Agriculture News I अब रेगिस्तान में लहलहाएंगे अनार-अंजीर के बाग, जोधपुर में शुरू हुई खास लैब

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पश्चिमी राजस्थान में खेती की नई क्रांति, अब लैब में तैयार होंगे रोगमुक्त पौधे
Last Updated:October 14, 2026, 11:36 IST
Rajasthans First Tissue Culture Lab: जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने पश्चिमी राजस्थान की पहली अत्याधुनिक टिश्यू कल्चर लैब स्थापित की है. यहां अनार, अंजीर, कैक्टस और औषधीय पौधों के रोगमुक्त व उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाएंगे. इस पहल से किसानों को सालभर उन्नत पौध सामग्री मिलेगी और रेगिस्तानी क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा मिलेगा.
जोधपुर. थार की शुष्क जलवायु में खेती करने वाले किसानों के लिए बागवानी को लाभकारी बनाने की दिशा में नई पहल हुई है. अनार, अंजीर और औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को अब बेहतर गुणवत्ता वाली पौध सामग्री के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने पश्चिमी राजस्थान की पहली अत्याधुनिक प्लांट टिश्यू कल्चर लैब स्थापित की है. इस प्रयोगशाला में आधुनिक तकनीक से कम समय में रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जा सकेंगे. इससे क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को उन्नत पौध उपलब्ध कराने और दुर्लभ पौधों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी. कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने कुलगुरु प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत के मार्गदर्शन में जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के वित्तीय सहयोग से इस प्रयोगशाला की स्थापना की है. कुलगुरु प्रो. जैतावत ने बताया कि आधुनिक कृषि में जैव प्रौद्योगिकी और टिश्यू कल्चर तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है.
इस लैब के माध्यम से कम समय में उन्नत किस्मों के क्लोनल पौधे तैयार किए जा सकेंगे. पश्चिमी राजस्थान की जलवायु के अनुकूल बागवानी और औषधीय फसलों की गुणवत्ता सुधारने में यह पहल उपयोगी साबित होगी. किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध होने से खेती में नई संभावनाएं विकसित होंगी. लैब प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि टिश्यू कल्चर एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें पौधे के छोटे हिस्से, जैसे जड़, तना, पत्ती या कोशिकाओं से नए पौधे विकसित किए जाते हैं। प्रयोगशाला में नियंत्रित तापमान और जीवाणुरहित वातावरण में विशेष कृत्रिम माध्यम का उपयोग कर पौध तैयार की जाएगी। इस तकनीक से तैयार पौधों में वायरस और बीमारियों का जोखिम कम करने में मदद मिलती है। इसकी खासियत यह है कि पौधे तैयार करने के लिए किसी विशेष मौसम का इंतजार नहीं करना पड़ता। इससे सालभर पौध उत्पादन की संभावनाएं बढ़ेंगी और दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित करने में भी सहायता मिलेगी.
अनार, अंजीर और कैक्टस के साथ औषधीय पौधों पर भी होगा शोधप्रयोगशाला में अनार, अंजीर, कैक्टस और औषधीय फसलों के रोगमुक्त क्लोनल पौधे तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. यहां माइक्रोप्रोपेगेशन तकनीक से बड़े पैमाने पर पौध उत्पादन, विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण और आनुवंशिक रूप से शुद्ध पौध तैयार करने का काम होगा. इसके साथ ही पश्चिमी राजस्थान की परिस्थितियों के अनुकूल सूखा और लवणता सहन करने वाली किस्मों के विकास पर भी शोध किया जाएगा. इस पहल से क्षेत्र में बागवानी के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण पौध की उपलब्धता और किसानों के लिए खेती के नए विकल्प विकसित करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
October 14, 2026, 11:36 IST



