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Agriculture: धनिया की खेती से बढ़ानी है कमाई? इन 6 किस्मों से मिलेगी बंपर पैदावार, बस बुवाई में अपनांए ये तरीका

नागौर. धनिया मसाला फसलों में प्रमुख स्थान रखता है. इसका उपयोग भोजन में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है. धनिया की हरी पत्तियों में प्रोटीन, शर्करा और विटामिन ए जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. किसानों के लिए धनिया की खेती आय का अच्छा स्रोत होती है. बेहतर उत्पादन के लिए सही किस्म का चयन, खेत की तैयारी, बीजोपचार और समय पर सिंचाई करना जरूरी है. फसल पकने के समय शुष्क मौसम रहने से धनिये की गुणवत्ता अच्छी रहती है. धनिये की अच्छी पैदावार के लिए दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है.

खेत तैयार करते समय मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा बनाना चाहिए, ताकि बीजों का अंकुरण सही तरीके से हो सके. असिंचित क्षेत्रों में मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर बुवाई करनी चाहिए. खेत की जुताई के बाद पाटा लगाकर मिट्टी की नमी को सुरक्षित रखा जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों बजरंग सिंह ने बताया कि धनिया की फसल में प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाना लाभदायक रहता है. खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और उसकी संरचना में सुधार होता है. उर्वरकों की मात्रा फसल की स्थिति और मिट्टी की जांच के आधार पर तय करनी चाहिए.

किसान उन्नत किस्मों का करें चयन

प्रगतिशील किसान अर्जुन चौधरी ने बताया कि धनिया की अच्छी पैदावार के लिए किसान उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं. इनमें आरसीआर 436, आरसीआर 435, आरसीआर 728, आरकेडी 18, अजमेर धनिया-1 और अजमेर धनिया-2 प्रमुख हैं. बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और प्रमाणित होने का ध्यान रखना चाहिए.

मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर तक बुवाई उपयुक्त

धनिया की बुवाई सामान्य तौर पर 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच की जाती है. स्थानीय मौसम और तापमान के अनुसार बुवाई का समय तय करना चाहिए. खेत में बीजों की बुवाई कतारों में 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए. असिंचित खेती में प्रति हेक्टेयर लगभग 15 से 20 किलोग्राम और सिंचित खेती में 10 से 12 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है. बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना भी जरूरी है. इससे बीज और मिट्टी से फैलने वाले कुछ रोगों का खतरा कम किया जा सकता है. बीजोपचार के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपयुक्त फफूंदनाशक या जैविक उत्पाद का इस्तेमाल करना चाहिए.

सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण पर भी दें ध्यान

धनिया की फसल में अंकुरण के बाद जरूरत के अनुसार 4 से 6 सिंचाई की आवश्यकता हो सकती है. सिंचाई का अंतराल मिट्टी की नमी, मौसम और फसल की अवस्था के अनुसार रखना चाहिए. खेत में पानी भरने से बचना जरूरी है. खरपतवार नियंत्रण के लिए भी किसानों को समय पर निराई-गुड़ाई करनी चाहिए. असिंचित फसल में बुवाई के लगभग 30 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई करना उपयोगी रहता है. धनिया की बेहतर पैदावार के लिए समय पर बुवाई, उन्नत बीज, संतुलित खाद, उचित सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए. साथ ही, खेत में रोगों के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे फसल की गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल सकती है.

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