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‘लव स्टोरी से सुरक्षा को क्या खतरा?’ फिल्म ‘सहिया’ से सेंसर बोर्ड ने जताई आपत्ति, फिल्ममेकर ने दागे तीखे सवाल

Last Updated:October 31, 2026, 23:58 IST

झारखंड के खूबसूरत जंगलों और आदिवासी जीवन के बैकग्राउंड में बनी हिंदी फीचर फिल्म ‘सहिया’ एक बार फिर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों में उलझ गई है. प्रेम, मानवीय संवेदना और अहिंसा के संदेश पर आधारित फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पहले 27 अगस्त 2026 को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया था. अब बॉम्बे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 27 अक्टूबर को दोबारा फिल्म देखने वाली रिवाइजिंग कमेटी ने भी सर्टिफिकेट न देने की सिफारिश कर दी है. 29 अक्टूबर को जारी पत्र में फिल्म के प्लॉट, नक्सलवाद, सुरक्षा बलों के इमेज और आदिवासी समुदाय से संबंधित नई आपत्तियां उठाई गई हैं.

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Amazon Prime DayTop Deals Inside'लव स्टोरी से सुरक्षा को क्या खतरा?' फिल्म पर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों पर सवालZoomफिल्म ‘सहिया’ को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी नहीं मिली है. (फोटो साभार: IANS)फिल्म ‘सहिया’ को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी नहीं मिली है. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: फिल्म ‘सहिया’ को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने में देरी हो रही है. इसे दूसरी बार सर्टिफिकेट देने से मना किया गया है. फिल्म के निर्माता और निर्देशक संजय शर्मा ने सेंसर बोर्ड की आपत्तियों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बोर्ड की आपत्तियों को बेबुनियाद, असंगत और फिल्म की मूल भावना के उलट बताते हुए सवाल उठाए. उन्होंने सवाल किया कि आखिर एक प्रेम कहानी से देश की सुरक्षा को क्या खतरा हो सकता है? उन्होंने कहा कि ‘सहिया’ किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रमोशन करने वाली फिल्म नहीं है. यह प्रेम, इंसानियत और मानवीय संवेदनाओं की कहानी है. इसमें नक्सलवाद का सपोर्ट नहीं किया गया है और न ही किसी हिंसक दल का महिमामंडन किया गया है. इसके उलट फिल्म का मूल संदेश हिंसा का विरोध और मानवीय जीवन का सम्मान है.

संजय शर्मा ने कहा कि फिल्म की कहानी और उसके ट्विस्ट का खुलासा करना उचित नहीं होगा, क्योंकि वे चाहते हैं कि दर्शक सिनेमाघरों में जाकर खुद इस प्रेम कहानी को महसूस करें. लेकिन इतना साफ है कि ‘सहिया’ बंदूक और हिंसा का सपोर्ट नहीं करती. यह प्रेम की ताकत और मानवीय संवेदनाओं को सामने लाने वाली फिल्म है. उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि सेंसर बोर्ड को आखिर इस फिल्म से क्या परेशानी है. हमने कोई राजनीतिक प्रचार फिल्म नहीं बनाई. हमने किसी दल के सपोर्ट में फिल्म नहीं बनाई. हमने तो एक खूबसूरत प्रेम कहानी बनाई है. ऐसी कहानी जो दर्शकों को भावुक करेगी, उन्हें सोचने पर मजबूर करेगी और इंसानियत का संदेश देगी. आखिर इसमें आपत्तिजनक क्या है?

सेंसर बोर्ड ने फिल्म का नाम लिखा गलतफिल्म के सर्टिफिकेट को लेकर चल रहे विवाद में सबसे अहम सवाल सेंसर बोर्ड की बदलती आपत्तियों को लेकर उठ रहा है. फिल्म के सर्टिफिकेट के लिए 30 मई 2026 को आवेदन किया गया था. 20 जुलाई को एग्जामिनिंग कमेटी ने फिल्म देखी. इसके बाद मामला रिवाइजिंग कमेटी के पास पहुंचा और 12 अगस्त को सुनवाई हुई. 27 अगस्त को सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया. निर्माता की ओर से तैयार कानूनी जवाब में कहा गया है कि उस आदेश में किसी एक खास सीन या संवाद की पहचान नहीं की गई थी. यहां तक कि सेंसर बोर्ड के आदेश में फिल्म ‘सहिया’ का नाम भी गलत लिखकर ‘साहित्य’ कर दिया गया था.

बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटायाफिल्म निर्माता ने सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के चलते बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अदालत की कार्यवाही के बाद 27 अक्टूबर को रिवाइजिंग कमेटी ने फिल्म दोबारा देखी, लेकिन इस बार सर्टिफिकेशन अस्वीकार करने की सिफारिश के आधार बदल गए. अब फिल्म का प्लॉट, कुछ संवादों, सुरक्षा बलों की इमेज और आदिवासी महिलाओं से जुड़े सीन्स पर आपत्तियां उठाई गई हैं.

About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

October 31, 2026, 23:58 IST

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