Jhunjhunu News: न मंदिर न महल, 190 साल पुरानी दुकान की छत पर सोने से उकेरी पूरी रामायण-महाभारत की कहानी

Last Updated:October 31, 2026, 16:45 IST
Mahansar Sone Ki Sal: झुंझुनूं के महनसर में करीब 190 साल पुरानी ‘सोने की साळ’ आज भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. इस ऐतिहासिक दुकान की दीवारों और छत पर सोने की स्याही से रामायण, कृष्णलीला और महाभारत के प्रसंग उकेरे गए हैं. यूनान से बुलाए गए कारीगरों ने चार साल में इस अनूठी कलाकृति को तैयार किया था, आज भी इसकी चमक और बारीक चित्रकारी लोगों को हैरान कर देती है.
झुंझुनूं. महनसर की एक दुकान ऐसी भी है, जहां सामान खरीदने के बजाय लोग दीवारों और छत को देखने पहुंचते हैं. इसकी वजह भी खास है, दुकान की छत और दीवारों पर रामायण, कृष्णलीला और महाभारत के प्रसंग सोने की स्याही से उकेरे गए हैं. करीब 190 साल पुरानी इस कलाकृति की चमक आज भी वैसी ही नजर आती है. यही वजह है कि महनसर आने वाले पर्यटक इस दुकान को देखना नहीं भूलते. हम बात कर रहे हैं बिसाऊ तहसील के महनसर कस्बे की प्रसिद्ध सोने की साळ की. विक्रम संवत 1905 में सेठ हरकंठराय पोदार ने इसे व्यापारिक उद्देश्य से बनवाया था. उस समय सेठ हरकंठराय सोने-चांदी के कारोबार के लिए जापान और चीन तक जाते थे, दूर-दूर से व्यापारी भी उनके पास आते थे.
सेठ धार्मिक प्रवृत्ति के थे। व्यापार के साथ भगवान राम और कृष्ण के प्रति अपनी आस्था को भी उन्होंने इस दुकान में जगह दी. इसके लिए उन्होंने यूनान से सोने की स्याही से चित्रकारी करने वाले कारीगर बुलवाए थे. दुकान में चित्रकारी का काम करीब चार साल तक चला. कारीगरों को रामायण और कृष्णलीला के प्रसंग और संवाद समझाए जाते थे. इसके बाद उन्होंने एक-एक दृश्य को सोने की स्याही से दीवारों और छत पर उतारा. बताया जाता है कि सेठ के लिए सोने से ज्यादा कीमत उन कारीगरों की कला की थी, जिन्होंने इतनी बारीकी से चित्रकारी की.
छत पर कृष्ण जन्म से लेकर महाभारत युद्ध तक के दृश्य
दुकान की अंदरूनी छत गोलाकार है, इस पर कृष्ण जन्म से लेकर कंस वध और महाभारत युद्ध तक की पूरी कहानी चित्रों में दिखाई गई है. कंस द्वारा देवकी को विवाह के बाद रथ में बैठाने, कारागार में कृष्ण जन्म और वासुदेव के उन्हें यमुना पार गोकुल पहुंचाने के दृश्य भी यहां उकेरे गए हैं. इसके साथ ही कृष्ण की बाल लीलाओं को भी सोने की स्याही से सजाया गया है. करीब 100 फीट लंबी और 20 फीट चौड़ी इस दुकान को तीन हिस्सों में बनाया गया है. पहले हिस्से में भगवान राम के जन्म से लेकर लंका दहन तक रामायण के प्रसंग हैं. दूसरे हिस्से में भगवान गणेश सहित देवी-देवताओं के 52 अवतारों का चित्रण किया है. तीसरे हिस्से में पूरी कृष्णलीला, कंस वध और महाभारत युद्ध के दृश्य हैं. श्रवण कुमार द्वारा अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा करवाने का दृश्य भी यहां देखने को मिलता है.
छठी पीढ़ी संभाल रही विरासत
सेठ हरकंठराय पोदार की छठी पीढ़ी के कुलदीप पोदार बताते हैं कि वर्तमान में इस ऐतिहासिक दुकान की देखरेख शिवबक्स राय पोदार ट्रस्ट कर रहा है. इसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। ट्रस्ट की ओर से प्रवेश के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है. महनसर की यह दुकान शेखावाटी की उन विरासतों में शामिल है, जहां कला और आस्था का अनूठा मेल देखने को मिलता है. खास बात यह है कि करीब दो सदी पहले बनाई गई सोने की यह चित्रकारी आज भी लोगों को उस दौर के कारीगरों की याद दिलाती है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
October 31, 2026, 16:45 IST



