धौलपुर के तीर्थराज मचकुंड में पीलू के पेड़ के नीचे विराजमान हैं भूतेश्वर महादेव, भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है इसकी पौराणिक मान्यता

Last Updated:October 23, 2026, 08:02 IST
Dholpur Machkund Bhuteshwar Mahadev temple history and beliefs: राजस्थान के धौलपुर स्थित प्रसिद्ध तीर्थराज मचकुंड में प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां भगवान शिव का शिवलिंग एक प्राचीन पीलू के पेड़ के नीचे विराजमान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने मचकुंड में यज्ञ शुरू करने से पहले भगवान शिव की आराधना की थी, जिसके बाद भगवान शिव भूतेश्वर महादेव के रूप में यहां प्रकट हुए थे. मचकुंड आने वाले श्रद्धालु पवित्र सरोवर के दर्शन के साथ भूतेश्वर महादेव के दर्शन करना नहीं भूलते हैं.
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धौलपुर: राजस्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक जिले धौलपुर में स्थित तीर्थराज मचकुंड में प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव का पवित्र शिवलिंग किसी कंक्रीट या मंदिर के गर्भगृह के भीतर नहीं, बल्कि एक प्राचीन पीलू के पेड़ के नीचे खुले में विराजमान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान का सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राजा मचकुंड से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण इस पावन स्थल का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है. आज भी मचकुंड आने वाला हर श्रद्धालु भूतेश्वर महादेव के दर्शन किए बिना वापस नहीं लौटता है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने राजा मचकुंड के माध्यम से असुर कालयवन का वध कराया था, तब महाराज मचकुंड ने ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने का उपाय पूछा था. मान्यता है कि इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें यहां यज्ञ करने के लिए कहा था. यज्ञ की विधिवत तैयारी के दौरान सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया था, जिसमें विशेष रूप से भगवान शिव का भी आह्वान किया गया था. कहा जाता है कि पीलू के पेड़ के नीचे की गई तपस्या और मंत्रोच्चार से प्रसन्न होकर भोलेनाथ स्वयं प्रकट हुए और यज्ञ की पूर्ण सफलता का वरदान दिया. तभी से यहां भगवान शिव ‘भूतेश्वर महादेव’ के रूप में पूजे जाने लगे, हालांकि यह पूरा प्रसंग प्राचीन धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.
एक ही परिसर में कई प्राचीन मंदिर और पवित्र सरोवरभूतेश्वर महादेव मंदिर की सबसे अनूठी बात यह है कि शिवलिंग के पास स्थित वह प्राचीन पीलू का पेड़ आज भी अपनी मूल अवस्था में मौजूद है. इस मंदिर के ठीक नजदीक ही प्रसिद्ध और पवित्र मचकुंड सरोवर स्थित है, जो इस तीर्थ की शोभा को और बढ़ाता है. इस सरोवर के आसपास कई अन्य प्राचीन मंदिर भी स्थापित हैं, जिनमें भगवान हनुमान का मंदिर और नर्मदेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर प्रमुख हैं. एक ही स्थान पर इतने सारे धार्मिक स्थल होने के कारण मचकुंड आने वाले भक्त इन सभी मंदिरों में भी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भारी भीड़धौलपुर के इस ऐतिहासिक भूतेश्वर महादेव मंदिर में सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान और गतिविधियां आयोजित की जाती हैं. इन विशेष अवसरों पर दूर-दूर से श्रद्धालु आकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और विधि-विधान से पूजा-पाठ संपन्न कराते हैं. मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थित पवित्र मचकुंड सरोवर के जल से महादेव का अभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इसके अलावा, कई श्रद्धालु अपने कष्टों के निवारण के लिए कालसर्प दोष से जुड़ी विशेष पूजा भी यहीं संपन्न कराते हैं. भक्तों का अटूट विश्वास है कि भूतेश्वर महादेव की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी दुख और संकट दूर हो जाते हैं. इसी गहरी आस्था के चलते प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर धौलपुर के सबसे खास धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
October 23, 2026, 08:02 IST



