17 साल बाद फिर जागी उम्मीद, 101 एमसीएफटी पानी से बुझेगी पाली के भीतरी शहर की प्यास

Last Updated:October 28, 2026, 07:03 IST
Ground Report Of Hemawas Dam Pali Water Supply: पाली के 115 साल पुराने ऐतिहासिक हेमावास बांध से 17 साल के लंबे अंतराल के बाद भीतरी इलाकों में जलापूर्ति की तैयारी अंतिम चरण में है. बांध में उपलब्ध 101 एमसीएफटी पानी को सांचौर से मंगाए गए 80 एचपी के शक्तिशाली पंप और जवाई पाइपलाइन के जरिए सिटी हेडवर्क्स तक पहुंचाया जाएगा. इस विशेष तकनीकी कवायद से पाली शहर की जनता को आगामी 20 से 25 दिनों तक भीषण जल संकट से बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है.
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पाली: पाली शहर में गहराते जल संकट के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. करीब 17 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर ऐतिहासिक हेमावास बांध का पानी पाली शहर के भीतरी इलाकों के लोगों की प्यास बुझाने जा रहा है. गौरतलब है कि जोधपुर रियासत काल में सन 1906 से 1911 के दौरान बना यह ऐतिहासिक बांध सदी से अधिक समय से पाली की कृषि और जलापूर्ति का मजबूत आधार रहा है. वर्तमान में बांध में 101 एमसीएफटी से अधिक जलराशि उपलब्ध है, जिसे शहरवासियों तक पहुंचाने के लिए जलदाय विभाग ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. विभाग की योजना के अनुसार, पानी को नहर में बहाने के बजाय बांध के पास दीवार बनाकर सीधे जवाई पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा.
पाली शहर के ठीक दक्षिण में बांडी नदी पर बना हेमावास बांध जिले के सबसे पुराने और प्रमुख जल ढांचों में से एक है. इस ऐतिहासिक बांध का निर्माण ब्रिटिश काल में वर्ष 1911 में पूरा हुआ था. तत्कालीन मारवाड़ रियासत में अकाल और जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस बांध की नींव रखी गई थी. करीब 12 मीटर की ऊंचाई और 62.6 मिलियन क्यूबिक मीटर की क्षमता वाला यह जलाशय पाली जिले का तीसरा सबसे बड़ा बांध है. वर्षों से यह बांध न केवल पेयजल बल्कि पाली व आसपास के ग्रामीण अंचलों की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई और भू-जल स्तर को बनाए रखने का प्रमुख स्रोत रहा है.
तकनीकी योजना: सांचौर से मंगाया गया 80 एचपी का शक्तिशाली पंपवर्तमान में हेमावास बांध में 101 एमसीएफटी से अधिक जलराशि उपलब्ध है. जलदाय विभाग ने इस पानी को शहर तक पहुंचाने के लिए एक अनूठी तकनीकी योजना तैयार की है. बांध के आगे नहर वाले हिस्से में चामुंडा माता मंदिर क्षेत्र के पास एक मजबूत दीवार का निर्माण कराया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य मोरी से छोड़े जाने वाले पानी को आगे नहर में व्यर्थ बहने से रोकना है. नहर में बनाई जा रही दीवार के पास सांचौर से विशेष रूप से मंगवाया गया 80 हॉर्स पावर का उच्च क्षमता वाला पंप स्थापित किया जा रहा है. यह पंप एक घंटे में करीब 10 लाख लीटर पानी लिफ्ट करने में सक्षम है. इसके जरिए पानी को सीधे जवाई पाइपलाइन में लिफ्ट किया जाएगा, जिससे यह बिना किसी बर्बादी के सीधे भैरूघाट स्थित सिटी हेडवर्क्स पहुंचेगा.
17 साल बाद भीतरी शहर की ओर मुड़ा जल, अधिकारियों के बयानयह पहला मौका नहीं है जब हेमावास के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में हो रहा हो, लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मंडली हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों में ही किया जाता रहा है. पूर्व में गांधीनगर, टैगोर नगर और सोजत जैसे इलाकों की जलापूर्ति में हेमावास बांध का योगदान रहा है. अब 17 साल बाद इसके जल का रुख सिटी हेडवर्क्स से जुड़े भीतरी शहर की ओर मोड़ा जा रहा है. पाली के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशासी अभियंता कान सिंह राणावत ने कहा है कि पाली शहर के सिटी हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों में हेमावास बांध से पेयजल आपूर्ति जल्द शुरू की जाएगी. इसके लिए पंपिंग और पाइपलाइन लिंकिंग की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
October 28, 2026, 07:03 IST



