दीपावली मेले में राजस्थानी गीतों का छाया जादू, रेपरिया बालम और फकीरा खान की आवाज पर जमकर झूमे मेलार्थी

Last Updated:October 30, 2026, 15:28 IST
फकीरा खान ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य राजस्थानी लोकसंगीत और संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाना है. परिवार के बच्चों को पढ़ाई के साथ पारंपरिक गीत और संगीत भी सिखाया जाता है, ताकि यह विरासत आगे भी जीवित रहे. उनके अनुसार, ग्रुप से 100 से अधिक सदस्य इस कला को आगे बढ़ाने में जुटे हैं.
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उदयपुर: उदयपुर में नगर निगम की ओर से आयोजित दीपावली मेला 2026 की रौनक लगातार बढ़ती जा रही है.मेले की दूसरी शाम संगीत प्रेमियों के नाम रही.टाउन हॉल में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में रेपरिया बालम बैंड और बाड़मेर के प्रसिद्ध मांगणियार कलाकार फकीरा खान ग्रुप ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि दर्शक देर तक अपनी जगह पर खड़े होकर झूमते नजर आए.राजस्थानी लोकगीतों से लेकर बॉलीवुड के लोकप्रिय गानों तक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं.
मेला संयोजक प्रमोद सामर ने बताया कि सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध राजस्थानी गायक और शूरवीर फेम रेपरिया बालम ने अपनी गायकी से दर्शकों का दिल जीत लिया. उनका वास्तविक नाम अशोक मंडा है और वे श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र से जुड़े हैं। उन्होंने मंच पर आते ही अपने चर्चित गीत ‘मारो राजस्थान’ से शुरुआत की. इसके बाद ‘लाल पीली अखियां’, ‘बन्ना जी रॉबिन हुड’ और ‘इलायची’ जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। राजस्थानी लोकधुनों के साथ आधुनिक फ्यूजन संगीत का मेल दर्शकों को खूब पसंद आया.
वीरता और गौरवशाली परंपराओं को भी पेश कियारेपरिया बालम ने अपने गीतों के माध्यम से राजस्थान की संस्कृति, वीरता और गौरवशाली परंपराओं को भी पेश किया. महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा पर आधारित उनके गीत ने दर्शकों में खास उत्साह भर दिया. ‘शूरवीर’ सीरीज से जुड़े इस गीत को लेकर भी उनकी अलग पहचान है.पारंपरिक लोकसंगीत को नए अंदाज में पेश करने के उनके प्रयासों ने युवा दर्शकों को भी खूब आकर्षित किया.
ग्रुप ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को और रंगीन बना दियाइसके बाद बाड़मेर से आए फकीरा खान मांगणियार ग्रुप ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को और रंगीन बना दिया. करीब 30 कलाकारों के इस ग्रुप ने मां करणी के भजन से कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके बाद ‘वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे’ और ‘केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश’ जैसे पारंपरिक गीतों ने दर्शकों को राजस्थान की लोकसंस्कृति से रूबरू कराया वहीं ‘आवो आवो मेरे कृष्ण कन्हैया आवो’, ‘ठरकी छोकरा’ और ‘बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है’ जैसे गीतों ने कार्यक्रम में अलग रंग भर दिया.
100 से अधिक सदस्य इस कला को आगे बढ़ाने में जुटे फकीरा खान ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य राजस्थानी लोकसंगीत और संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाना है. परिवार के बच्चों को पढ़ाई के साथ पारंपरिक गीत और संगीत भी सिखाया जाता है, ताकि यह विरासत आगे भी जीवित रहे. उनके अनुसार, ग्रुप से 100 से अधिक सदस्य इस कला को आगे बढ़ाने में जुटे हैं. मांगणियार समुदाय की पहचान पीढ़ियों से चली आ रही लोकगायकी, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सूफी संगीत से जुड़ी है.
आज पलक मुच्छल की सिंगर नाइटदीपावली मेले में शुक्रवार की शाम बॉलीवुड संगीत के नाम रहने वाली है. निगम उपायुक्त एवं मेला अधिकारी हरि सिंह देवल ने बताया कि प्रसिद्ध बॉलीवुड सिंगर पलक मुच्छल अपनी प्रस्तुतियों से शहरवासियों का मनोरंजन करेंग.पलक मुच्छल ने ‘आशिकी 2’ के ‘चाहूं मैं या ना’ और फिल्म ‘एमएस धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी’ के ‘कौन तुझे यूं प्यार करेगा’ जैसे लोकप्रिय गानों से खास पहचान बनाई है। ऐसे में आज टाउन हॉल में होने वाली सिंगर नाइट को लेकर शहरवासियों में उत्साह है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
October 30, 2026, 15:28 IST



