तीन नदियों के संगम पर बसी थी चंद्रावती नगरी, 36 मंदिरों और 12 बावड़ियों ने खोले 1000 साल पुराने इतिहास के राज

Last Updated:November 01, 2026, 16:50 IST
Chandravati Ancient City History: राजस्थान के सिरोही जिले में आबूरोड के पास स्थित प्राचीन चंद्रावती नगरी कभी परमार राजाओं की राजधानी और व्यापार का बड़ा केंद्र हुआ करती थी. तीन नदियों के संगम पर बसी इस नगरी में खुदाई के दौरान 36 प्राचीन मंदिरों और 12 बावड़ियों के अवशेष मिले हैं. आज नदी के कटाव से यहां का हजारों साल पुराना इतिहास फिर सामने आ रहा है.
सिरोही. जिले में आबूरोड के पास स्थित प्राचीन चंद्रावती नगरी यहां से गुजरने वाली तीन नदियों के संगम घाट पर बना हुआ शहर था, इस वजह से इसे चंद्रोत्री के नाम से भी जाना जाता था. इस नगरी का इतिहास यहां बहने वाली नदियों से गहराई से जुड़ा हुआ था. स्थानीय रहवासी और पूर्व सरपंच दिनेश कुमार ने बताया कि पश्चिमी बनास नदी के किनारे बसी इस ऐतिहासिक नगरी का विस्तार सिवरनी और सुकड़ी नदी की घाटी तक था. आज भले ही सिवरनी एक छोटी बरसाती नदी के रूप में दिखाई देती है, लेकिन एक समय में इस नदी के आसपास बड़ा रहवासी इलाके, मंदिर, किले और बावड़ियां हुआ करती थी. मानसून के दौरान पहाड़ियों से आने वाले पानी से नदी में बहाव बढ़ जाता है और आगे चलकर यह पश्चिमी बनास नदी में मिल जाती है.
चंद्रावती में रीको का औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद इस नदी में मार्बल स्लरी वेस्ट जैसे इंडस्ट्रियल वेस्ट से इस नदी में प्रदूषण भी बढ़ गया है. वहीं बढ़ती आबादी के बाद इस नदी का आकार भी सिकुड़ता गया. आज भी जब पहाड़ों का पानी इस नदी में आता है और नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो भूमि कटाव से कई प्राचीन स्ट्रक्चर और मूर्तियां नदी में नजर आती है. वर्तमान में चंद्रावती नगरी स्थानीय स्तर पर चंद्रोत्री के नाम से भी जानी जाती है. कभी मंदिरों, महलों और व्यापारिक गतिविधियों से गुलजार रहने वाला यह क्षेत्र आज एक शांत गांव के रूप में दिखाई देता है. खुदाई में मिली कई प्राचीन मूर्तियों और दूसरी ऐतिहासिक चीजों को आबूरोड के चंद्रावती नगरी संग्रहालय और माउंट आबू के राजकीय संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है.
खुदाई में मिले थे प्राचीन मंदिर और बावड़ियांयहां पुरातत्व विभाग और इतिहासकारों की ओर से किए गए शोध में सामने आया था कि 11वीं और 12वीं शताब्दी के दौरान चंद्रावती परमार राजाओं की राजधानी थी. उस समय यह शहर राजस्थान, गुजरात और मालवा को जोड़ने वाले व्यापारिक रास्तों पर बसा हुआ था. पश्चिमी बनास नदी की घाटी में नगर का मुख्य किला बना हुआ था, जबकि सिवरनी नदी की घाटी में काफी धार्मिक स्थल और रिहायशी बस्तियां विकसित थी. प्रोफेसर जेएस खड़कवाल के नेतृत्व में यहां हुई खुदाई में इस घाटी से करीब 36 प्राचीन मंदिरों और 12 बावड़ियों के अवशेष मिले थे, जो आज भी यहां के म्यूजियम में सुरक्षित है.
जैन और शिव मंदिर मिले थेसिवरनी नदी की घाटी में मिले मंदिरों में भगवान शिव और जैन धर्म से जुड़े मंदिर मिले थे. खुदाई के दौरान शिवलिंग, नंदी की प्रतिमाएं, भगवान महावीर, पार्श्वनाथ और चौमुखी जैन प्रतिमा, ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य और महिषासुरमर्दिनी की मूर्तियों के अवशेष मिले हैं. इन मूर्तियों पर की गई बारीक नक्काशी उस समय की कला को दिखाती है. विदेशी आक्रमणों और समय के साथ हुए बदलावों ने चंद्रावती नगरी को काफी नुकसान पहुंचाया था. 1024 में महमूद गजनवी, 1197 में कुतुबुद्दीन ऐबक और बाद के समय में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमणों मने इस नगरी को नष्ट किया था. इस घाटी में मिली 12 प्राचीन बावड़ियां भी उस समय की पानी बचाने की व्यवस्था की कहानी बताती हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
November 01, 2026, 16:50 IST



