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जीण माता मेला 11 अक्टूबर से शुरू, ऊंटों पर आएगा बत्तीसी संघ, जानें औरंगजेब से जुड़ी चमत्कार की कहानी

Last Updated:October 07, 2026, 09:39 IST

Jeen Mata Mela Sikar: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ जीण माता का भव्य मेला 11 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि के साथ शुरू होने जा रहा है. इस मेले में देश भर से लाखों भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं. प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस मेले का सबसे मुख्य आकर्षण बत्तीसी संघ होता है जो ऊंटों पर सवार होकर आता है. इसके अलावा माता का इतिहास भी अद्भुत है, जहां औरंगजेब की सेना को मधुमक्खियों के हमले का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उसने यहां अखंड ज्योत जलाने की शुरुआत की थी.

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सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ जीण माता का मेला 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है. शारदीय नवरात्रि में घट स्थापना के साथ ही इस भव्य मेले का आगाज हो जाएगा. मां जीण भवानी के दर्शन के लिए राजस्थान के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर कमेटी और स्थानीय प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है. दांतारामगढ़ के उपखंड अधिकारी ने मेला परिसर में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने के सख्त निर्देश दिए हैं. मेले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी और शांति भंग करने वालों पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा. इसके अलावा, मंदिर परिसर के आसपास पॉलिथीन, शराब और पशु बलि पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. साथ ही धारदार हथियारों की बिक्री भी प्रतिबंधित रहेगी.

मंदिर कमेटी के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों तक माता रानी का भव्य और विशेष श्रृंगार किया जाता है. इन नौ दिनों के लिए माता की पोशाकें भारत के अलग-अलग कोनों से बनकर आती हैं. खासतौर पर नवरात्रि की प्रतिपदा और अष्टमी का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. महाअष्टमी के दिन माता का शाही श्रृंगार होता है. इस दिन के लिए कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, सूरत और भोपाल से लगभग 20 विशेष पोशाकें तैयार करवाकर लाई जाती हैं. माता को सोने का खास हार भी पहनाया जाता है. मंदिर की सजावट के लिए फ्लाइट के जरिए विशेष फूल भी मंगवाए जाते हैं.

बत्तीसी संघ की है अनोखी और प्राचीन परंपराजीण माता मेले का सबसे बड़ा आकर्षण और खास परंपरा ‘बत्तीसी संघ’ से जुड़ी है. यह संघ अष्टमी की रात को ठीक 12 बजे पारंपरिक तरीके से मंदिर के गर्भगृह में अपनी पूजा और रस्में पूरी करता है. इस संघ के लोग सजे-धजे ऊंटों पर सवार होकर आते हैं. इस संघ की महिलाएं अपने घर से ही सिर पर जलती हुई सिगड़ी रखकर पैदल ही माता के दरबार तक पहुंचती हैं. यह एक बेहद कठिन और आस्था से भरी परंपरा है जिसे सदियों से पूरे विधि-विधान के साथ निभाया जा रहा है.

भाई-बहन के अटूट प्रेम की कहानीजीण माता का जन्म चौहान वंश में हुआ था और वह अपने भाई हर्ष से बहुत प्यार करती थीं. कथा के अनुसार, एक बार जीण माता और उनकी भाभी पानी भरने के लिए तालाब गईं. वहां दोनों के बीच इस बात पर बहस हो गई कि हर्ष किसे ज्यादा प्यार करता है. तय हुआ कि घर लौटने पर हर्ष जिसके सिर से पानी का मटका पहले उतारेगा, वही उसकी सबसे प्रिय होगी. घर पहुंचने पर हर्ष ने अनजाने में अपनी पत्नी के सिर से मटका पहले उतार दिया. इस बात से आहत होकर जीण माता घर छोड़कर अरावली के काजल शिखर पर चली गईं और घोर तपस्या करने लगीं. जब हर्ष को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो वह बहन को मनाने पहुंचे, लेकिन माता ने लौटने से मना कर दिया. इसके बाद हर्ष ने भी वहीं पहाड़ी पर भैरव की तपस्या शुरू कर दी. आज भी हर्ष पर्वत पर हर्ष भैरव नाथ का मंदिर स्थित है.

जब औरंगजेब की सेना पर हुआ मधुमक्खियों का हमलाजीण माता के चमत्कार की कहानी मुगल काल से भी जुड़ी है. माना जाता है कि मुगल बादशाह औरंगजेब जब हिंदू मंदिरों को तोड़ते हुए शेखावाटी पहुंचा, तो उसने पहले हर्षनाथ भैरव मंदिर को नुकसान पहुंचाया. इसके बाद जब उसकी सेना जीण माता मंदिर की ओर बढ़ी, तो स्थानीय लोगों ने माता से रक्षा की गुहार लगाई. कहते हैं कि माता के चमत्कार से मधुमक्खियों के एक विशाल झुंड ने मुगल सेना पर जोरदार हमला कर दिया. मधुमक्खियों के डंक से मुगल सेना के सैनिक जान बचाकर भागने लगे. खुद बादशाह औरंगजेब की हालत भी बेहद खराब हो गई. अपनी जान बचाने के लिए औरंगजेब ने माता के सामने घुटने टेक दिए और मंदिर में अखंड ज्योत जलाने का वचन दिया. इसके बाद लंबे समय तक दिल्ली दरबार से इस ज्योत के लिए तेल भेजा जाता रहा. औरंगजेब के बाद जयपुर राजघराने ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और साल में दो बार नवरात्रि के समय तेल भेजना शुरू कर दिया. आज भी यह अखंड ज्योत मंदिर में लगातार जल रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Sikar,Sikar,Rajasthan

First Published :

October 07, 2026, 09:39 IST

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