‘देश को अब भी दिमागी नक्सलियों से खतरा’, पीएम मोदी का बड़ा ऐलान- अब घुसपैठ रोकने और नागरिक संहिता पर होगा काम

गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित एकता नगर में शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस का भव्य आयोजन हुआ. देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की. इसके बाद परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने देश की एकता और सुरक्षा पर खुलकर बात की. प्रधानमंत्री ने राजनीतिक विरोधियों पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि देश का विपक्ष अब विरोधी दल के बजाय देश के विकास को रोकने वाला ‘अवरोध पक्ष’ बन चुका है. उन्होंने देशवासियों से भारत विरोधी ताकतों के खिलाफ एकजुट रहने की जोरदार अपील की. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए 426.71 करोड़ रुपये की लागत वाली 31 नई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया.
राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने विपक्ष को ‘अवरोध पक्ष’ क्यों कहा?
एकता नगर की जनसभा में प्रधानमंत्री ने राजनीतिक मर्यादा और विकास की राह में आने वाली रुकावटों का जिक्र किया. उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा, ‘यह हमारा दुर्भाग्य है कि विपक्ष अब विरोध पक्ष के बजाय अवरोध पक्ष बन चुका है.’ लोकतंत्र में स्वस्थ विरोध और आलोचना का हमेशा स्वागत किया जाता है. लेकिन जब राजनीतिक दल हर सकारात्मक काम का अकारण विरोध करने लगें तो वे प्रगति में बाधक बन जाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए देश के नागरिकों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश की जा रही है. समाज को जातियों और वर्गों में बांटने की साजिशें रची जा रही हैं. प्रधानमंत्री ने जनता को सचेत करते हुए कहा कि ऐसे तत्वों की असल पहचान करना बहुत जरूरी है. भारत को विकसित बनाने के लिए राजनीतिक विरोध को देश के विकास में बाधा नहीं बनने देना चाहिए.
विदेशों में गुपचुप मुलाकातों और दिमागी नक्सलियों को लेकर क्या चेतावनी दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया विदेश यात्राओं की ओर परोक्ष रूप से बड़ा संकेत किया. उन्होंने सवालिया लहजे में मंच से पूछा, ‘विदेशों में गुपचुप तरीके से कौन किससे मिल रहा है?’ उन्होंने आगे पूछा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत विरोधी ताकतें किसे अपना समर्थन दे रही हैं. कौन से लोग आज भारत के दुश्मनों की भाषा बोलकर देश को कमजोर करने में जुटे हैं. मोदी ने कहा कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया को एक घातक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. देश के खिलाफ तरह-तरह की झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके.
आंतरिक सुरक्षा की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार के संकल्प को दोहराया. उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल देश को नक्सलवाद और माओवाद से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया गया था. सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के दम पर जमीन पर सक्रिय नक्सलियों का लगभग सफाया कर दिया गया है. हालांकि उन्होंने आगाह किया कि जंगल से हथियारबंद नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी ‘दिमागी नक्सलियों’ का खतरा बना हुआ है. यह दिमागी नक्सलवाद शहरों और बौद्धिक संस्थानों में बैठकर समाज में जहर घोलने का काम करता है. देश की अखंडता की रक्षा के लिए इस वैचारिक खतरे को पहचानना और उसका मुकाबला करना बेहद जरूरी है.
सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और पंथनिरपेक्ष नागरिक संहिता पर क्या रोडमैप सामने रखा?
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने आने वाले समय में देश के सामने मौजूद प्राथमिक चुनौतियों और सरकार के आगामी बड़े कदमों का खाका पेश किया. उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा नीति का मुख्य लक्ष्य सीमाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद करना है. सीमा पार से होने वाली किसी भी घुसपैठ को पूरी सख्ती से रोका जाएगा. उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों यानी डेमोग्राफिक बदलावों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि बिना पहचान के अवैध घुसपैठ को रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है.
इसके साथ ही उन्होंने देश में पंथनिरपेक्ष नागरिक संहिता यानी सेक्युलर सिविल कोड की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि एक आधुनिक और लोकतांत्रिक देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून का होना बेहद जरूरी है. सरकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और ‘विकसित भारत’ के दोहरे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही है. सरदार वल्लभभाई पटेल ने जिस एकजुट राष्ट्र का सपना देखा था, यह देश आज उसी रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के आंकड़ों का भी विस्तृत ब्योरा दिया. उन्होंने पिछली सरकारों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक देश में ‘गरीबी हटाओ’ का सिर्फ खोखला नारा दिया गया. यह नारा देने वाले राजनेता खुद तो अमीर होते चले गए लेकिन देश के गरीब वहीं के वहीं रह गए. हालांकि पिछले एक दशक में सरकार की कल्याणकारी नीतियों से जमीनी स्तर पर व्यापक बदलाव आया है.
प्रधानमंत्री ने विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि साल 2024 से पहले के 10 से 12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीयों ने गरीबी को मात दी है. उन्होंने ऐतिहासिक आंकड़े साझा करते हुए कहा कि पहले देश में हर 100 में से 27 से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी की चपेट में थे. यानी देश की एक-चौथाई से ज्यादा आबादी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही थी. आज सरकारी योजनाओं और पारदर्शी व्यवस्था की बदौलत यह आंकड़ा घटकर तीन प्रतिशत से भी नीचे आ चुका है. उन्होंने कहा कि गरीबों का सशक्तिकरण ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव साबित हो रहा है.
वैश्विक संकट और ऊर्जा चुनौतियों के बीच भारत की एकता कैसे ढाल बनी?
