दीपावली पर स्कूल चमकाने के लिए खुद चंदा जुटाएंगे सरकारी टीचर, बजट दिए बिना शिक्षा विभाग ने जारी किया फरमान

जयपुर. राजस्थान में दीपावली से पहले सरकारी स्कूलों की सफाई, मरम्मत, रंगाई-पुताई और आकर्षक लाइटिंग कराने की जिम्मेदारी अब शिक्षकों को सौंपी गई है. खास बात यह है कि शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्कूलों को अलग से कोई बजट नहीं दिया है. आदेश के मुताबिक, शिक्षक जनसहभागिता के जरिए चंदा जुटाकर इन कामों को पूरा कराएंगे. विभाग के इस फरमान पर शिक्षक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है.
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर शिक्षा विभाग के निदेशालय ने यह आदेश जारी किया है. इसमें दीपावली से पहले सभी सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई, मरम्मत और रंगाई-पुताई कराने के साथ बिजली की आकर्षक सजावट करने को कहा गया है. सफाई के लिए छात्रों और स्थानीय लोगों से श्रमदान कराने की बात कही गई है, जबकि बाकी कामों के लिए जनसहभागिता से आर्थिक मदद जुटाने के निर्देश हैं.
शिक्षकों का सवाल- पढ़ाएं या चंदा जुटाएं?
शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना है, न कि लोगों से चंदा मांगना. सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है. कई शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों में भी लगाया जाता है. ऐसे में उनसे चंदा जुटाने और स्कूलों की सजावट कराने की जिम्मेदारी देना पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है.
राजस्थान शिक्षक संघ के अध्यक्ष सियाराम शर्मा ने इस आदेश को तुगलकी फरमान बताया है. उनका कहना है कि चंदा जुटाना और लोगों से पैसे मांगना शिक्षकों की गरिमा और मर्यादा के खिलाफ है.
63 हजार से ज्यादा स्कूल, लाखों बच्चों की पढ़ाई का सवाल
राजस्थान में पहली से 12वीं तक के 63 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं. इनमें करीब 70 लाख बच्चे पढ़ते हैं और लगभग चार लाख शिक्षक कार्यरत हैं. वहीं, शिक्षकों के करीब डेढ़ लाख पद खाली बताए गए हैं. ऐसे में शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
स्कूलों की बदहाली और बजट पर भी सवाल
सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा भी इस विवाद के केंद्र में है. पिछले साल झालावाड़ में स्कूल की इमारत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी. सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्कूलों की हालत सुधारने के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई थी, जबकि बजट में इसके लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये मंजूर किए जाने का दावा किया गया है. बाकी जरूरत भामाशाहों से मदद लेकर पूरी करने की बात कही गई है.
कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस फैसले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उनका सवाल है कि सरकार शिक्षकों से सफाई तो करवा रही है, लेकिन जर्जर इमारतों और छत गिरने से बच्चों की जान जाने की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है.
दीपावली पर स्कूलों की चमक
फिलहाल आदेश के बाद कई स्कूलों में सफाई और रंगाई-पुताई का काम शुरू होने की बात सामने आई है. कुछ शिक्षक विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ अपने स्तर पर आर्थिक मदद जुटाने में लगे हैं. अब सवाल यह है कि स्कूलों को सजाने और उनकी मरम्मत कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डालना कितना उचित है, जबकि इसके लिए विभाग ने अलग से बजट उपलब्ध नहीं कराया है.



