखना मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता. वहीं, रोना दबी हुई भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका हो सकता है. यही वजह है कि कुछ लोगों को रोने के बाद राहत और भावनात्मक हल्कापन महसूस होता है.
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर बार रोने से तनाव तुरंत कम हो जाएगा. क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार कुछ रिसर्च में लोगों ने रोने के तुरंत बाद खुद को ज्यादा खराब महसूस किया, लेकिन करीब 90 मिनट बाद उनकी भावनात्मक स्थिति पहले से बेहतर पाई गई. यानी रोने का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता.
आंसू तनाव के समय शरीर को कैसे प्रभावित कर सकते हैं?आपको बता दें कि तनाव के दौरान शरीर का ‘फाइट या फ्लाइट’ सिस्टम सक्रिय हो जाता है. इस दौरान एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं. लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव नींद, मूड और शारीरिक सेहत पर भी असर डाल सकता है. रोने के बाद कुछ लोगों में शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होने लगता है, जो शरीर को शांत होने और ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ स्थिति में लौटने में मदद करता है. इसी वजह से भावनात्मक रोने के बाद कई लोगों को ऐसा महसूस हो सकता है कि उनका मन कुछ शांत हुआ है.
रोना लोगों को करीब भी ला सकता हैआंसू सिर्फ भावनाएं बाहर निकालने का तरीका नहीं हैं, वे दूसरों को यह संकेत भी दे सकते हैं कि हमें भावनात्मक सहारे की जरूरत है. हार्वर्ड हेल्थ के मुताबिक भावनात्मक रोना लोगों के बीच जुड़ाव, सहानुभूति और सामाजिक समर्थन को बढ़ावा दे सकता है. यानी अगर कोई करीबी व्यक्ति आपके सामने रो रहा है, तो उसे तुरंत ‘रोना बंद करो’ कहने की बजाय उसकी बात सुनना ज्यादा मददगार हो सकता है. कई बार व्यक्ति को सलाह से ज्यादा किसी के शांत होकर साथ रहने की जरूरत होती है.
लेकिन हर परेशानी का इलाज रोना नहींयह समझना भी जरूरी है कि रोना तनाव को मैनेज करने का सिर्फ एक तरीका हो सकता है, पूरा इलाज नहीं. अगर कोई व्यक्ति लगातार उदास रहता है, बार-बार रोता है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं या अपनी भावनाओं को संभालना मुश्किल हो रहा है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है. क्लीवलैंड क्लिनिक भी बताता है कि अगर भावनात्मक रोना जीवन में बाधा डाल रहा है, तो हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह ली जा सकती है.
(एआई तस्वीर)
तनाव कम करने के लिए और क्या करें?तनाव को संभालने के लिए रोने के साथ कई दूसरे तरीके भी अपनाए जा सकते हैं. धीमी और गहरी सांस लेना, माइंडफुलनेस, पर्याप्त नींद, एक्सरसाइज, योग और किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना मददगार हो सकता है. हार्वर्ड हेल्थ और क्लीवलैंड क्लिनिक दोनों तनाव प्रबंधन में इन तरह के उपायों पर जोर देते हैं.
तो अगली बार आंखों में आंसू आएं, खुद को कमजोर समझने की जरूरत नहीं…रोना इंसानी भावनाओं को व्यक्त करने का स्वाभाविक तरीका है. हां, अगर आंसू बार-बार आ रहे हैं या इनके साथ लंबे समय तक उदासी और तनाव बना हुआ है, तो इसे नजरअंदाज करने की बजाय मदद लेना ज्यादा जरूरी है. डिस्क्लेमर:यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है. लगातार तनाव, उदासी या अत्यधिक रोने की समस्या होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें.



