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Bharatpur Kushti Tradition | जसवंत प्रदर्शनी मेले में कुश्ती दंगल और इतिहास

Last Updated:October 23, 2026, 10:09 IST

Bharatpur Kushti Tradition: राजस्थान के भरतपुर में राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही कुश्ती और दंगल की प्राचीन परंपरा आज भी पूरी तरह कायम है. हर साल आयोजित होने वाले प्रसिद्ध जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले में कुश्ती प्रतियोगिता आकर्षण का मुख्य केंद्र रहती है, जहाँ देश भर के पहलवान अखाड़े में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं. इस दंगल में पहलवानों के सामने जसवंत केसरी, ब्रज केसरी और भरतपुर केसरी जैसे प्रतिष्ठित खिताब जीतने की चुनौती होती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में खेल प्रेमी पहुंचते हैं.

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भरतपुर: राजस्थान के ऐतिहासिक शहर भरतपुर में राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही कुश्ती और पारंपरिक दंगल की प्राचीन संस्कृति आज भी पूरी शिद्दत के साथ कायम है. बदलते वक्त के साथ आधुनिक खेलों के स्वरूप में भले ही कई बदलाव आए हों, लेकिन भरतपुर की मिट्टी में रची-बसी पारंपरिक कुश्ती का रोमांच आज भी स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों के सिर चढ़कर बोलता है. यहाँ हर साल भव्य रूप से आयोजित होने वाला ‘जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला’ पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिताओं के कारण पूरे क्षेत्र में मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहता है. इस मेले के दौरान देश के कोने-कोने से नामी पहलवान अखाड़े में उतरते हैं और अपनी ताकत, पैंतरेबाजी, तकनीक और अद्भुत दमखम का खुलकर प्रदर्शन करते हैं.

जसवंत प्रदर्शनी मेले के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला यह कुश्ती दंगल सिर्फ दो पहलवानों के बीच शारीरिक बल का मुकाबला मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी सदियों पुरानी खेल परंपरा और भारतीय संस्कृति से जुड़ी गौरवशाली विरासत का एक जीवंत प्रतीक है. अखाड़े में उतरने वाला हर एक पहलवान मैदान में जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत और कठिन तैयारी के साथ दांव-पेच आजमाता है. इस रोमांचक मुकाबले को देखने के लिए दूर-दूर से भारी संख्या में कुश्ती प्रेमी और आम नागरिक अखाड़े के चारों ओर एकत्र होते हैं, जो सीटी बजाकर और तालियां गड़गड़ाकर पहलवानों का उत्साह बढ़ाते हैं.

प्रतिष्ठित खिताब जीतने की होती है कड़ी टक्करइस पारंपरिक प्रतियोगिता की सबसे बड़ी और खास बात यह होती है कि यहाँ अखाड़े में उतरने वाले पहलवानों के सामने ‘जसवंत केसरी’, ‘ब्रज केसरी’ और ‘भरतपुर केसरी’ जैसे अत्यंत प्रतिष्ठित एवं सम्मानित खिताब अपने नाम करने की चुनौती होती है. इन गौरवशाली खिताबों को हासिल करने के लिए धुरंधर पहलवान एक-जैसे मुकाबले में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते हैं. जैसे-जैसे कुश्ती के मुकाबले आगे बढ़ते हैं और दांव-पेच का दौर गहराता है, वैसे-वैसे दर्शकों का उत्साह भी चरम पर पहुँच जाता है.

नई पीढ़ी को पारंपरिक खेलों से जोड़ रही है यह विरासतभरतपुर में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही कुश्ती की यह शानदार परंपरा आज की नई पीढ़ी को भी हमारे पारंपरिक और देसी खेलों से मजबूती के साथ जोड़ने का काम कर रही है. स्थानीय अखाड़ों में घंटों पसीना बहाने वाले युवा पहलवान अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और अनुशासन के दम पर इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे ऐतिहासिक आयोजन स्थानीय स्तर पर छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को अपनी एक नई पहचान बनाने का सुनहरा अवसर भी प्रदान करते हैं. राजा-महाराजाओं के शासनकाल से चली आ रही यह अनूठी परंपरा आज भी भरतपुर की सांस्कृतिक पहचान को रोशन कर रही है और आने वाली पीढ़ियों तक इस अमूल्य विरासत को सुरक्षित पहुँचाने में अपनी अहम भूमिका निभा रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

October 23, 2026, 10:09 IST

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