10 साल का सूखा खत्म…दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को रौंदकर छीना नंबर-1 का ताज

नई दिल्ली. क्रिकेट के गलियारों में कुछ मैच हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाते हैं. केपटाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर खेला गया यह मुकाबला भी कुछ ऐसा ही था. दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे और निर्णायक टेस्ट मैच में यादगार प्रदर्शन करते हुए 176 रनों से शानदार जीत दर्ज की. इसी के साथ प्रोटियाज टीम ने 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली और एक दशक से भी अधिक लंबे इंतजार के बाद आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में फिर से नंबर-1 का ताज हासिल कर लिया.
यह जीत दक्षिण अफ्रीका के लिए बेहद खास और सुकून देने वाली थी. टीम ने आखिरी बार जनवरी 2016 में टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया था. पूरे दस साल के लंबे अंतराल के बाद, उन्होंने एक बार फिर से दुनिया की नंबर-1 टेस्ट टीम बनकर शिखर पर वापसी की है. दूसरी ओर, केपटाउन का यह मैदान एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए दर्दनाक यादों का गवाह बन गया, हालांकि इस बार हार का कारण मैदान पर दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों का शानदार खेल था, न कि साल 2018 के दौरे की वह विवादित घटना, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था.
सैंडपेपर गेट की यादें और रोमांचक सीरीज का सफरसाल 2018 के मार्च महीने में न्यूलैंड्स में हुए उस बदनाम ‘सैंडपेपर गेट’ विवाद की यादें एक बार फिर ताजा हो गई थीं, जब ऑस्ट्रेलिया की टीम उसी मैदान पर उतरी थी. हालांकि, आठ साल बाद इसी ऐतिहासिक मैदान पर उनके क्रिकेट इतिहास का एक और कठिन अध्याय लिखा गया, क्योंकि जब मुकाबला करो या मरो का था, तो दक्षिण अफ्रीका ने हर विभाग में उन्हें पूरी तरह पछाड़ दिया.
इस रोमांचक सीरीज का रोमांच पहले ही मैच से चरम पर था. पहला टेस्ट मुकाबला जीतने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने बढ़त बनाई थी, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने दूसरे टेस्ट में जोरदार वापसी करते हुए सीरीज को बराबरी पर ला दिया था. इसके बाद केपटाउन के निर्णायक मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली. पहली पारी में पिछड़ने के बाद भी मेजबान टीम ने अद्भुत जज्बा दिखाया और शानदार बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 288 रनों का एक बेहद चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा.
कगिसो रबाडा का घातक स्पेल और शुरुआती झटकेदक्षिण अफ्रीका की इस ऐतिहासिक जीत की मजबूत नींव तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा ने रखी. रबाडा ने अपनी घातक गेंदबाजी से कंगारुओं के टॉप ऑर्डर की धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने 14 ओवरों में सिर्फ 39 रन देकर 3 बहुमूल्य विकेट चटकाए. उनके इस तूफानी स्पेल ने मेहमान टीम को लक्ष्य का पीछा करते हुए शुरुआती झटकों से हिलाकर रख दिया.
रबाडा ने पारी के पहले ही ओवर में मैट रेनशॉ को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया. इसके ठीक तीन गेंदों बाद उन्होंने मार्नस लाबुशेन को भी एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया. देखते ही देखते ऑस्ट्रेलिया का स्कोर महज 5 रन पर 2 विकेट हो गया और पूरी टीम पर भारी दबाव आ गया. दक्षिण अफ्रीकी स्पीडस्टर यहीं नहीं रुके; उन्होंने खतरनाक ट्रैविस हेड को भी 14 के निजी स्कोर पर चलता किया, जिससे ऑस्ट्रेलिया की आधी उम्मीदें शुरुआती कुछ ओवरों में ही टूट गईं और टीम 22 रन पर 3 विकेट गंवाकर गहरे संकट में आ गई.
