Dholpur Panchmukhi Hanuman Temple History

Last Updated:November 02, 2026, 12:45 IST
Dholpur Panchmukhi Hanuman Temple History: धौलपुर में चंबल के बीहड़ों के बीच शेरगढ़ दुर्ग में स्थित 220 साल पुराना पंचमुखी हनुमान मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. इसका निर्माण 1805 में धौलपुर जाट रियासत के संस्थापक महाराज राना कीरत सिंह ने करवाया था. डकैतों के खौफनाक दौर में भी इस मंदिर में राम नाम और हनुमान चालीसा की गूंज कभी बंद नहीं हुई. पांच स्वरूपों वाली प्रतिमा और रियासतकाल की यह अनमोल धरोहर आज भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है.
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धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर जिले में चंबल के खतरनाक और घने बीहड़ सिर्फ डकैतों और गोलियों की गड़गड़ाहट के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि यहां गहरी आस्था और अध्यात्म का एक ऐसा केंद्र भी मौजूद है जो सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए है. चंबल नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक शेरगढ़ दुर्ग के भीतर करीब 220 साल पुराना पंचमुखी हनुमान जी का मंदिर आज भी अपनी गौरवशाली गाथा बयां कर रहा है.
इतिहासकार अरविंद शर्मा के मुताबिक, धौलपुर जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दक्षिण दिशा में बने इस प्राचीन मंदिर का निर्माण धौलपुर जाट रियासत के संस्थापक महाराज राना कीरत सिंह ने साल 1805 में करवाया था. जब महाराज राना कीरत सिंह गोहद छोड़कर चंबल किनारे स्थित शेरगढ़ दुर्ग पहुंचे और इसे अपनी राजधानी बनाया, तब उन्होंने अपनी सनातन आस्था के प्रतीक के तौर पर इस भव्य मंदिर की स्थापना की थी. धौलपुर रियासत के राजचिह्न में भी हनुमान जी का प्रतीक अंकित होना इस बात की गवाही देता है कि राजवंश में बजरंगबली की कितनी गहरी आराधना थी.
डकैतों के दौर में भी नहीं थमी राम नाम की गूंजचंबल के बीहड़ों में जब खूंखार डाकुओं और गैंग्स का दौर हुआ करता था, तब भी इस पवित्र स्थान की महत्ता पर कोई आंच नहीं आई. स्थानीय किंवदंतियों और बुजुर्गों के अनुसार, उस खतरनाक दौर में भी इन बीहड़ों में केवल गोलियों की आवाज ही नहीं सुनाई देती थी, बल्कि पंचमुखी हनुमान मंदिर में गूंजने वाली राम नाम और हनुमान चालीसा की धुन से पूरा इलाका भक्तिमय रहता था. महाराज राना कीरत सिंह खुद रोज यहां पूजा-अर्चना करने आते थे. बाद में जब राजधानी कीर्तिनगर शिफ्ट हुई, तब भी लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आई और दुर्गम रास्तों को पार कर श्रद्धालु दर्शन के पहुंचते रहे.
पंचमुखी स्वरूप और अटूट आस्था की पहचानमंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा है, जिसमें उनके पांच अद्भुत स्वरूपों के दर्शन होते हैं. आज भी यह प्राचीन मंदिर धौलपुर की जाट रियासत के इतिहास, वास्तुकला और धार्मिक विरासत का सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण माना जाता है. चंबल के बीहड़ों की खूंखार छवि के बीच यह धार्मिक स्थल शांति, आस्था और दिव्यता की एक अलग ही मिसाल पेश करता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
November 02, 2026, 09:17 IST



