भारत सरकार की Meta को दो टूक, गलत जानकारी और एडिटेड वीडियो के प्रसार पर लगानी होगी रोक

मेटा एक बार फिर भारत सरकार की जांच के दायरे में है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से Facebook और Instagram पर कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम की समीक्षा करने को कहा है. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने प्लेटफॉर्म पर भ्रामक जानकारी, एडिट की गई तस्वीरों और वीडियो के प्रसार के साथ-साथ ऐसे कंटेंट को लेकर चिंता जताई है, जो हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा कर सकता है.
सरकार चाहती है कि मेटा के एल्गोरिदम किसी एक विचार या सीमित नैरेटिव को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा न दें, बल्कि यूजर्स तक प्रासंगिक और भरोसेमंद जानकारी के अलग-अलग नजरिए पहुंचाएं. रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय की एडवाइजरी में कंपनी के लिए छह जरूरी निर्देश शामिल हैं.
Facebook और Instagram के कंटेंट पर सरकार की नजर
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक MeitY ने मेटा से कहा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम यूजर्स को व्यापक और विश्वसनीय जानकारी दिखाए. किसी एक विचार को ज्यादा विजिबिलिटी देने या कुछ चुनिंदा नैरेटिव को बार-बार प्रमोट करने से बचने की जरूरत बताई गई है.
मंत्रालय ने ऐसे कंटेंट की पहचान करने, उसकी समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर उसे संबंधित टीम तक पहुंचाने की प्रक्रिया को भी मजबूत करने के निर्देश दिए हैं, जिससे लोगों में भ्रम या डर फैल सकता है अथवा हिंसा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
सरकार ने पुराने या चुनिंदा हिस्सों में एडिट किए गए विजुअल्स को मौजूदा घटनाओं के रूप में पेश किए जाने पर भी चिंता जताई है. इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों या पुलिस कार्रवाई से जुड़े भ्रामक दावों और कानून-व्यवस्था की घटनाओं को पर्याप्त संदर्भ के बिना दिखाने वाले वीडियो का भी जिक्र किया गया है.
एडवाइजरी के मुताबिक, मेटा को यह सुनिश्चित करना होगा कि भ्रामक या बदले हुए कंटेंट को उसके रिकमेंडेशन सिस्टम के जरिए जरूरत से ज्यादा बढ़ावा न मिले और ऐसे पोस्ट बार-बार यूजर्स को न दिखाए जाएं.
भारतीय कानूनों का पालन करने के निर्देश
रिपोर्ट के अनुसार, MeitY ने मेटा को भारतीय कानूनों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने की याद दिलाई है. इसमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के प्रावधानों का जिक्र किया गया है.
कंपनी से कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अधिकृत सरकारी संस्थाओं के साथ सहयोग करने को भी कहा गया है. इसके तहत निर्धारित समयसीमा में जरूरी जानकारी या सहायता उपलब्ध कराने की बात शामिल है.
मेटा के लिए क्या हैं छह निर्देश?
रिपोर्ट में एडवाइजरी के प्रमुख बिंदुओं के मुताबिक, मेटा से इन क्षेत्रों में कदम उठाने को कहा गया है:
प्रतिबंधित और गैरकानूनी कंटेंट की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करना.
Facebook और Instagram के कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम की समीक्षा करना.
भ्रामक कंटेंट को असामान्य रूप से ज्यादा पहुंच मिलने से रोकना.
पुराने या एडिट किए गए विजुअल्स को मौजूदा घटनाओं के रूप में फैलने से रोकने के लिए सिस्टम मजबूत करना.
हिंसा, डर या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कंटेंट की तेजी से पहचान और समीक्षा करना.
भारतीय कानूनों के तहत अधिकृत सरकारी संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ निर्धारित समयसीमा में सहयोग करना.
फिलहाल, रिपोर्ट में सामने आई जानकारी के आधार पर यह एडवाइजरी मेटा के कंटेंट मॉडरेशन और रिकमेंडेशन सिस्टम पर सरकार की बढ़ती निगरानी को दर्शाती है. इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी के प्रसार को सीमित करना और यूजर्स तक ज्यादा भरोसेमंद कंटेंट पहुंचाना है.