रबाडा का यह स्पेल अनुशासन, गति, स्विंग और सटीकता का एक बेहतरीन नमूना था, जिसने नई गेंद के सामने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की कमजोरी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया. ट्रैविस हेड का विकेट बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह अकेले दम पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे. इन विकेटों के साथ ही रबाडा ने टेस्ट क्रिकेट में अपने 350 विकेट भी पूरे कर लिए, जो उनके करियर का एक बड़ा व्यक्तिगत मील का पत्थर साबित हुआ. उन्होंने टीम को वह शुरुआत दी जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, लेकिन अभी कहानी का एक बड़ा हिस्सा बाकी था.
साइमन हार्मर की फिरकी का जादूअगर रबाडा ने ऑस्ट्रेलियाई पारी की रीढ़ तोड़ी, तो स्पिनर साइमन हार्मर ने यह सुनिश्चित कर दिया कि मेहमान टीम के पास मैच से बाहर निकलने का कोई रास्ता न बचे. हार्मर ने अपनी फिरकी का जादू बिखेरते हुए 21.1 ओवरों में सिर्फ 16 रन देकर 6 विकेट झटके और ऑस्ट्रेलियाई मध्यक्रम तथा निचले क्रम को नेस्तनाबूद कर दिया.
हार्मर का यह गेंदबाजी प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी भी दक्षिण अफ्रीकी स्पिनर के सर्वश्रेष्ठ स्पेल में से एक था. वर्ष 1952 में मेलबर्न में ह्यू टेफील्ड द्वारा लिए गए 7 विकेट के बाद यह किसी भी प्रोटियाज स्पिनर का कंगारुओं के खिलाफ सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है. हार्मर ने सबसे पहले एलेक्स कैरी और कूपर कोनोली को जल्दी-जल्दी आउट किया, और फिर खतरनाक दिख रहे मिशेल स्टार्क को भी अपना शिकार बनाया. कैमरन ग्रीन ने कुछ देर टिकने की कोशिश की, लेकिन हार्मर की गजब की सटीकता और टर्न के आगे वह भी 27 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद हार्मर ने कप्तान पैट कमिंस और जोश हेज़लवुड को पवेलियन का रास्ता दिखाकर इस यादगार स्पेल का अंत किया.
निचले क्रम का संघर्ष और ऐतिहासिक जीतचौथे दिन तक लक्ष्य को हासिल करने के सपने देख रही ऑस्ट्रेलियाई टीम पांचवें दिन के खेल में लंच से पहले ही 60 रन पर 7 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी. इस बड़े पतन ने उन्हें हार के मुहाने पर ला खड़ा किया था, और हार्मर की लगातार सटीक गेंदबाजी ने यह सुनिश्चित कर दिया कि दक्षिण अफ्रीका की जीत पक्की हो सके. हालांकि, हार मानने से पहले ऑस्ट्रेलियाई निचले क्रम के बल्लेबाजों ने कुछ समय के लिए संघर्ष जरूर दिखाया. कप्तान पैट कमिंस और नाथन लियोन ने एक दृढ़ संकल्प के साथ मोर्चा संभाला और आसानी से हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया. कमिंस ने विशेष रूप से गजब का संयम दिखाया और अपना खाता खोलने से पहले लगातार 40 गेंदें खेलीं. उन्होंने 90 गेंदों का सामना करते हुए 11 रन बनाए, जबकि नाथन लियोन ने सूझबूझ भरी पारी खेलते हुए 33 रन बनाए और टीम के लिए शीर्ष स्कोरर रहे.
इस छोटी सी साझेदारी ने दक्षिण अफ्रीका की जीत के जश्न को कुछ देर के लिए जरूर टाल दिया, लेकिन अंततः साइमन हार्मर ने पैट कमिंस की रक्षात्मक दीवार को भेदते हुए उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर ही दिया. इसके तुरंत बाद जोश हेज़लवुड का विकेट गिरते ही मैच समाप्त हो गया और न्यूलैंड्स का मैदान दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों और समर्थकों के जश्न में डूब गया. यह जीत न सिर्फ एक सीरीज पर कब्जा थी, बल्कि एक दशक के लंबे वनवास के बाद टेस्ट क्रिकेट के शिखर पर प्रोटियाज की ऐतिहासिक वापसी की एक अमर कहानी बन गई.



