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Agriculture: राजस्थान में बारिश की मार, मोठ के भाव हुए दोगुने, अब महंगा हो सकता है बीकानेरी भुजिया

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राजस्थान में बारिश की मार, मोठ के भाव दोगुने, महंगा हो सकता है बीकानेरी भुजिया

Last Updated:October 10, 2026, 12:44 IST

Rajasthan Moth Bean Production Suffer: बारिश की कमी ने पश्चिमी राजस्थान के किसानों के साथ खाद्य कारोबार की चिंता भी बढ़ा दी है. मोठ की फसल प्रभावित होने से मंडियों में इसकी उपलब्धता घट गई है और भाव करीब दोगुने के आसपास पहुंच गए हैं. पिछले साल 4200 से 5200 रुपए प्रति क्विंटल मिलने वाली मोठ अब 8800 से 9300 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है. बीकानेर और चूरू मोठ की खेती के प्रमुख केंद्र हैं, जहां राजस्थान की करीब 60 प्रतिशत मोठ की खेती होती है. बीकानेर के भुजिया उद्योग में मोठ का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है. ऐसे में कच्चे माल की महंगाई से भुजिया सहित अन्य खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ने की आशंका है. इसका असर आगे चलकर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.Amazon Prime DayTop Deals Inside

बीकानेर. पश्चिमी राजस्थान में इस बार बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मानसून की बेरुखी का असर अब खेतों से निकलकर अनाज मंडियों तक दिखाई देने लगा है. प्रदेश में मोठ की फसल का उत्पादन घटने से इसके भाव में दोगुने के करीब उछाल आया है. पिछले साल जिस मोठ के भाव 4200 से 5200 रुपए प्रति क्विंटल थे, वे इस बार बढ़कर 8800 से 9300 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. इसका असर आने वाले दिनों में आम आदमी की जेब पर भी पड़ सकता है.

मोठ की बढ़ती कीमतों का असर बीकानेर के विश्व प्रसिद्ध भुजिया उद्योग पर भी पड़ने की आशंका है. बीकानेरी भुजिया में मोठ का महत्वपूर्ण इस्तेमाल होता है और यहां बनने वाला भुजिया देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में पहुंचता है. ऐसे में कच्चे माल की कीमत बढ़ने से भुजिया सहित मोठ से बनने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ सकती है. हालांकि, इन उत्पादों की खुदरा कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह कारोबारियों के फैसलों पर निर्भर करेगा.

20 लाख बोरी से भी कम रह गया है उत्पादन

बीकानेर अनाज मंडी संघ के अध्यक्ष जय दयाल डूडी ने बताया कि इस बार पश्चिमी राजस्थान में अकाल जैसी स्थिति बनी हुई है. बारिश कम होने से किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने बताया कि मोठ की फसल पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है. पिछले साल अच्छी बारिश होने से मोठ की पैदावार बेहतर रही थी, जबकि इस बार बारिश की कमी के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई है. डूडी के मुताबिक, पिछले साल मोठ का उत्पादन करीब 50 लाख बोरी था, जबकि इस बार उत्पादन 20 लाख बोरी से भी कम रहने का अनुमान है. उनके अनुसार, इस बार मोठ की फसल पिछले साल के मुकाबले करीब 40 प्रतिशत ही रह गई है. उत्पादन में आई इस गिरावट का सीधा असर मंडियों में मोठ की उपलब्धता और कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

बीकानेर और चूरू में सबसे ज्यादा खेती

जय दयाल डूडी ने बताया कि मोठ की खेती मुख्य रूप से राजस्थान में होती है. प्रदेश में बीकानेर और चूरू मोठ उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं. उनके अनुसार, राजस्थान में मोठ की करीब 60 प्रतिशत खेती इन दोनों जिलों में होती है, जबकि शेष 40 प्रतिशत खेती बाड़मेर और जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में की जाती है. प्रदेश में मोठ का बुवाई क्षेत्र लगभग 10 लाख हेक्टेयर बताया गया है. इस बार कम बारिश ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी असर डाला है. खासकर जिन किसानों ने मानसून की उम्मीद में देरी से बुवाई की थी, उन्हें अधिक नुकसान उठाना पड़ा है.

किसानों को भी हुआ नुकसान

बारिश के अभाव में फसल का उत्पादन घटने से किसानों की आय प्रभावित हुई है. वहीं, मंडियों में आवक कम होने के कारण मोठ के भाव में तेजी बनी हुई है. मोठ का इस्तेमाल भुजिया के अलावा दाल और दूसरे खाद्य पदार्थ बनाने में भी किया जाता है. ऐसे में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का असर खाद्य कारोबार पर पड़ सकता है. यदि मोठ के भाव ऊंचे बने रहते हैं, तो आने वाले समय में भुजिया और अन्य उत्पादों की लागत बढ़ने की संभावना है. इस तरह पश्चिमी राजस्थान में बारिश की कमी का असर अब किसानों के साथ-साथ कारोबार और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता दिखाई दे रहा है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Bikaner,Rajasthan

First Published :

October 10, 2026, 12:44 IST

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