गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी का निधन, 78 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

Last Updated:November 02, 2026, 00:06 IST
78 साल के महंत अंजन कुमार गोस्वामी का रविवार को साइलेंट हार्ट अटैक से निधन हो गया. मंदिर परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है. रविवार दोपहर करीब 12 बजे महंत की तबीयत अचानक बिगड़ गई. साइलेंट अटैक आने के बाद उन्हें तुरंत दुर्लभजी अस्पताल ले जाया गया. इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ले ली. महंत अंजन कुमार गोस्वामी गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की परंपरा से जुड़े हुए थे और गोविंद देवजी मंदिर के महंत के रूप में लंबे समय से सेवा करते रहे.
जयपुर: गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी का 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. रविवार दोपहर साइलेंट अटैक आने के बाद उन्हें दुर्लभजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से मंदिर परिवार और श्रद्धालुओं में शोक की लहर है.
महंत अंजन कुमार गोस्वामी की रविवार दोपहर करीब 12 बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. साइलेंट अटैक आने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.
समाज बाड़ी में अंतिम संस्कार
महंत की अंतिम यात्रा आज शाम 4:30 बजे सुभाष चौक क्षेत्र स्थित हवेली से निकली. इसके बाद जलमहल के सामने स्थित समाज बाड़ी में उनका अंतिम संस्कार किया गया. महंत अंजन कुमार गोस्वामी गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की परंपरा से जुड़े थे. उनके निधन से धार्मिक जगत और गोविंद देवजी मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं में शोक का माहौल है.
जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शहर की आस्था और पहचान का बड़ा केंद्र है. यहां भगवान श्रीकृष्ण के गोविंद देव स्वरूप की पूजा होती है. खास बात यह है कि कछवाहा राजवंश के शासक भगवान गोविंद देवजी को जयपुर का वास्तविक शासक मानते थे. वे खुद को उनका सेवक या दीवान समझते थे.
कहां स्थित है मंदिर?
गोविंद देवजी मंदिर जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में जय निवास उद्यान के भीतर स्थित है. यह बादल महल और चंद्र महल के बीच बना हुआ है. मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं. इस मंदिर की स्थापना 18वीं शताब्दी में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के समय हुई थी. भगवान गोविंद देवजी की प्रतिमा वृंदावन से जयपुर लाई गई थी.
ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए वृंदावन से बाहर ले जाया गया था. बाद में इसे जयपुर लाया गया और यहां स्थापित किया गया. गोविंद देवजी के प्रति जयपुर के राजपरिवार की गहरी आस्था थी. कछवाहा शासक उन्हें राज्य का असली स्वामी मानते थे और शासन को उनकी सेवा के रूप में देखते थे. यही वजह है कि आज भी यह मंदिर जयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बना हुआ है.
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 02, 2026, 00:06 IST



