बच्चों के सिर पर सवार हो रहा खूनी खेल? कोटा के बाद अब जयपुर की वारदात से कांप उठा कलेजा

Last Updated:June 29, 2026, 16:40 IST
Rajasthan News : राजस्थान के कोटा और जयपुर में हुई मासूम बच्चों की मर्डर की दो वारदातों से पूरा सूबा हिल उठा है. दोनों ही वारदातों को अंजाम भी बच्चों ने ही दिया था. महज 11-12 साल की उम्र में बच्चे जिस तरह से खून से अपने हाथ रंग रहे हैं वो बड़ी चिंता का विषय है. बाल मन में पनप रही इस हिंसा के पीछे की वजह क्या है? प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. राजीव गुप्ता की मानें तो यह सब ‘फ्रस्ट्रेशन’ (हताशा) की देन है. अब बचपन मोबाइल में खो गया है और बच्चे ‘बच्चे’ नहीं रह गए हैं बल्कि वे सीधे जवान हो रहे हैं.समाजशास्त्री डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार बच्चों का बचपन खत्म हो रहा है और वे सीधे जवान हो रहे हैं. (AI Image)
जयपुर. केस नंबर- 1. जयपुर के मुहाना थाना इलाके में 11 साल के अजमत को उसके तीन दोस्तों ने मार डाला. लाश को ठिकाने लगा दिया. अजमत को मौत के घाट उतारने वाले तीनों आरोपी अजमत के हमउम्र हैं. इनमें दो की उम्र 12 साल से नीचे है और एक करीब 13 साल का है. अजमत की सड़ी गली लाश 25 जून को एक नाले में मिली थी. वह 14 जून से लापता था. 15 जून से पुलिस उसे ढूंढ रही थी. लेकिन पुलिस को अजमत जिंदा नहीं मिला. उसकी लाश मिली और वह भी टुकड़ों में. सिर और धड़ अलग-अलग. पुलिस ने जब मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ी तो उसके होश फाख्ता हो गए. महज मामूली कहासुनी के बाद तीन नाबलिगों ने मिलकर अजमत को मार डाला था. पुलिस ने तीनों नाबालिगों को निरुद्ध कर लिया है.
केस नंबर- 2. कुछ ऐसा ही केस गत महीने कोचिंग सिटी कोटा में सामने आया था. कोटा की रेलवे कॉलोनी निवासी 10 साल के मासूम बच्चे की क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई थी. उसकी 26 मई को क्षत विक्षत लाश झाड़ियों में मिली थी. यह मासूम उसी दिन अपने दोस्त के साथ निकला था. बाद में देर रात को झाड़ियों में उसकी लाश मिली थी. उसका भी सिर और धड़ अलग-अलग मिला था. चेहरा पत्थर से कुचला हुआ था. चेहरे को सिगरेट से भी दागा गया था. पुलिस जब मामले की जड़ तक पहुंची तो वह सन्न रह गई. इस मासूम की हत्या उसके 16 साल के दोस्त ने की थी. पलिस ने उसे निरुद्ध कर जब पूछताछ की तो वह खुद हक्की बक्की रह गई.
दो घटनाओं के बारे में जिस किसी ने भी सुना वह सिहर उठाकोटा में हुए हत्याकांड का आरोपी नाबालिग पोर्न फिल्में देखने का शौकिन था. उसने मर्डर से पहले मासूम के साथ कुकर्म किया. दुबारा जब उसने इसकी कोशिश की तो मासूम बच्चे ने एतराज जताया. बस यही आरोपी को अखर गया. उसने पत्थर मारकर उसकी हत्या दी. बाद में शव को बेल्ट से बांधकर झाड़ियों में ले गया. वहां उसने शव के साथ कुकर्म किया. फिर आसपास के पत्तों और कचरा एकत्र कर शव का चेहरा जलाने की कोशिश की. फिर शव को वहीं छोड़कर अपने घर चला गया. वहां नहा धोकर खाना खाया और फिर सो गया. उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं आई. इन दो घटनाओं के बारे में जिस किसी ने भी सुना वह सिहर उठा.
बच्चों का बचपन खत्म हो रहा है और वे सीधे जवान हो रहे हैं
ऐसी घटनाओं को बेदह गंभीरता से देखने वाले प्रख्यात समाजशास्त्री राजस्थान विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ. राजीव गुप्ता के मुताबिक इस तरह की घटनाएं ‘राज व्यवस्था’ और ‘समाज व्यवस्था’ दोनों की लापरवाही का परिणाम है. हर वर्ग की जवाबदेही खत्म हो रही है. समाज स्वतंत्र बाजार व्यवस्था के हवाले है. मोबाइल इसमें बड़ी अहम भूमिका निभा रहा है. इसके चलते बच्चों का बचपन खत्म हो रहा है और वे सीधे जवान हो रहे हैं.
हिंसा को ऑनलाइन पर आकर्षक तरीके से परोसी जा रही हैमासूम चेहरों की कातिल साजिशों के बारे डॉ. गुप्ता का कहना है कि वर्तमान में आधुनिकतावादी नजरिये के कई सोर्स खुले हुए हैं. इससे भावानात्मक और फिजिकल हिंसा बढ़ रही है. इसके पीछे बड़ी वजह हिंसा को ऑनलाइन पर आकर्षक तरीके से परोसा जाना है. वह बच्चों के दिमाग पर सीधा असर डाल रही है. इससे उनमें आक्रामकता बढ़ रही है. बकौल गुप्ता बच्चों के साथ यौनिक हिंसा और महिलाओं के साथ रेप की लगातार होती वारदातों के ऑनलाइन प्रजेटेंशन ने बच्चों के बचपन को खत्म कर दिया है.
परिणाम ‘सुसाइड’ और ‘मॉब लिचिंग’ के रूप में सामने आ रहा हैगुप्ता के मुताबिक बच्चे अलगाववाद (अकेलेपन) के शिकार हो रहे हैं. उनमें कुंठा बढ़ रही है. इससे बच्चों की फिजीकल और मेंटल हेल्थ खराब हो रही है. हथियारों की उपलब्धता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है. इसका परिणाम ‘सुसाइड’ और ‘मॉब लिचिंग’ के रूप में सामने आ रहा है. यह समाज व्यवस्था के ध्वस्त होने के सबूत हैं. समय रहते अगर बच्चों को संभाला नहीं गया तो आने वाले समय में परिणाम इससे खतरनाक हो सकते हैं. क्योंकि मोबाइल इफेक्ट से बच्चों में ‘धैर्य’ खत्म होकर ‘आक्रामकता. बढ़ रही है. इन पर अंकुश के लिए सामूहिक प्रयासों की जरुरत है.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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