नाडोल के गवई तालाब में आखिर क्या हुआ? सैकड़ों मछलियां मरीं, पानी से उठ रही तेज बदबू, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

Last Updated:October 17, 2026, 16:43 IST
Nadol Ke Talab Ka ground Report: पाली जिले के नाडोल कस्बे के गवई तालाब में सैकड़ों मछलियों की मौत से हड़कंप मच गया है. तालाब का पानी काला होने और तेज दुर्गंध से स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है. अचानक सैकड़ों की संख्या में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है. तालाब के पानी से उठती तेज दुर्गंध ने आसपास की घनी आबादी और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है. इतनी बड़ी तादाद में जलीय जीवों की मौत से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है.
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पाली. पाली जिले के रानी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक नाडोल कस्बे से इस वक्त की एक बहुत ही गंभीर और विचलित कर देने वाली खबर सामने आ रही है. नाडोल के प्रसिद्ध गवई (मलोप) तालाब में पिछले कुछ दिनों से लगातार सैकड़ों मछलियों की मौत हो रही है. तालाब का पानी काला पड़ता जा रहा है और उससे उठती असहनीय बदबू ने आसपास के निवासियों का जीना दूभर कर दिया है. पशु-पक्षियों के जीवनदाता और इलाके के भूजल स्तर के आधार स्तंभ कहे जाने वाले इस तालाब की बदहाली ने पूरे गांव में हड़कंप मचा दिया है.
आखिर क्यों तड़प-तड़पकर मर रही हैं मछलियां? क्या पानी में घुला है जहरीला केमिकल या घट गई है ऑक्सीजन? इस तरह के सवालो के बीच ग्रामीणों के लिए मछलियों को बचाने और हवा में फैल रही बदबू को रोक पाना काफी मुश्किल हो रहा है.
सैकडो मछलियों के मरने का सिलसिला जारीजिले के रानी उपखंड क्षेत्र अंतर्गत ऐतिहासिक नाडोल कस्बे के मुख्य गवई (मलोप) तालाब में बीते कुछ दिनों से अचानक सैकड़ों की संख्या में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है. तालाब के पानी से उठती तेज दुर्गंध ने आसपास की घनी आबादी और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है. इतनी बड़ी तादाद में जलीय जीवों की मौत से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन की अनदेखी को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है.
गर्मी और गंदगी के जमाव के चलते परेशानीस्थानीय निवासी मीठालाल डाबी सहित कई ग्रामीणों ने तालाब के पानी में जहरीले पदार्थ या केमिकल मिलने की गंभीर आशंका व्यक्त की है. वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी और गंदगी के जमाव के कारण पानी में घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर अचानक गिर जाना भी इस हादसे की बड़ी वजह हो सकता है. इसके अलावा, लंबे समय से तालाब के घाटों पर बेधड़क हो रही वाहनों और कपड़ों की धुलाई ने भी इसके पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को पूरी तरह तबाह कर दिया है. हालांकि, मछलियों की सामूहिक मौत के वास्तविक कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है.
गांव में यह तालाब एक मात्र सहाराउल्लेखनीय है कि यह ऐतिहासिक गवई तालाब नाडोल क्षेत्र के बेजुबान पशु-पक्षियों और मवेशियों के लिए पीने के पानी का मुख्य और एकमात्र सहारा है. इतना ही नहीं, यह तालाब कस्बे के भूजल स्तर (Groundwater Level) को रिचार्ज करने और आसपास के कुओं में पानी बनाए रखने के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है. ऐसे में तालाब के पानी का दूषित होना सीधे तौर पर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है.
ग्रामीणों ने की प्रशासन से मांगबढ़ते संकट को देखते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने उपखंड प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तालाब के पानी के नमूने लेकर तुरंत वैज्ञानिक जांच करवाने की पुरजोर मांग की है. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मछलियों की मौत के सटीक कारणों का समय रहते पता लगाया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए तालाब को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अविलंब ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि समय रहते एक बड़े पर्यावरणीय संकट को टाला जा सके.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
October 17, 2026, 16:43 IST



