Animal Husbandry: बारिश में बढ़ सकता है थनैला रोग, गाय-भैंस के थन में दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सावधान

Last Updated:August 23, 2026, 11:58 IST
मानसून में नमी, कीचड़ और गंदगी के कारण गाय-भैंस में थनैला रोग का खतरा बढ़ जाता है. थन में सूजन, दर्द और दूध में गांठ या रंग में बदलाव इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं. पशुपालक साफ-सफाई और नियमित जांच के जरिए संक्रमण से बचाव कर सकते हैं.
मानसून के मौसम में पशुओं को कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इनमें थनैला रोग गाय और भैंस पालने वाले पशुपालकों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है. बारिश के दौरान पशुशाला में नमी, गंदगी और कीचड़ रहने से थन में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. थनैला होने पर पशु के थन में सूजन और दर्द हो सकता है वहीं दूध की मात्रा और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. कई बार दूध में गांठ या असामान्य बदलाव भी नजर आते हैं.
दूध में गांठ, पानी जैसा पतलापन, रंग में बदलाव या अन्य असामान्य चीज दिखाई दे तो इसे थनैला रोग का संकेत माना जा सकता है. ऐसे लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है.
रोग से बचाव के लिए पशुशाला को साफ और सूखा रखना सबसे जरूरी है. बारिश का पानी और कीचड़ पशुशाला में जमा न होने दें. थन को साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं और दूध निकालने से पहले व बाद में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.
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पशुपालकों को बारिश के मौसम में पशुओं के थन और दूध की नियमित जांच करते रहना चाहिए. शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान और पशु चिकित्सक से उपचार मिलने पर बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है, इससे पशु स्वस्थ रहेगा और दूध उत्पादन पर भी कम असर पड़ेगा.
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August 23, 2026, 11:58 IST



