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Agriculture News I महंगे कीटनाशकों का खर्च घटाने का देसी तरीका, 10 पत्तियों से घर पर ही बनाएं दशपर्णी अर्क

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नीम और आक का कमाल, 10 पत्तियों से तैयार दशपर्णी अर्क,कीट प्रबंधन में आएगा काम

Last Updated:October 27, 2026, 18:54 IST

Dashparni Ark: भीलवाड़ा में किसान कम खर्च में कीट प्रबंधन के लिए दशपर्णी अर्क अपना सकते हैं. नीम, धतूरा, आक समेत 10 प्रकार की पत्तियों, गोमूत्र और गोबर से तैयार होने वाला यह देसी अर्क रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है. जानिए इसे बनाने की पूरी विधि और खेती में इस्तेमाल के फायदे.Amazon Prime DayTop Deals Inside

भीलवाड़ा. खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का खर्च लगातार बढ़ने के बीच किसान अब जैविक खेती के ऑप्शन अपना रहे हैं. ऐसे में आज हम आपको ऐसे फर्टिलाइजर के बारे में बताने जा रहें हैं दशपर्णी अर्क किसानों के लिए उपयोगी देसी विकल्प बन सकता है. इसे नीम, धतूरा, आक सहित दस प्रकार की पत्तियों से तैयार किया जाता है, किसान इसे घर या खेत पर ही कम खर्च में बना सकते हैं. इसका उपयोग फसलों में कीटों के प्रबंधन और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए किया जाता है. सही विधि अपनाकर इसका इस्तेमाल खेती में किया जा सकता है, दशपर्णी अर्क बनाने के लिए नीम, धतूरा, आक, करंज, सीताफल, अरंडी, पपीता, निर्गुंडी, तुलसी और गेंदा जैसी उपलब्ध पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है. अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धता के अनुसार पत्तियों का चयन किया जाता है. इसके साथ गोमूत्र, पानी और थोड़ी मात्रा में गोबर का उपयोग भी पारंपरिक विधि में किया जाता है.

कृषि विज्ञान केंद्र डॉ. सी एम यादव ने बताया कि सबसे पहले दस प्रकार की पत्तियों को इकट्ठा करके साफ कर लें और बारीक काट लें. अब एक बड़े प्लास्टिक के ड्रम या अन्य उपयुक्त बर्तन में इन पत्तियों को डालें इसमें पानी, गोमूत्र और गोबर मिलाकर मिश्रण तैयार करें. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाने के बाद बर्तन को ढककर छायादार जगह पर रख दें, मिश्रण को नियमित अंतराल पर लकड़ी की सहायता से हिलाते रहना चाहिए ताकि सामग्री अच्छी तरह मिलती रहे. पारंपरिक विधि में इसे लगभग 30 से 45 दिन तक सड़ने और किण्वित होने दिया जाता है. इसके बाद मिश्रण को कपड़े से छानकर अर्क अलग कर लिया जाता है, तैयार अर्क को जरूरत के अनुसार पानी में मिलाकर फसलों पर छिड़काव किया जा सकता है. इसकी मात्रा फसल, कीट और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए.

किसानों को मिल सकते हैं ये फायदे 

कृषि विज्ञान केंद्र डॉ सी एम यादव ने बताया कि दशपर्णी अर्क में इस्तेमाल होने वाली कई पत्तियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो कुछ कीटों को दूर रखने या उनकी गतिविधि कम करने में मदद कर सकते हैं. इससे फसलों में कीट प्रबंधन के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलता है, इसे खेत में उपलब्ध सामग्री से तैयार करने पर बाजार से खरीदे जाने वाले कुछ उत्पादों पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है. किसानों के लिए यह तरीका खास तौर पर तब उपयोगी हो सकता है, जब वे खेती की लागत घटाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की कोशिश कर रहे हों. हालांकि दशपर्णी अर्क हर तरह के कीट या बीमारी पर समान असर नहीं करता और इसे संपूर्ण खाद का विकल्प नहीं मानना चाहिए. छिड़काव से पहले थोड़े हिस्से में परीक्षण करना, दस्ताने पहनना और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Bhilwara,Rajasthan

First Published :

October 27, 2026, 18:54 IST

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