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jalor news I राजस्थान में सूखे पर सरकार का बड़ा फैसला, 14 जिलों की 80 तहसीलें सूची में शामिल

जालोर. राजस्थान में मानसून की बेरुखी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, औसत से कम बारिश, भूजल और सतही जल की उपलब्धता में कमी और खरीफ फसलों की कमजोर स्थिति को देखते हुए प्रदेश की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. इनमें जालोर जिले की सभी 10 तहसीलें शामिल हैं. सरकार के इस फैसले से बारिश की कमी और फसल खराबे से परेशान किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है. हालांकि, अब किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि उन्हें फसल नुकसान के बदले आर्थिक सहायता, फसल बीमा और आदान अनुदान का लाभ कब तक मिल पाएगा.

राज्य सरकार ने भारत सरकार की सूखा प्रबंधन संहिता-2016 के आधार पर सूखे से प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया है, इसमें बारिश की स्थिति, जल संसाधनों की उपलब्धता, फसलों की दशा और भारत सरकार के ड्रॉट मॉनिटरिंग पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं को ध्यान में रखा है. सूखाग्रस्त घोषित क्षेत्रों में राजस्थान एफेक्टेड एरियाज (सस्पेंशन ऑफ प्रोसिडिंग्स) एक्ट, 1952 के प्रावधान अधिसूचना जारी होने से छह महीने तक लागू रहेंगे.

जालोर की सभी 10 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

जालोर जिले में इस बार पर्याप्त बारिश नहीं होने का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है, हालात को देखते हुए जिले की आहोर, चितलवाना, जसवंतपुरा, बागोड़ा, भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर, सायला, भाद्राजून और जालोर तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया है. इस तरह जिले की सभी 10 तहसीलें सूखे से प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं. राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक और स्थानीय विधायक जोगेश्वर गर्ग ने एक चुनावी सभा के दौरान इस संबंध में जानकारी दी. जिले की सभी तहसीलों को इस सूची में शामिल किए जाने से प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है.

बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर संकट

जालोर सहित प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की कमी ने खरीफ की फसलों को प्रभावित किया है. खेतों में खड़ी फसलों की कमजोर स्थिति से किसानों को उत्पादन घटने और आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है, कई क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि खेती के लिए बीज, खाद और अन्य संसाधनों पर खर्च करने के बावजूद बारिश की कमी के कारण अपेक्षित उत्पादन मिलने की संभावना कम हो गई है. किसानों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में फसलें 80 से 90 फीसदी तक खराब हो चुकी हैं. हालांकि, नुकसान का वास्तविक आंकड़ा संबंधित क्षेत्रों में आधिकारिक सर्वे और आकलन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

14 जिलों की 80 तहसीलों पर सूखे का असर

सरकारी घोषणा के अनुसार, प्रदेश के 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त श्रेणी में शामिल किया है, इनमें जालोर के अलावा बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर, फलोदी, जैसलमेर, पाली, नागौर, सिरोही, चूरू, बीकानेर, ब्यावर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर सहित अन्य जिले शामिल हैं. सूखे की गंभीरता के आधार पर प्रभावित तहसीलों को गंभीर और मध्यम श्रेणियों में रखा है. इस वर्गीकरण का उद्देश्य सूखे से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर नियमानुसार आवश्यक कदम उठाना है. जालोर जिले की सभी 10 तहसीलों को सूची में शामिल किए जाने से यहां कृषि संकट की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

किसानों को फसल बीमा और अनुदान का इंतजार

सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद किसानों को अब फसल बीमा, आदान अनुदान और अन्य सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद है. किसानों की मांग है कि खेतों में हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें खेती में हुए नुकसान से उबरने में मदद मिल सके. सरकार की घोषणा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत संबंधी कार्रवाई का रास्ता खुला है, लेकिन सहायता की राशि और उसके वितरण की समयसीमा संबंधित नियमों, फसल नुकसान के आकलन और पात्रता पर निर्भर करेगी. किसानों को वास्तविक राहत मिलने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना होगा.

अब नुकसान के आकलन और राहत पर टिकी नजरें

जालोर जिले में बारिश की कमी के कारण खेती पर पड़े असर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. सभी 10 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने से राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन किसानों के सामने आर्थिक नुकसान की भरपाई की चुनौती बनी हुई है. अब जरूरी है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसल खराबे का आकलन कर पात्र किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए. किसानों की नजर इस बात पर है कि सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद उन्हें फसल बीमा, अनुदान और अन्य सहायता का लाभ कब तक मिल पाता है.

नीचे दिए गए सूची में अकालग्रस्त घोषित किए गए सभी 80 तहसीलों के नाम है

जालोर: आहोर, चितलवाना, जसवंतपुरा, बागोड़ा, भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर, सायला, भाद्राजून और जालोर
बाड़मेर: गडरारोड, चौहटन, बाड़मेर, बायतू, सैड़वा, रामसर, शिव, धनाऊ और बाड़मेर ग्रामीण, बाटाडू
बालोतरा: गुड़ामालानी, कल्याणपुर और पचपदरा, गिडा, धौरीमन्ना, पाटौदी, समदड़ी, सिवाना, सिणधरी
चूरू: राजगढ़, सिद्धमुख
डूंगरपुर: आसपुर, गलियाकोट, झौथरीपाल, सागवाड़ा, सीमलवाड़ा, पालदेवल, ओबरी
जैसलमेर: फतेहगढ़, भणियाणा, सम, रामगढ़, जैसलमेर, पोखरण, फलसुण्ड
जोधपुर: पीपाड़ शहर, औसियां, तिवरी, बालेसर, बावड़ी, शेरगढ़ और शेखाला, कुडी भगतासनी, झंवर, बिलाड़ा, लूणी
फलोदी: घंटियाली, देचू, फलोदी, बाप, बापिणी, आऊ, सेतरावा
पाली: देसूरी, पाली, बाली, मारवाड़ जंक्शन, रानी, रोहट, सोजत, सुमेरपुर
नागौर: खींवसर
सिरोही: शिवगंज
ब्यावर: रायपुर, जैतारण
बीकानेर: हदा
बांसवाड़ा: गढ़ी, सज्जनगढ़, अर्थूना,

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