400 करोड़ से बदल रही जयपुर की तस्वीर, 2 KM एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार, जानें कब दौड़ेगी मेट्रो

जयपुर. राजधानी जयपुर में तेजी से बढ़ती आबादी, नए आवासीय क्षेत्रों और सड़कों पर वाहनों के बढ़ते दबाव के बीच शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा काम हो रहा है. शहर के पश्चिमी हिस्से को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने के लिए करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से जयपुर मेट्रो फेज-1D परियोजना विकसित की जा रही है. इस प्रोजेक्ट के तहत मानसरोवर से 200 फीट बाईपास तक करीब दो किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के सभी पिलर और आई-गर्डर लगाने का काम पूरा हो गया है. इसे परियोजना के सिविल निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
हालांकि, मेट्रो संचालन के लिए अभी ट्रैक बिछाने और तकनीकी व्यवस्थाओं सहित अन्य कार्य पूरे किए जाने हैं. परियोजना को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके शुरू होने के बाद मानसरोवर, अजमेर रोड और 200 फीट बाईपास के आसपास विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक क्षेत्रों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है. यह विस्तार केवल मेट्रो सेवा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जयपुर के भविष्य के शहरी विकास और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है.
मानसरोवर से 200 फीट बाईपास तक करीब दो किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के सभी पिलर और आई-गर्डर लगाने का काम पूरा हो गया है
400 करोड़ रुपये से तैयार हो रहा नया मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर
जयपुर मेट्रो फेज-1D परियोजना की अनुमानित लागत करीब 400 करोड़ रुपये है. इसके तहत मानसरोवर से 200 फीट बाईपास तक एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है. परियोजना में पिलर और आई-गर्डर लगाने का काम पूरा होने से एलिवेटेड स्ट्रक्चर का प्रमुख चरण पूरा हो गया है. अब ट्रैक बिछाने, विद्युत आपूर्ति, सिग्नलिंग और अन्य तकनीकी सुविधाओं से जुड़े कार्य पूरे किए जाएंगे. इसके बाद परीक्षण और आवश्यक सुरक्षा मंजूरी मिलने पर मेट्रो का संचालन शुरू हो सकेगा.
अजमेर बाईपास चौराहे पर बनेगा अंतिम स्टेशन
फेज-1D का अंतिम स्टेशन अजमेर बाईपास चौराहे पर बनाया जाएगा. इससे मानसरोवर के आगे 200 फीट बाईपास और अजमेर रोड के आसपास विकसित हो रहे क्षेत्रों को मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी. इन इलाकों में आवासीय कॉलोनियों, व्यावसायिक गतिविधियों और सड़क यातायात के विस्तार के बीच सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मेट्रो स्टेशन बनने से आसपास के क्षेत्रों की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है.
18 किलोमीटर तक फैलेगा मेट्रो नेटवर्क
जयपुर मेट्रो परियोजना को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
रोजाना 1.10 लाख यात्रियों के सफर की उम्मीद
मेट्रो विस्तार के बाद रोजाना करीब 1.10 लाख यात्रियों के सफर करने की उम्मीद जताई गई है. हालांकि, वास्तविक यात्री संख्या संचालन शुरू होने के बाद स्पष्ट होगी. यात्रियों की संख्या बढ़ने से प्रमुख सड़कों पर निजी वाहनों की निर्भरता कम होने और यातायात दबाव घटने की संभावना है. इससे शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है.
जून 2027 तक प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य
फेज-1D को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. करीब 400 करोड़ रुपये का यह निवेश जयपुर में परिवहन सुविधाओं के विस्तार के साथ शहर के दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से भी जुड़ा है. परियोजना पूरी होने पर मानसरोवर से 200 फीट बाईपास तक मेट्रो की पहुंच बढ़ेगी. इससे शहर के नए विकसित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और जयपुर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी.



