Kota News I किसानों की मेहनत पर मौसम की मार का खतरा, कोटा मंडी में खुले में पड़ी लाखों बोरियां

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मंडी में लाखों बोरियां लेकिन छत नसीब नहीं, तिरपाल के भरोसे किसानों की मेहनत
Last Updated:October 31, 2026, 11:43 IST
Kota News: कोटा की भामाशाह कृषि उपज मंडी में रोजाना डेढ़ से दो लाख बोरी जिंसों की आवक हो रही है. टीन शेड की कमी के चलते किसानों की उपज खुले आसमान के नीचे पड़ी है. बारिश की आशंका से चिंतित किसान तिरपाल के सहारे अपनी मेहनत की कमाई बचाने में जुटे हैं, जबकि मंडी प्रशासन पर्याप्त इंतजाम होने का दावा कर रहा है.कोटा कृषि उपज मंडी
कोटा. एशिया की सबसे बड़ी भामाशाह कृषि उपज मंडी में इन दिनों जिंसों की बंपर आवक हो रही है, रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख बोरी जिंस मंडी में पहुंच रही हैं. बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन बंपर आवक के बीच किसानों के सामने अपनी फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. मंडी परिसर में पर्याप्त टीन शेड नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में किसानों की उपज खुले आसमान के नीचे रखी हुई है. ऐसे में मौसम में बदलाव और बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.
अपनी मेहनत की कमाई को बारिश से बचाने के लिए किसान उपज को तिरपाल से ढकने को मजबूर हैं. मंडी में कई जगह जिंसों की बोरियां खुले मैदान में रखी दिखाई दे रही हैं. किसानों को डर है कि अगर अचानक बारिश हो गई तो उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है. फसल के भीगने से उसकी गुणवत्ता खराब होने के साथ ही बाजार में मिलने वाले भाव पर भी असर पड़ सकता है.
टीन शेड की कमी से खुले में रखनी पड़ रही उपज
किसानों का कहना है कि मंडी में फसल रखने के लिए पर्याप्त टीन शेड की व्यवस्था नहीं है, इसके चलते उन्हें मजबूरी में खुले मैदान में अपनी उपज रखनी पड़ रही है. मौसम खराब होने पर फसल को सुरक्षित रखना बड़ी परेशानी बन जाता है, किसानों को खुद तिरपाल की व्यवस्था करनी पड़ रही है, ताकि बारिश होने पर जिंसों को भीगने से बचाया जा सके. किसानों ने मंडी प्रशासन पर व्यवस्थाओं में कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर बारिश से उनकी उपज खराब हो जाती है तो नुकसान की भरपाई करना मुश्किल होता है. उनका कहना है कि फसल खराब होने की स्थिति में उचित मुआवजा भी नहीं मिल पाता, ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
मंडी प्रशासन ने किया पर्याप्त इंतजाम का दावा
दूसरी ओर, मंडी प्रशासन का कहना है कि किसानों की सुविधा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. मंडी सचिव मनोज मीणा के अनुसार, मंडी समिति की ओर से किसानों को तिरपाल उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. कई किसान अपनी उपज की सुरक्षा के लिए स्वयं भी तिरपाल लेकर आते हैं. उन्होंने बताया कि त्योहार के दौरान मंडी में जिंसों की आवक बढ़ने से कुछ दिनों तक व्यवस्थाओं पर दबाव रहा था, लेकिन अब मंडी में जगह खाली होने लगी है. इससे किसानों को अपनी उपज रखने और बेचने में सुविधा मिल रही है. मंडी सचिव के मुताबिक, वर्तमान में किसानों को उनकी उपज के अच्छे भाव भी मिल रहे हैं. फिलहाल मंडी में रोजाना लाखों बोरियों की आवक के बीच खुले में रखी फसल को बारिश से बचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है. एक तरफ किसान अपनी उपज की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ मंडी प्रशासन व्यवस्थाएं पर्याप्त होने का दावा कर रहा है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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October 31, 2026, 11:43 IST



