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Mahendra Gurjar Asian Para Games | महेंद्र गुर्जर ने जीता सिल्वर मेडल

Last Updated:October 28, 2026, 08:13 IST

Mahendra Gurjar Wins Silver In Asian Para Games: जयपुर के सखून गांव के पैरा-एथलीट महेंद्र गुर्जर ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक की F42 श्रेणी में 59.03 मीटर थ्रो के साथ रजत पदक जीता है. बचपन में पोलियो से प्रभावित महेंद्र स्विट्जरलैंड ग्रैंड प्रिक्स में 61.17 मीटर का थ्रो कर विश्व रिकॉर्ड भी बना चुके हैं. एक साधारण किसान परिवार से आने वाले महेंद्र ने कॉलेज से खेल की शुरुआत कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं. अब उनका लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक में देश के लिए पदक जीतना है.
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जयपुर के एक छोटे से गांव के रहने वाले महेंद्र गुर्जर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए शहर का नाम रोशन किया है. जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में महेंद्र ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के संयुक्त वर्ग F42 में रजत पदक जीता. उन्होंने 59.03 मीटर दूर भाला फेंककर गेम्स रिकॉर्ड के साथ यह उपलब्धि हासिल की. उनकी इस सफलता से जयपुर सहित पूरे राजस्थान में खुशी का माहौल है.

महेंद्र गुर्जर पैरा एथलेटिक्स के रिकॉर्डधारी भाला फेंक खिलाड़ी हैं. उन्होंने पिछले साल स्विट्जरलैंड के नॉटविल में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में पुरुषों की F42 भाला फेंक स्पर्धा में 61.17 मीटर का थ्रो करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था. इस दौरान महेंद्र ने लगातार दो थ्रो में अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए ब्राजील के पैरा एथलीट रॉबर्टो फ्लोरियानी एडेनिलसन के 59.19 मीटर के पुराने विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया था. इस शानदार प्रदर्शन के बाद महेंद्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और दुनियाभर में सुर्खियां बटोरीं.

एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीतने वाले महेंद्र गुर्जर की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. बचपन में पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया था, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. खेल को अपनी ताकत बनाकर उन्होंने गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया. विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद अब एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतकर उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है. महेंद्र की यह कामयाबी प्रदेश के युवा खिलाड़ियों और पैरा एथलीटों के लिए प्रेरणा है और साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और लगन से मुश्किल चुनौतियों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.

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महेंद्र गुर्जर का जन्म 12 अप्रैल 1998 को राजस्थान के दूदू क्षेत्र के सखून गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता खेती-किसानी से जुड़े हैं. महेंद्र की शुरुआती पढ़ाई गांव और आसपास के सरकारी व स्थानीय विद्यालयों में हुई. उन्होंने 12वीं कक्षा तक की शिक्षा अच्छे अंकों के साथ पूरी की. स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में दाखिला लिया. साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले महेंद्र ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर खेल जगत में पहचान बनाई.

महेंद्र गुर्जर ने कॉलेज के दिनों में पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी काफी रुचि दिखाई. इसी दौरान उन्होंने भाला फेंक यानी जेवलिन थ्रो की शुरुआत की. उनकी खेल प्रतिभा को पहचानते हुए बड़े भाई अजयपाल ने उन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिलाने के लिए कोच समरजीत सिंह मल्ली के पास भेजा. इसके बाद महेंद्र ने सही तकनीक सीखने और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की. गांव के माहौल और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने खेल पर अपना ध्यान बनाए रखा और जिला व राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार सफलता हासिल की. यही शुरुआती उपलब्धियां उनके अंतरराष्ट्रीय खेल करियर की मजबूत नींव बनीं.

महेंद्र गुर्जर ने कॉलेज के दिनों में भाला फेंक की शुरुआत करने के बाद कड़ी मेहनत और लगन से अपने खेल को निखारा. जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं से आगे बढ़ते हुए उन्होंने प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली और वर्ष 2023 में राजस्थान राज्य पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता के साथ नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. F42 श्रेणी में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक जीते. राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर देश का नाम रोशन करने की दिशा में कदम बढ़ाए.

एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीतकर राजस्थान का नाम रोशन करने वाले महेंद्र गुर्जर अपनी इस सफलता का श्रेय अपने बड़े भाई और कोच को देते हैं. व्यस्त खेल कार्यक्रम से समय मिलने पर वह अपने माता-पिता के साथ वक्त बिताना पसंद करते हैं. महेंद्र अपने शांत स्वभाव और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व के लिए भी जाने जाते हैं, जिसके चलते सोशल मीडिया पर उन्हें काफी पसंद किया जाता है. अब उनका अगला लक्ष्य वर्ष 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरा ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना है. इसके लिए वह विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर पैरा ओलंपिक का कोटा हासिल करने की तैयारी में जुटे हैं.

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October 28, 2026, 08:13 IST

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