कभी दुनिया से अलग-थलग था उत्तर कोरिया, आज उसे पटाने में लगे चीन-रूस, ट्रंप की बढ़ा रहे मुसीबत

Last Updated:October 27, 2026, 18:43 IST
China-North Korea-Russia News: चीन और रूस ने सितंबर और अक्टूबर 2026 में उत्तर कोरिया से जुड़ने वाले दो नए पुल खोले हैं. रूस ने तुमेन नदी पर याकोव नोविचेंको पुल का उद्घाटन किया, जबकि चीन और उत्तर कोरिया के बीच यालू नदी पर बना पुल 12 साल बाद इस्तेमाल में आया. रूस को यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया की सैन्य मदद की जरूरत है, वहीं चीन अपने पड़ोसी पर प्रभाव बनाए रखना चाहता है.उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन. (Reuters)
कभी उत्तर कोरिया एकदम अलग-थलग था. पूरी दुनिया उससे कटी हुई थी. संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के कारण कोई भी उसके साथ अपना नाम नहीं जोड़ रहा था, लेकिन अब हालात अलग है. उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को अपने करीब रखने के लिए चीन और रूस के बीच मुकाबला तेज होता दिख रहा है. उत्तर कोरिया से जुड़ने वाले दो नए पुल खोले गए हैं. रूस ने 7 सितंबर 2026 को याकोव नोविचेंको पुल का उद्घाटन किया, जबकि चीन और उत्तर कोरिया के बीच यालू नदी पर बना नया पुल 15 अक्टूबर को खोला गया. ये पुल सिर्फ आवाजाही और कारोबार का रास्ता नहीं हैं, बल्कि ऐसे समय में दोनों देशों के बढ़ते संपर्क का संकेत भी हैं, जब रूस को यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया की मदद मिल रही है. वहीं चीन अपने पड़ोसी पर प्रभाव बनाए रखना चाहता है. इस घटनाक्रम का असर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की किम जोंग उन से दोबारा मुलाकात की कोशिशों पर भी पड़ सकता है. ट्रंप ने अगस्त में कहा था कि उनकी किम से मुलाकात होगी. लेकिन उत्तर कोरिया की ओर से अब तक इस बैठक में खास दिलचस्पी दिखाई देने के संकेत नहीं मिले हैं.
रूस-चीन कैसे किम को अपने पाले में ला रहे?
रूस और चीन दोनों का बॉर्डर उत्तक कोरिया से लगता है. दोनों के लिए उत्तर कोरिया अहम है, लेकिन इसकी वजह अलग-अलग है. रूस को यूक्रेन के खिलाफ लड़ने में उत्तर कोरिया के सैनिकों और वहां बने हथियारों की जरूरत है. उत्तर कोरिया ने रूस को सैनिकों के साथ दूसरी तरह की सैन्य मदद भी दी है. इसके बदले मॉस्को ने प्योंगयांग को कई तरह से सहयोग दिया है. रूस के लिए उत्तर कोरिया की मदद इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि युद्ध के लंबे खिंचने से रूसी जनता पर दबाव बढ़ा है और यूक्रेन के हमले अब रूस के काफी अंदर तक हो रहे हैं.
चीन की चिंता दूसरी है. दोनों देशों के बीच 1200 किमी से ज्यादा लंबी सीमा है. उत्तर कोरिया में अगर कुछ भी होता है तो चीन के पूर्वोत्तर इलाके की सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है. चीन यह भी नहीं चाहेगा कि रूस के साथ उत्तर कोरिया के रिश्ते मजबूत होने से प्योंगयांग पर उसका अपना प्रभाव कमजोर हो जाए. इसी वजह से चीन भी उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. दोनों नए पुलों का खुलना इसी डिप्लोमेसी को दिखाता है.
About the AuthorYogendra Mishra
Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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October 27, 2026, 18:43 IST