प्रधानमंत्री ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात और युद्धों के दौर का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में भयानक युद्ध चल रहे हैं. दुनिया के बड़े और ताकतवर देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी इस समय भारी मंदी और दबाव से गुजर रही हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक संसाधनों का भीषण संकट पैदा हो चुका है और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह लड़खड़ा गई है. ऐसे कठिन समय में 140 करोड़ भारतीयों की एकता और आपसी भाईचारा ही देश की सबसे बड़ी ढाल बनकर उभरा है.
उन्होंने हाल के वैश्विक ऊर्जा संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि कई विकसित देशों में भी पेट्रोल और डीजल की खरीद पर सख्त पाबंदियां लगानी पड़ गईं. उस दौरान भारत को लेकर भी कई विदेशी विश्लेषक बड़ी आशंकाएं जता रहे थे. कहा जा रहा था कि भारी आबादी और घरेलू तेल उत्पादन की कमी के चलते भारत में बड़ा हाहाकार मचेगा. उस संकट के समय भारत विरोधी ताकतें भी देश का माहौल बिगाड़ने में सक्रिय थीं. लेकिन भारत ने अपनी बेहतरीन आर्थिक नीतियों के दम पर वैश्विक संकट का रत्ती भर भी असर अपने आम नागरिकों की जेब पर नहीं पड़ने दिया.
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और एकता नगर को 426 करोड़ की कौन-सी सौगातें मिलीं?
राष्ट्रीय एकता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एकता नगर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने के लिए 426.71 करोड़ रुपये की कुल 31 विकास परियोजनाओं का तोहफा दिया. इनमें से 307.83 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकीं 23 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया. इसके अलावा 118.88 करोड़ रुपये की लागत वाली 8 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई. इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा देखने आने वाले पर्यटकों की यात्रा को अधिक सुगम और यादगार बनाना है.
पर्यटन सुविधाओं के तहत प्रधानमंत्री ने 50 करोड़ रुपये की लागत से बने आईआरसीटीसी के नए होटल का उद्घाटन किया. पर्यटकों के लिए नर्मदा के पानी में सैर कराने वाला 16 करोड़ रुपये का ‘एकता क्रूज’ भी शुरू किया गया. इसके साथ ही 14.30 करोड़ रुपये की लागत से विकसित ‘वर्षा वन’ और 3.67 करोड़ रुपये का ‘इको-ट्रेल’ जनता को समर्पित किया गया. बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 45.53 करोड़ रुपये का सीवेज शोधन संयंत्र और 21.40 करोड़ रुपये का जल शोधन संयंत्र शुरू हुआ. परेड और आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए 23.81 करोड़ रुपये की लागत से बना नया परेड ट्रैक भी चालू किया गया.
यातायात को आधुनिक बनाने के लिए 28.22 करोड़ रुपये की लागत से चलती पट्टियां यानी ट्रैवलेटर लगाए गए हैं. जाम की समस्या से निपटने के लिए 23 करोड़ रुपये की लागत से 24 मीटर चौड़ी आधुनिक कॉलोनी सड़क बनाई गई है. पर्यटन स्थल पर तैनात कर्मियों के लिए 14.25 करोड़ रुपये के कर्मचारी आवास और नौ मीटर लंबी दो वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें भी शुरू की गईं. इसके साथ ही मोखाड़ी गांव के पास नया टर्मिनल भवन, जेटी, विभिन्न स्थानों पर वाटर बूथ, आकर्षक फव्वारे और एकता नगर स्टेशन से आगंतुक केंद्र को जोड़ने वाले नए पैदल मार्ग का विस्तार भी किया गया. परिसर को रात में चमकाने के लिए इमारतों पर फसाड लाइटिंग, ‘एकता प्रकाश पर्व’ प्रदर्शनी और उन्नत ‘यूनिटी ग्लो गार्डन’ का भी लोकार्पण हुआ.
भविष्य की जिन 8 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया, उनमें 59.32 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली गोरा-भनदरा सड़क सबसे प्रमुख है. इसके साथ ही 36.58 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक ‘स्मार्ट जीरो वेस्ट’ एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा. अन्य योजनाओं में 7.72 करोड़ रुपये का खलवानी पुल, 5.79 करोड़ रुपये का कैक्टस और बटरफ्लाई गार्डन, 5.15 करोड़ रुपये का खलवानी इको-टूरिज्म विस्तार, वाघड़िया सड़क का चौड़ीकरण और सरदार सरोवर बांध के लिए हाईटेक आपदा नियंत्रण कक्ष का निर्माण शामिल है.
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के समापन पर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया. उन्होंने कहा कि आजादी के समय अंग्रेजों ने भारत को सैकड़ों टुकड़ों में बांटने का कुत्सित प्रयास किया था. लेकिन सरदार पटेल ने अपने लौह संकल्प और अद्भुत कूटनीति के बल पर 550 से अधिक देसी रियासतों का भारतीय संघ में शांतिपूर्ण विलय कराया. उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोकर ‘अखंड भारत’ की मजबूत नींव रखी.
मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें आजादी का अहसास कराता है और गणतंत्र दिवस संविधान के प्रति जवाबदेही तय करता है. वहीं राष्ट्रीय एकता दिवस हमें एक राष्ट्र के रूप में हमेशा एकजुट रहने की असीम शक्ति प्रदान करता है. साल 2014 से हर वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाने वाला यह पर्व देशवासियों में देशभक्ति की नई ऊर्जा भरता है. देश की 140 करोड़ जनता जब कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी तो भारत को साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने से दुनिया की कोई भी ताकत नहीं रोक सकेगी.



