Ghata Wali Mataji Udaipur History

Last Updated:October 12, 2026, 08:04 IST
Ghata Wali Mataji Udaipur: उदयपुर के देबारी की पहाड़ी पर स्थित घाटा वाली माताजी का मंदिर मेवाड़ की लोकआस्था और गहरी श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र है. शारदीय नवरात्र के दौरान यहां देश-विदेश से आने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है. इस पवित्र स्थान से कई ऐतिहासिक और चमत्कारी कहानियां जुड़ी हैं, जिनमें मुगल सेना को माता की नाभि से निकले भ्रमरों द्वारा पीछे हटाने का किस्सा और 1990 के दशक में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के समय मंदिर को बचाने के लिए सड़क का रास्ता बदलने का प्रसंग बेहद प्रसिद्ध हैं. नीम के पेड़ के नीचे छोटे से देवरा से शुरू हुई यह यात्रा आज एक भव्य मंदिर, धर्मशाला और 35 फीट ऊंचे विशाल त्रिशूल के रूप में स्थापित होकर मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत की पहचान बन चुकी है.
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Ghata Wali Mataji Udaipur: देबारी माता मंदिर का इतिहास व चमत्कार
उदयपुर: उदयपुर के देबारी की पहाड़ी पर विराजित घाटा वाली माताजी का मंदिर मेवाड़ की लोकआस्था और गहरी श्रद्धा का एक अनूठा केंद्र है. शारदीय नवरात्र के इन पवित्र दिनों में माता के दरबार में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. दूर-दूर से लोग माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंच रहे हैं. इतिहास के पन्नों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, उदयपुर शहर की स्थापना से पहले यहां एक नीम के पेड़ के नीचे माता का छोटा-सा देवरा हुआ करता था. समय के साथ यह स्थान मेवाड़ के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में शुमार हो गया है. यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है, ऐसा लोगों का अटूट विश्वास है. मंदिर की भव्यता और यहां होने वाले विशेष धार्मिक आयोजन हर साल लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.
घाटा वाली माताजी के इतिहास से जुड़ी सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाली कहानी मुगलकाल की है. लोकमान्यता के अनुसार, जब मेवाड़ पर बाहरी आक्रमण का भयंकर संकट आया था, तब देवड़ा राजपूत सरदारों ने माता के दरबार में शरण ली और उनकी विशेष आराधना की. किंवदंती है कि माता की कृपा से उनकी नाभि से हजारों की संख्या में भ्रमर यानी भौंरे प्रकट हुए और वे अचानक मुगल सेना पर टूट पड़े. इस अप्रत्याशित और भयानक हमले से मुगल सैनिक पूरी तरह घबरा गए और वे टिक नहीं पाए. सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा और उन्हें खदेड़ते हुए नाहर मंगरा तक भगा दिया गया. यह घटना माता की अलौकिक शक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है.
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण और अनोखा प्रसंगमाता की महिमा से जुड़ा एक अन्य आधुनिक प्रसंग उदयपुर-चित्तौड़गढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान का है. 1990 के दशक में जब इस हाईवे का निर्माण कार्य चल रहा था, तब सड़क के रास्ते में मंदिर आने के कारण इसे हटाने की योजना बनाई गई थी. स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अनुसार, जब खुदाई करने वाली मशीनें वहां पहुंचीं, तो उनमें अचानक गंभीर तकनीकी खराबी आ गई. इसके साथ ही इंजीनियरों और कामगारों को माता के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन होने की चर्चाएं आम हो गईं. इन सभी घटनाओं के बाद प्रशासन और निर्माण कंपनी ने अपने कदम पीछे खींच लिए और मंदिर को यथावत रखते हुए पहाड़ी को काटकर सड़क का रास्ता बदला गया.
नवरात्र उत्सव और मंदिर परिसर की भव्यतामाता के दरबार में शारदीय नवरात्र के नौ दिनों के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है. प्रातकाल और संध्या आरती के समय गूंजने वाले भजन-कीर्तन पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों की सुविधा के लिए भव्य पांडाल और धर्मशाला का निर्माण किया गया है. इसके अलावा पहाड़ी पर स्थापित लगभग 35 फीट ऊंचा विशाल त्रिशूल दूर से ही आने वाले यात्रियों का ध्यान आकर्षित करता है. मंदिर के पुजारी वरदा जी और ट्रस्ट से जुड़े दलपत सिंह देवड़ा के अनुसार, यहां आने वाले भक्तों की हर मुराद माता जरूर पूरी करती हैं. सदियों पुरानी परंपराएं, अटूट विश्वास और लोककथाएं इस पवित्र दरबार को मेवाड़ की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर बनाती हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Udaipur,Udaipur,Rajasthan
First Published :
October 12, 2026, 08:04 IST



