Avani Lekhara: जयपुर की बेटी अवनी लेखरा ने फिर रचा इतिहास, सिल्वर जीतकर 2028 पैरालिंपिक के लिए किया क्वालिफाई

Last Updated:October 22, 2026, 12:07 IST
Avani Lekhara Silver Medal: जयपुर की बेटी और स्टार पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा ने जापान के नागोया में आयोजित पैरा-एशियन गेम्स में R2 विमेंस 10 मीटर एयर राइफल SH1 कैटेगरी में 249.6 अंक हासिल कर सिल्वर मेडल जीता. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने 2028 लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर लिया.
जयपुर की बेटियां दुनियाभर में अपने खेल से देश-विदेश में भारत का नाम रौशन कर रही हैं, हालही में जापान के नागोया में चल रहे पैरा-एशियन गेम्स में जयपुर की बेटी अवनी लेखरा ने R2 विमेंस 10 मीटर राइफल शूटिंग की SH1 कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता हैं. अवनी ने पैरा-एशियन गेम्स की इस प्रतियोगिता में 249.6 अंक हासिल सिल्वर मेडल जीता हैं. हाल ही में अवनी ने डब्ल्यूएसपीएस वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी, लेकिन वह मेडल नहीं जीत पाई थी. लेकिन इस बार उन्होंने जीत का तिरंगा लहरा दिया.
पैरा-एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के साथ ही जयपुर की अवनी ने 2028 लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है, जिसमें SH1 कैटेगरी में कमर से नीचे की दिव्यांगता वाले शूटर पैरालंपिक में हिस्सा लेते हैं. दो बार पैरालंपिक में गोल्ड जीतने के अवनी राजस्थान की पहली ऐसी पैरालंपिक खिलाड़ी बन गई हैं जो लगातार तीसरी बार पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. अवनी ने 2015 में जयपुर के जगतपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में ट्रेनिंग की शुरुआत की थी.
आपको बता दें, जयपुर में जन्मी अवनी लेखर भारत की सबसे प्रेरणादायी एथलीटों में से एक हैं. लगातार 3 पैरालंपिक ओलंपिक में पदक जीतकर वह पहली भारतीय महिला एथलीट हैं जिन्होंने लगातार ओलंपिक में 3 पदक जीते हैं. अवनी लेखरा की सटीकता, एकाग्रता और अनुशासन से उन्होंने निशानेबाजी में इतिहास रचा जयपुर को हमेशा गौरवान्वित किया हैं. अवनी लेखरा ने 2015 में प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और उनकी बायोग्राफी ‘अ शॉट एट हिस्ट्री’ से प्रेरित होकर अपने निशानेबाजी खेल की शुरुआत की थी.
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अवनी लेखरा ने जीवन के की बड़े संघर्ष के साथ अपने आप को मजबूत किया हैं, केवल 11 साल उम्र में एक कार दुर्घटना में उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई. रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण उसे हमेशा से व्हीलचेयर पर बैठना पड़ा. लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपनी इस कमजोरी को उन्होंने अपना हथियार बनाया और पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने निशानेबाजी की शुरुआत की और अपने जीवन की कहानी को दुनिया के सामने अडिग हौसले, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता के साथ बुना. आज वह भारत की सर्वश्रेष्ठ पैरा निशानेबाज खिलाड़ी हैं.
अवनी लेखरा ने ओलंपिक शूटिंग चैंपियन अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा ‘अ शॉट एट हिस्ट्री’ से अपने शूटिंग की शुरुआत की, चोट से उभरने के बाद उनके पिता ने उन्हें खेलों में हाथ आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने खेल के साथ पढ़ाई भी जारी रखी और राजस्थान यूनिवर्सिटी से फाइव ईयर लॉ डिग्री की पढ़ाई की ओर अपने खेल पर लगातार फोकस रखा. ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के बीच संतुलन बनाते हुए अवनी ने राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक लगातार जीत हासिल की और पैरा ओलंपिक तक पहुंचकर अपनी पहचान दुनियाभर में बनाई.
अगर बात करें अवनी लेखर की निशानेबाज में उनकी खास उपलब्धियों की तो 2021 में टोक्यो पैरालिंपिक की एक ही स्पर्धा में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पैरालंपियन हैं. इसके अलावा अवनी पैरालंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं. ओलंपिक के अवनी लेखरा विश्व कप, एशियाई पैरा खेल, वर्ल्ड पैरा स्पोर्ट्स चैंपियनशिप सहित विभिन्न कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं मेडल जीत चुकी हैं. इसके अलावा कोरिया में आयोजित हुई प्रतियोगिता में 10 मीटर एयर राइफल प्रोन मिक्स्ड में 631.7 स्कोर के वह वर्ल्ड रिकॉर्ड बना.
अवनी लेखरा के सर्वश्रेष्ठ खेल और ओलंपिक में पदक विजेता के रूप में उन्हें भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा 2022 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका हैं. भारत सरकार के अलावा राजस्थान सरकार द्वारा भी उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री तक उन्हें व्यक्तिगत रूप से सम्मानित कर चुके हैं.
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October 22, 2026, 12:07 IST



