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राजस्थान में भेड़ियों को बचाने का महा-अभियान, 800 हेक्टेयर जंगल बनेगा सुरक्षित ठिकाना

Last Updated:November 02, 2026, 12:13 IST

Rajasthan Wolf Conservation: राजस्थान में भेड़ियों की घटती आबादी को बचाने के लिए वन विभाग ने हाड़ौती और रामगढ़ विषधारी से ‘भेड़िया संरक्षण परियोजना’ की शुरुआत की है. भेड़ियों की सही संख्या और ठिकानों का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू कर गूगल फॉर्म के जरिए आम लोगों से जानकारी मांगी गई है. साल 2024 की गणना में प्रदेश में 771 भेड़िये दर्ज हुए थे. योजना के तहत 800 हेक्टेयर जंगल को भेड़ियों के सुरक्षित आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि उनकी संख्या बढ़ाई जा सके.

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राजस्थान के जंगलों में फिर बढ़ेगा भेड़ियों का कुनबा, शुरू होगी खास योजनाZoomWolf Conservation Project: राजस्थान में भेड़ियों को बचाने का महा-अभियान, 800 हेक्टेयर जंगल बनेगा सुरक्षित ठिकाना

Bundi: राजस्थान के जंगलों में अब भेड़ियों की मौजूदगी और उनकी दहाड़ फिर से मजबूती से सुनाई देगी. राज्य में लगातार घटती भेड़ियों की संख्या को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने एक बड़ा और व्यापक संरक्षण प्लान तैयार किया है. इस महा-अभियान की शुरुआत हाड़ौती संभाग के जंगलों और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व से की जा रही है. मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाकों में भेड़ियों की असली संख्या, उनके प्राकृतिक ठिकाने और उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए एक गहन सर्वे शुरू कर दिया गया है.

इस पूरे सर्वे अभियान की सबसे खास बात यह है कि वन विभाग ने इसमें आम जनता की भागीदारी को प्राथमिकता दी है. स्थानीय ग्रामीणों, वन्यजीव प्रेमियों, रिसर्चर्स और फोटोग्राफरों को इस अभियान से सीधे जोड़ा जा रहा है. लोगों के लिए जानकारी साझा करना आसान हो, इसके लिए वन विभाग ने एक स्पेशल गूगल फॉर्म भी जारी किया है. कोई भी व्यक्ति अगर जंगल या आसपास के क्षेत्र में भेड़िया देखता है, तो वह इसकी सटीक सूचना विभाग तक पहुंचा सकता है. कोटा संभाग का वन अमला इस डेटा की मदद से भेड़ियों के सुरक्षित कॉरिडोर तैयार करेगा.

15 सालों में भेड़ियों की संख्या में देखा गया बड़ा उतार-चढ़ावअगर आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान में भेड़ियों की आबादी हमेशा एक जैसी नहीं रही है. साल 2010 में जहां पूरे प्रदेश में करीब 1,289 भेड़िये मौजूद थे, वहीं साल 2020 तक यह संख्या तेजी से घटकर महज 682 रह गई. साल 2022 में यह आंकड़ा और गिरकर 532 पर आ गया था. हालांकि, साल 2024 की वन्यजीव गणना में थोड़ी राहत की खबर मिली जब राज्य में 771 भेड़िये दर्ज किए गए. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हाड़ौती के जंगलों में सही सुरक्षा और माहौल मिले तो भेड़ियों का कुनबा एक बार फिर तेजी से फल-फूल सकता है.

800 हेक्टेयर में बनेगा सेफ जोन, इको-टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावारामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के भीमझरी और बांका-गोपालपुरा बफर एरिया में पिछले दो सालों से भेड़िया संरक्षण पर काम चल रहा था. अब गोपालपुरा रेंज के तहत आने वाले उपरमाल के पठारी इलाके में लगभग 800 हेक्टेयर जंगल को भेड़ियों और भालुओं के लिए एक सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस इलाके की मैपिंग के साथ-साथ इको-टूरिज्म की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार को भी नया जीवन मिल सके.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bundi,Bundi,Rajasthan

First Published :

November 02, 2026, 12:13 IST

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