Health Tips: रिश्तेदारी में शादी करने पर बच्चे को होती है दिल में छेद की बीमारी? डॉक्टर ने बताया क्या-क्या हैं कारण

नई दिल्ली.16 वर्षीय एक लड़की की दिल्ली एम्स में सितंबर 2026 में मौत हो जाती है. मौत का कारण जन्मजात दिल में छेद, जिसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) बताया जाता है. आखिर क्या है दिल में छेद की गंभीर बीमारी जिस वजह से मरीज 20 साल की उम्र तक भी नहीं पहुंच पाता. यही जानने के लिए डॉ. सिम्मी मनोचा से खास बातचीत की गई जोकि देश की जानी मानी कार्डियोलॉजिस्ट हैं और फरीदाबाद के एक अस्पताल में डायरेक्टर के पद पर हैं. वह दिल्ली एनसीआर में आयोजित इको एशिया-इको इंडिया कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए आई हुई थी. इस दौरान डॉ. सिम्मी मनोचा ने बताया कि ऐसा तब होता है जब लोग एक ही रिश्तेदारी में शादी कर लेते हैं या फिर मां को डायबिटीज हो. ऐसे मामलों में इस तरह की बीमारियां हो सकती है.
क्या है दिल में छेद की बीमारीडॉ. सिम्मी मनोचा ने बताया कि बच्चों में जन्मजात दिल में छेद की बीमारी को कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट कहते हैं. इसमें बच्चे के दिल की बनावट जन्म से ही सामान्य से अलग हो सकती है. दिल की दोनों ऊपरी या दोनों निचली कोठरियों के बीच की दीवार में छेद होना इसका एक प्रकार है. उन्होंने बताया कि मां के पेट में दिल के ऊपरी चेंबर के बीच एक प्राकृतिक खुलाव होता है, जिसे फोरामेन ओवेल कहते हैं. यह आमतौर पर जन्म के बाद बंद होने लगता है. अगर दिल की दीवार का विकास पूरी तरह नहीं हुआ और उसमें छेद रह गया तो उसे जन्मजात हृदय दोष कहा जा सकता है. कुछ छोटे छेद अपने आप बंद हो सकते हैं, लेकिन हर छेद अपने आप बंद नहीं होता है.
छेद बंद ना होने पर ये होती हैं परेशानीडॉ. सिम्मी मनोचा ने बताया कि कुछ बच्चों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, जबकि कुछ में ये समस्याएं हो सकती है जैसे दूध पीते समय जल्दी थक जाना या पसीना आना. सांस तेज चलना या सांस लेने में परेशानी. वजन ठीक से नहीं बढ़ना. बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना. गंभीर मामलों में दिल और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ना. उन्होंने बताया अगर किसी बच्चे में जन्म से ही यह लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. वैसे ज्यादातर जब बच्चे का जन्म होता है तभी डॉक्टर उसका फुल बॉडी चैकअप करते हैं और उसके माता-पिता को यह देखकर बता देते हैं कि बच्चों में कोई जन्मजात बीमारी है या नहीं है. अगर फिर भी किसी वजह से ऐसा नहीं हो सका है और आपके बच्चे में यह लक्षण नजर आ रहे हैं तो लापरवाही ना करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. समय पर इसका इलाज कराएं क्योंकि अगर समय पर इसका इलाज कराया गया तो बच्चा एक बेहतर जीवन जी सकता है.
इस जांच से पता चलता है दिल में छेद है या नहींडॉ. सिम्मी मनोचा ने बताया कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण जांच इकोकार्डियोग्राफी या इको होता है. यह दिल का अल्ट्रासाउंड होता है. इससे पता चलता है कि छेद कहां है, कितना बड़ा है और खून का बहाव किस तरह हो रहा है.
छेद छोटा है तो डॉक्टर समय-समय पर जांच करके देख सकते हैं कि वह बंद हो रहा है या नहीं. बड़े या परेशानी पैदा करने वाले छेद के लिए उपचार की जरूरत हो सकती है. यदि बच्चे के होंठ नीले पड़ें या सांस लेने में बहुत परेशानी हो, तो तुरंत अस्पताल ले जाएं.
ऐसे समझें बीमारी कोएग्जीक्यूटिव ऑर्गनाइजिंग प्रेसिडेंट, इंडियन एकेडमी ऑफ इकोकार्डियोग्राफी (आईएई) डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि इस बीमारी को दो तरीके से समझ सकते हैं. पहला पॉइंट यह है कि जब बच्चा मां के पेट में होता है, तब उसके दिल में खून के बहाव के लिए एक प्राकृतिक रास्ता होता है. इसे फोरामेन ओवेल कहते हैं. जन्म के बाद बच्चा जब सांस लेना शुरू करता है, तो यह रास्ता आमतौर पर बंद होने लगता है. कुछ बच्चों में यह पूरी तरह बंद नहीं होता.
दूसरा पॉइंट कुछ बच्चों के दिल की दीवार का विकास गर्भ में पूरी तरह नहीं हो पाता. इससे दीवार में छेद रह सकता है. इसे जन्मजात दिल में छेद कहते हैं. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि जन्म के बाद दिल के सभी छेद बंद हो जाते हैं. इस दौरान डॉ. हंसा गुप्ता जोकि चेयरमैन, साइंटिफिक कमेटी आईएई हैं और डॉ. एस. के. पराशर, इंटरनेशनल चेयरमैन आईएई हैं वह भी मौजूद रहे. इसके अलावा डॉ. एच. के. चोपड़ा, नेशनल चेयरमैन, आईएई और डॉ. कपिल खन्ना, प्रेसिडेंट, इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट्स (आईएसीसी) ने भी दिल की बीमारियों पर खुलकर चर्चा की.



