शोरूम में हजारों खर्च करते हैं, कुम्हार से 100 रुपये के दीये पर मोलभाव क्यों? लक्ष्मी जैन की अपील ने छुआ दिल

Last Updated:October 31, 2026, 14:01 IST
Tonk Diwali Celebration: दिवाली से पहले टोंक के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है. इस बीच पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन के नेतृत्व में महिलाओं ने मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हार परिवारों का पारंपरिक राजस्थानी साफा पहनाकर सम्मान किया. लक्ष्मी जैन ने वोकल फॉर लोकल अभियान को आगे बढ़ाते हुए लोगों से दीपक खरीदते समय मोलभाव नहीं करने की अपील की. उन्होंने कहा कि कुम्हारों की मेहनत भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखती है.
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टोंक में लक्ष्मी जैन की अपील ने छुआ दिल
टोंक: टोंक के बाजारों में दीवाली के पावन पर्व को लेकर जबरदस्त रौनक दिखाई देने लगा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को धरातल पर आगे बढ़ाते हुए टोंक में एक अनूठी पहल देखने को मिली. नगर परिषद की पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन के नेतृत्व में स्थानीय महिलाओं ने मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हार परिवारों का पारंपरिक राजस्थानी साफा पहनाकर आत्मीय स्वागत और सम्मान किया.
इस अवसर पर लक्ष्मी जैन ने आमजन से दीपावली के मौके पर बिना किसी मोलभाव के मिट्टी के दीपक खरीदने की मार्मिक अपील की. उन्होंने कहा कि कुम्हार के हाथ केवल दीपक नहीं गढ़ते, बल्कि वे हमारी सदियों पुरानी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखते हैं, इसलिए उनकी मेहनत का सम्मान करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है.
शोरूम में नहीं तो कुम्हार से क्यों?पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन ने समाज को एक गहरा संदेश देते हुए कहा कि जब हम बड़े-बड़े शोरूम, मॉल और होटलों में हजारों रुपये खुशी-खुशी खर्च कर देते हैं, तब वहां कभी कोई मोलभाव नहीं करते. फिर दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत कर मिट्टी के दीपक तैयार करने वाले गरीब कुम्हार से 100-200 रुपये के दीये खरीदते समय हम भाव-ताव क्यों करने लगते हैं? मिट्टी का दीपक भले ही आकार में छोटा दिखे, लेकिन उसके पीछे छिपी कुम्हार की अनथक मेहनत, पसीना और भावनाएं पूरी तरह से अनमोल हैं.
साफा पहनाकर किया स्वागतसम्मान कार्यक्रम के दौरान पूर्व सभापति के साथ मौजूद महिला प्रतिनिधिमंडल ने कड़ी मेहनत करने वाले कुम्हारों और उनके परिवारजनों को राजस्थानी परंपरा के अनुसार साफा पहनाया और फल-मिठाई देकर उनका हौसला बढ़ाया. अचानक मिले इस मान-सम्मान और आत्मीयता से कुम्हार परिवारों के चेहरों पर खुशी और गर्व की चमक साफ देखने को मिली. स्थानीय कारीगरों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से उन्हें अपनी पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है.
‘वोकल फॉर लोकल’ से जगमगाएंगे घरलक्ष्मी जैन ने टोंक वासियों से अपील करते हुए कहा कि इस दिवाली चाइनीज लाइटों और कृत्रिम सजावट के बजाय मिट्टी के दीपकों को प्राथमिकता दें. जब हम स्थानीय कारीगरों से दीये खरीदेंगे, तो न केवल हमारी संस्कृति समृद्ध होगी बल्कि उन गरीब परिवारों के घरों में भी दिवाली की असली खुशी और खुशहाली आ सकेगी. इस पहल से पूरे टोंक शहर में स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को अपनाने का एक सकारात्मक माहौल बन रहा है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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October 31, 2026, 14:01 IST



