Tonk News: चैम्बर खाली गलियारों में कुत्ते, टोंक के सरकारी अस्पताल में कौन संभाल रहा व्यवस्था?

Last Updated:October 12, 2026, 18:01 IST
Tonk News: टोंक के सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं, डॉक्टर चैम्बर से गायब नजर आए तो गलियारों में आवारा कुत्ते सोते मिले. प्रतिबंधित दवाओं की चोरी और स्टोर में लापरवाही के बाद भी हालात नहीं सुधरे. मरीज डॉक्टरों और दवाओं के लिए परेशान हैं और निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं.
टोंक. शहर के सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं. अस्पताल में पहले प्रतिबंधित दवाओं की चोरी का मामला सामने आया और इसके बाद स्टोर में लापरवाही को लेकर सवाल उठे. इसके बावजूद अस्पताल के हालात में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है. अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता से लेकर साफ-सफाई और आवारा जानवरों की मौजूदगी तक, कई समस्याएं मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं.
अस्पताल की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो यहां व्यवस्थाओं में सुधार के दावों के बीच जमीनी हालात अलग तस्वीर पेश करते नजर आते हैं. आज अस्पताल में कई डॉक्टर अपने चैम्बर से गायब दिखाई दिए, ऐसे में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिलना स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
अस्पताल के गलियारों में कुत्तों का डेरा
अस्पताल में आवारा जानवरों की मौजूदगी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, अस्पताल के गलियारों में कुत्ते सोते हुए नजर आए. बताया जा रहा है कि परिसर में अक्सर आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है. अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की स्थिति मरीजों की सुरक्षा, स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के लिहाज से चिंता बढ़ाती है. खासकर बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए ऐसी परिस्थितियां परेशानी का कारण बन सकती हैं.
बैठकों में व्यस्त अधिकारी, व्यवस्थाओं पर सवाल
अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) शैलेन्द्र चौधरी और अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) प्रतीक सालोदिया की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि अधिकारी बैठकों में व्यस्त हैं, लेकिन अस्पताल की जमीनी व्यवस्थाओं में सुधार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है.
निजी अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर मरीज
सरकारी अस्पताल में इलाज और दवाओं की उपलब्धता को लेकर मरीजों की परेशानी का असर उनकी जेब पर भी पड़ रहा है. मरीजों को समय पर डॉक्टर और दवाएं नहीं मिलने की स्थिति में उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. सरकारी अस्पताल आमजन को सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित होते हैं. ऐसे में टोंक के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, दवाओं की व्यवस्था दुरुस्त करने और आवारा जानवरों की समस्या पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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October 12, 2026, 17:58 IST



