महज 23 साल की उम्र में विश्वजीत सिंह भाटी बने सरपंच, गांव की तस्वीर बदलने के लिए तैयार किया विकास का खास प्लान

Last Updated:November 01, 2026, 12:52 IST
विश्वजीत सिंह भाटी ने बताया कि उन्होंने बीए फाइनल तक पढ़ाई की है. समाजसेवा की प्रेरणा उन्हें अपने पिता भूप सिंह भाटी से मिली है. उनके पिता लंबे समय से गांवों में लोगों की सेवा और सामाजिक कार्यों में जुटे हुए हैं. पूरा परिवार ही समाजसेवा के कार्यों से जुड़ा हुआ है.
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बीकानेर. 23 साल की उम्र में जहां युवा अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, वहीं बीकानेर के विश्वजीत सिंह भाटी ने इसी उम्र में पूरे गांव का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी उठा ली है. हाल ही में श्रीकोलायत में आठ प्रत्याशियों के बीच हुए सरपंच पद के चुनाव में विश्वजीत ने 2134 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. खास बात यह है कि करीब 50 साल बाद उनके परिवार को गांव की सरपंची मिली है. पिता से समाजसेवा की प्रेरणा लेकर आगे बढ़े विश्वजीत अब गांव के विकास के लिए नई योजनाओं के साथ काम करना चाहते हैं.
विश्वजीत सिंह भाटी ने बताया कि उन्होंने बीए फाइनल तक पढ़ाई की है. समाजसेवा की प्रेरणा उन्हें अपने पिता भूप सिंह भाटी से मिली है. उनके पिता लंबे समय से गांवों में लोगों की सेवा और सामाजिक कार्यों में जुटे हुए हैं. पूरा परिवार ही समाजसेवा के कार्यों से जुड़ा हुआ है. विश्वजीत का कहना है कि परिवार से मिली इसी सीख ने उन्हें भी लोगों के बीच रहकर काम करने के लिए प्रेरित किया.
निजी खर्चे से गांव में कई विकास कार्य करवाए विश्वजीत ने बताया कि चुनाव से पहले भी उन्होंने अपने निजी खर्चे से गांव में कई विकास कार्य करवाए हैं. इनमें 700 रोड लाइट और 300 खंभे लगवाना शामिल है। इसके अलावा करीब 400 लोगों के बिजली कनेक्शन करवाए गए. गांव में 21 जेसीबी मशीनों के माध्यम से सफाई अभियान चलाया गया और 20 मंदिरों का नवीनीकरण भी करवाया गया. विश्वजीत एक भाई और एक बहन हैं. उनकी बहन उनसे बड़ी हैं. उनका कहना है कि अब तक वे बिना किसी पद के लोगों की सेवा करते आ रहे थे, लेकिन अब सरपंच की जिम्मेदारी मिली है तो वे इसे जनसेवा के अवसर के रूप में देख रहे हैं.
बिना पद के भी वे आमजन की सेवा करते युवा सरपंच विश्वजीत सिंह भाटी ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में विश्व प्रसिद्ध कोलायत सरोवर की संपूर्ण साफ-सफाई करवाना शामिल है. इसके अलावा गांव की बच्चियों को पढ़ाई के लिए तीन से चार किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है. इससे उन्हें काफी परेशानी होती है. ऐसे में बच्चियों की सुविधा के लिए निजी बसों की व्यवस्था करवाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उन्हें स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो. विश्वजीत का कहना है कि बिना पद के भी वे आमजन की सेवा करते रहे हैं, लेकिन अब सरपंच पद की जिम्मेदारी मिली है तो गांव के लोगों की समस्याओं का समाधान करवाना और क्षेत्र का विकास करना उनकी प्राथमिकता रहेगी.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
November 01, 2026, 12:52 IST



