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न माउस की जरूरत, न कीबोर्ड की! दिमाग से कंप्यूटर चलाने की तैयारी में Elon Musk, जानें Neuralink का पूरा प्लान

सोचिए, आपको कंप्यूटर पर कुछ टाइप करना हो या माउस चलाना हो और इसके लिए हाथों का इस्तेमाल ही न करना पड़े. आप सिर्फ अपने दिमाग में उस काम के बारे में सोचें और कंप्यूटर उसे समझकर पूरा कर दे. Elon Musk की कंपनी Neuralink इसी तकनीक को हकीकत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. कंपनी ने अपने पहले कंज्यूमर-फोकस्ड प्रोडक्ट का नाम ‘Telepathy’ रखा है. इसकी मदद से यूजर्स बिना बोले और बिना टाइप किए सिर्फ दिमाग के हिंट से कंप्यूटर को कंट्रोल कर सकेंगे.

मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि Telepathy के जरिए लोग सिर्फ सोचकर कंप्यूटर या दूसरे इंसानों से तेजी से बातचीत कर पाएंगे. उनका दावा है कि आने वाले कुछ सालों में इस तकनीक से जानकारी भेजने की रफ्तार इंसान के बोलने या टाइप करने की क्षमता से भी ज्यादा हो सकती है.

क्या है Neuralink का Telepathy प्रोजेक्ट?

Telepathy Neuralink का ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) है. इसमें N1 नाम का एक छोटा ब्रेन इम्प्लांट इस्तेमाल होता है, जिसमें 64 फ्लेक्सिबल थ्रेड्स पर कुल 1,024 इलेक्ट्रोड लगे हैं. ये इलेक्ट्रोड दिमाग की गतिविधियों से निकलने वाले संकेतों को पकड़ते हैं.

इस इम्प्लांट को दिमाग में लगाने के लिए कंपनी R1 नाम के सर्जिकल रोबोट का इस्तेमाल करती है. यह रोबोट इन बेहद पतले थ्रेड्स को दिमाग के मोटर कॉर्टेक्स वाले हिस्से में लगाता है. दिमाग का यह हिस्सा शरीर की गतिविधियों और मूवमेंट को कंट्रोल करने में मदद करता है.

बिना हाथ लगाए कंप्यूटर पर खेल सकेंगे गेम

Neuralink के क्लिनिकल ट्रायल में शामिल कुछ लोगों ने इस तकनीक के जरिए कंप्यूटर का कर्सर चलाने की क्षमता दिखाई है. कंपनी के मुताबिक, इम्प्लांट की मदद से यूजर सिर्फ सोचकर माउस के बिना शतरंज खेल सकते हैं और डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

इसका सबसे बड़ा फायदा पैरालिसिस से जूझ रहे लोगों को मिल सकता है. ऐसे लोग दिमाग से मिलने वाले संकेतों के जरिए कंप्यूटर का कर्सर और कीबोर्ड कंट्रोल कर सकते हैं. Musk का कहना है कि भविष्य में कंपनी दिमाग के मोटर और सेंसर से जुड़े संकेतों को शरीर के हाथ-पैरों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम करना चाहती है. इससे कुछ लोगों को दोबारा हाथों का इस्तेमाल करने और चलने में मदद मिल सकती है.

Neuralink ने तैयार किए नए कम्युनिकेशन फीचर्स

कंपनी ने हाल ही में 72 घंटे का एक इनोवेशन स्प्रिंट भी आयोजित किया. इसमें Neuralink की टीम ने इम्प्लांट इस्तेमाल करने वाले लोगों के साथ मिलकर दिमाग से कंप्यूटर को कंट्रोल करने वाले नए फीचर्स तैयार किए और उनकी टेस्टिंग की.

इस दौरान Voice Activity Detection जैसे फीचर पर काम किया गया. इसके अलावा ऐसे विजुअल टूल भी बनाए गए, जो दिखाते हैं कि दिमाग से मिलने वाले सिग्नल कितने मजबूत हैं और वे किस तरह फैलते हैं. इससे यूजर समझ सकते हैं कि किसी मूवमेंट के बारे में सोचने पर दिमाग से किस तरह के संकेत मिलते हैं.

Grok को भी दिमाग से दे सकेंगे कमांड

Neuralink अपने ब्रेन इम्प्लांट के साथ Grok AI एजेंट को जोड़ने की भी टेस्टिंग कर रही है. इसके तहत यूजर को कोई काम करवाने के लिए सिर्फ मन में ‘Hey Neuralink’ सोचना होगा. इसके बाद AI एजेंट दिए गए निर्देश के मुताबिक काम कर सकेगा.

फिलहाल Neuralink इस तकनीक की क्लिनिकल ट्रायल के जरिए टेस्टिंग कर रही है. Telepathy नाम सामने आने से इसके प्रोडक्ट के तौर पर एक नई पहचान जरूर मिली है, लेकिन आम ग्राहकों के लिए इसकी उपलब्धता और कीमत को लेकर अभी जानकारी सामने नहीं आई है.

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