विदेशी कुरजां ने अपनाया माइग्रेशन रूट, राजस्थान पहुंचने के लिए बदला रास्ता, पहले से 1200 किलोमीटर तक कम हुआ सफर

Last Updated:October 30, 2026, 14:23 IST
Kurjan Birds in Marwar: रूस और मंगोलिया से मारवाड़ आने वाली विदेशी कुरजां पक्षियों ने अपना उड़ान मार्ग बदल दिया है, जिससे उनका सफर 1200 किलोमीटर तक कम हो गया है. जोधपुर के मंडोर क्षेत्र में पक्षियों के लिए समाजसेवियों द्वारा दाने-पानी की विशेष व्यवस्था की जा रही है.
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जोधपुर: रूस और मंगोलिया से हर साल सर्दियों में मारवाड़ आने वाले विदेशी प्रवासी पक्षी कुरजां ने इस बार अपनी उड़ान का रास्ता बदल दिया है. अब ये पक्षी नेपाल की जगह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और गुजरात होते हुए राजस्थान पहुंच रहे हैं. खास बात यह है कि नए रास्ते से इनका सफर करीब 1200 किलोमीटर तक कम हो गया है. पारंपरिक मार्ग पर चक्रवात, तेज हवाओं और हिमालयी क्षेत्र में बदलते वायु प्रवाह के जोखिम से बचने के लिए पक्षियों ने यह बदलाव किया है.
वन थाउजेंड क्रेन प्रोजेक्ट के तहत कुरजां के गले और पैरों में लगाए गए टैग व रिंग से इस बदलाव का पता चला है. हर साल अक्टूबर से फरवरी तक लाखों कुरजां मारवाड़ के खींचन, बीकानेर के लूणकरणसर और आसपास के जलाशयों में डेरा डालते हैं. इन विदेशी मेहमानों की मौजूदगी से क्षेत्र में पक्षी पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है.
50 किलो चुग्गे से शुरू हुई सेवा, पांच दिन में बढ़कर 500 किलो पहुंची मात्राजोधपुर के मंडोर क्षेत्र में नौ मील से आगे टूटकी बाड़ी में पहुंचीं 400 से अधिक कुरजां के लिए समाजसेवियों ने अनूठी पहल शुरू की है.पांच दिन पहले समाजसेवी पुष्पा गहलोत ने महज 50 किलो चुग्गे से पक्षियों को दाना डालने की शुरुआत की थी. लेकिन कुरजां की संख्या अधिक होने से यह मात्रा पर्याप्त नहीं थी. इसके बाद चुग्गे की मात्रा बढ़ाई गई और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से सहयोग की अपील की गई. अब प्रतिदिन 500 किलो से अधिक चुग्गा पक्षियों को खिलाया जा रहा है.
रोज सुबह 6 बजे पहुंचते हैं 15 से अधिक समाजसेवीइस अभियान में अब महिलाएं, पुरुष और युवा मिलकर जिम्मेदारी निभा रहे हैं. प्रतिदिन सुबह 6 बजे करीब 12 से 15 समाजसेवी टूटकी बाड़ी पहुंचते हैं और कुरजां के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं. पुष्पा गहलोत के अनुसार शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ सेवा शुरू की गई थी, लेकिन लोगों का सहयोग लगातार बढ़ता गया. उन्होंने कहा कि ये पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय कर हमारे यहां आते हैं. ये मारवाड़ के मेहमान हैं और इनकी सेवा करना हमारा धर्म है.
कुरजां के सामने दाना-पानी का संकट खड़ा इस बार मानसून में कम बारिश होने के कारण जलाशयों और आसपास के खुले मैदानों में भोजन-पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है. ऐसे में प्रवासी कुरजां के सामने दाना-पानी का संकट खड़ा हो गया है. सामान्य तौर पर ये पक्षी तालाबों, जलस्रोतों और खुले मैदानों में अपना ठिकाना बनाते हैं. अनाज, बीज और कीट इनका प्रमुख भोजन हैं. प्राकृतिक संसाधनों की कमी को देखते हुए स्थानीय लोग आगे आकर इनके लिए चुग्गे और पानी की व्यवस्था कर रहे हैं.
मार्च-अप्रैल तक रहेगा प्रवास, संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरीकुरजां आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में मारवाड़ पहुंचती हैं और मार्च-अप्रैल के दौरान वापस अपने प्रजनन क्षेत्रों की ओर लौट जाती हैं. इस बार अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में इनके समूह पहुंचने शुरू हुए हैं. जोधपुर के अलावा खींचन सहित प्रदेश के कई स्थानों पर इनका पड़ाव रहता है. विशेषज्ञों के अनुसार इनके संरक्षण के लिए केवल भोजन ही नहीं, बल्कि सुरक्षित जलस्रोत, खुले मैदान और बिजली के तारों व चाइनीज मांझे से सुरक्षा भी जरूरी है. टूटकी बाड़ी में समाजसेवियों की यह पहल बताती है कि सामूहिक प्रयासों से हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले इन विदेशी मेहमानों के लिए मारवाड़ में सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सकता है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
October 30, 2026, 14:23 IST



