Rajasthan

Unique Temple: जयपुर का 250 साल पुराना मंदिर, मनोकामना पूरी होते ही यहां घंटी चढ़ाने पहुंचते हैं भक्त

Last Updated:October 14, 2026, 11:21 IST

Rudraghanteshwari Mahakalika Temple: जयपुर के सूरजपोल बाजार स्थित रुद्रघंटेश्वरी महाकालिका मंदिर को ‘घंटियों वाली माता’ के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त यहां घंटियां चढ़ाते हैं. करीब 250 साल पुरानी माता की प्रतिमा, 108 चांदी की घंटियों और मंदिर से जुड़ी अनोखी कहानी इसे खास बनाती है. नवरात्रि में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.Amazon Prime DayTop Deals Inside

जयपुर. राजस्थान की अपने प्राचीन मंदिरों और उनसे जुड़ी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. नवरात्रि के दिनों में शहर के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. इन्हीं मंदिरों में एक है सूरजपोल बाजार के दर्जियों का रास्ता स्थित रुद्रघंटेश्वरी महाकालिका मंदिर. इस मंदिर की सबसे खास बात यहां घंटियां चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि माता के सामने मांगी गई मनोकामना पूरी होने पर भक्त दोबारा मंदिर आते हैं और घंटियां अर्पित करते हैं. इसी वजह से माता को घंटियों वाली माता के नाम से भी जाना जाता है.

लोकल-18 से बातचीत में मंदिर के पुजारी संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि वर्षों से भक्त अपनी परेशानियां दूर होने और मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना लेकर माता के दरबार में आते हैं. जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वे मंदिर में आकर घंटियां बांधते हैं. नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने और घंटियां चढ़ाने पहुंचते हैं.

250 साल पुरानी है माता की प्रतिमा

मंदिर के पुजारी संजीव कुमार शर्मा के अनुसार, मंदिर में स्थापित रुद्रघंटेश्वरी माता की प्रतिमा करीब 250 साल पुरानी है. उनके पिता ने लगभग 40 साल पहले इस प्रतिमा को अपने घर में विधि-विधान से स्थापित करवाया था. मंदिर में माता को महालक्ष्मी, सरस्वती और आदिशक्ति भुवनेश्वरी के स्वरूप में भी पूजा जाता है. पुजारी ने बताया कि मां काली की यह प्रतिमा भिंडों का रास्ता स्थित देवकीनंदन मूर्तिकार के गोदाम में अधूरी अवस्था में रखी हुई थी. उनके पिता को स्वप्न में माता की प्रतिमा को पूरा करवाने का संकेत मिला. इसके बाद प्रतिमा को तैयार करवाया गया। करीब 40 साल पहले माघ शुक्ल नवमी के दिन 71 विद्वानों ने दुर्गा सप्तशती और रुद्र पाठ के साथ विधि-विधान से प्रतिमा की स्थापना की.

छह महीने में चढ़ाई गईं 108 चांदी की घंटियां

पुजारी के मुताबिक, माता की प्रतिमा स्थापित होने के बाद भक्तों ने छह महीने के भीतर मंदिर में चांदी की 108 घंटियां लगवाई. इसके बाद से यहां घंटियां चढ़ाने की परंपरा लगातार चल रही है. धीरे-धीरे मंदिर में सैकड़ों घंटियां एकत्र हो गईं और यह स्थान भक्तों के बीच घंटियों वाली माता के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया. मंदिर में लगी घंटियां भगवान शिव के 108 नामों से जुड़ी हुई हैं और इन्हें रुद्र घंटिका के नाम से जाना जाता है. माता रानी 108 चांदी के छत्रों की छाया में विराजमान हैं। भक्त यहां घंटियों के साथ चांदी के छत्र भी चढ़ाते हैं. मंदिर में जगह कम होने के कारण सभी घंटियों को एक साथ लगाने की व्यवस्था नहीं हो पाती. इसके बावजूद भक्तों की आस्था लगातार बनी हुई है. खासकर शारदीय नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है. घर के भीतर बने इस छोटे से मंदिर का पूरा दरबार घंटियों और चांदी के छत्रों से सजा हुआ है, जो इसकी अलग पहचान बनाता है. यहां आने वाले भक्त माता के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और पूरी होने पर घंटियां चढ़ाकर आभार जताते हैं.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Jaipur,Rajasthan

First Published :

October 14, 2026, 11:21 IST

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