Indresh Upadhyay: खाटूधाम पहुंचे इन्द्रेश उपाध्याय, बाबा श्याम के दर्शन कर बोले- इनकी कृपा से कोई नहीं हारता

Last Updated:October 04, 2026, 14:17 IST
Indresh Upadhyay at Khatushyam Ji: खाटूश्यामजी मंदिर में प्रसिद्ध कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय ने बाबा श्याम के दर्शन कर पूजा-अर्चना की, उन्होंने बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का स्वरूप बताते हुए कहा कि उनकी महिमा देश ही नहीं, विदेशों तक है.
सीकर. विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं, आम श्रद्धालुओं के साथ धर्म, राजनीति, खेल और फिल्म जगत से जुड़ी हस्तियां भी समय-समय पर बाबा श्याम के दर्शन के लिए खाटूधाम पहुंचती हैं. इसी कड़ी में देश के प्रसिद्ध कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय बाबा श्याम की शरण में पहुंचे, उन्होंने दरबार में पहुंचकर बाबा श्याम के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया. खाटूश्यामजी मंदिर पहुंचने पर श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से इन्द्रेश उपाध्याय का स्वागत किया गया.
मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने उनका स्वागत करते हुए बाबा श्याम का पवित्र दुपट्टा ओढ़ाया और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया. इसके बाद इन्द्रेश उपाध्याय ने बाबा श्याम के दर्शन किए और मंदिर में पूजा-अर्चना की. बाबा श्याम के दर्शन करने के बाद कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय सिद्ध पीठ मां जीण भवानी के दरबार में पहुंचे. यहां मंदिर के पुजारी के पुजारी ने उनका स्वागत किया. आपको बता दें कि, इन्द्रेश उपाध्याय युवाओं के बीच श्रीमद्भागवत कथा और सनातन धर्म से जुड़े विषयों को सरल अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए चर्चित हैं.
भगवान कृष्ण के स्वरूप है बाबा श्याम
बाबा श्याम के दर्शन के बाद लोकल 18 से बात करते हुए इन्द्रेश उपाध्याय ने बताया कि बाबा श्याम भगवान कृष्ण के ही स्वरूप हैं. उन्हीं के आशीर्वाद से बाबा श्याम को हर के सहारा कहा जाता है, उनकी कृपा जिस वक्त पर पड़ती है वह जिंदगी में अभी नहीं हारता. बाबा श्याम की महत्ता केवल भारत ही नहीं विदेशों में भी है, उन्होंने कहा में जब विदेशों में कथा करने जाता हुं तो बाबा श्याम के बहुत सारे भक्त मिलते हैं. उन्होंने आगे कहा है सीकर जिला पूरे विश्व में धार्मिक दृष्टि से एक विशेष स्थान रखता है. यहां खाटूश्याम जी विराजित है. इसके अलावा पास ही सालासर बालाजी है, यहीं जीण माता और रैवासा धाम स्थित है.
जानिए कौन है बाबा श्याम
बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में उतरने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे शीश दान मांगा. बर्बरीक ने बिना झिझक भगवान कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया. इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे हारे हुए लोगों के सहारा बनेंगे. तभी से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के नाम से पूजे जाते हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Sikar,Rajasthan
First Published :
October 04, 2026, 14:17 IST



