Rajasthan

Bandi Mata Mandir Bijainagar | बिजयनगर में रावण नहीं महिषासुर का दहन

Last Updated:October 19, 2026, 09:54 IST

Bandi Mata Mandir Bijainagar: ब्यावर जिले के बिजयनगर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री बाड़ी माता मंदिर में विजयादशमी पर रावण के बजाय 41 फीट ऊंचे महिषासुर के पुतले का दहन किया जाता है. पिछले 25 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा की शुरुआत माता के भक्त चुन्नीलाल टांक ने की थी. मंदिर ट्रस्ट की कृष्णा टांक के अनुसार, मां भगवती द्वारा महिषासुर वध की पौराणिक घटना की याद में यह दहन होता है. 185 फीट ऊंचे शिखर वाले इस मंदिर में भव्य मेले और आतिशबाजी के आयोजन को लेकर पुलिस-प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं.

ख़बरें फटाफट

Amazon Prime DayTop Deals Insideराजस्थान के इस मंदिर में दशहरे पर रावण नहीं, 41 फीट के महिषासुर का होता है दहनZoomBandi Mata Mandir Bijainagar: विजयादशमी पर रावण नहीं महिषासुर का दहन

ब्यावर: राजस्थान के ब्यावर जिले में बिजयनगर के पास ब्यावर रोड पर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री बाड़ी माता मंदिर में आसोज (शारदीय) नवरात्रि और विजयादशमी के अवसर पर एक बेहद अनूठी परंपरा निभाई जाती है. यहां दशहरे के दिन रावण की जगह महिषासुर के पुतले का दहन किया जाता है. संभवतः राजस्थान का यह ऐसा इकलौता और पहला धार्मिक स्थान है, जहां रावण के बजाय महिषासुर के पुतले को जलाकर असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव मनाया जाता है. इस अवसर पर मंदिर परिसर में मां भगवती मर्दिनी द्वारा 41 फीट ऊंचे महिषासुर के विशाल पुतले का सांकेतिक दहन किया जाता है.

श्री बाड़ी माता मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी कृष्णा टांक ने बताया कि बाड़ी माता तीर्थ धाम पर पिछले 25 सालों से लगातार महिषासुर दहन की यह विशेष परंपरा चलती आ रही है. हर वर्ष देश-प्रदेश में जगह-जगह विजयादशमी पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन बिजयनगर का यह धाम अपनी इस अनूठी परंपरा के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखता है. मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार वर्षों पहले बाड़ी माता के परम भक्त (स्मृतिशेष) चुन्नीलाल टांक ने इस अनूठी परंपरा की शुरुआत की थी, जिसका अनुसरण आज भी पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ किया जा रहा है.

क्यों किया जाता है महिषासुर का दहनधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर एक अत्यंत अत्याचारी राक्षस था. उसका वध करने के लिए भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज के साथ-साथ अन्य सभी देवी-देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्रों से मां भगवती को सुसज्जित किया था. इसके बाद माता रानी ने सिंह (शेर) पर सवार होकर विकराल रूप धारण किया और महिषासुर के साथ भीषण युद्ध करके उसका वध कर दिया. इसी पौराणिक घटना और आद्यशक्ति की विजय की स्मृति में यहां महिषासुर दहन किया जाता है. इस दिन मंदिर प्रांगण में मेले का विशाल आयोजन होता है और भव्य झांकियां सजाई जाती हैं.

185 फीट ऊंचा शिखर और भव्य आतिशबाजी का आयोजनबाड़ी माता मंदिर के विशाल शिखर की ऊंचाई 185 फीट है. इस पावन धाम में बाड़ी माता के अलावा भगवान भोलेनाथ, मां लक्ष्मी, धर्मराज, श्रीकृष्ण-राधा, श्रीराम दरबार, चारभुजानाथ, गंगा मैया, चित्रगुप्त, सूर्यनारायण, लोकदेवता रामदेवजी, गायत्री माता और शीतला माता सहित कई अन्य देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं. इस बार भी मेले के आयोजन के साथ-साथ शानदार आतिशबाजी का भव्य कार्यक्रम रखा गया है. कार्यक्रम को सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए बिजयनगर पुलिस थानाधिकारी राजवीर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम व स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

और पढ़ेंLocation :

Ajmer,Ajmer,Rajasthan

First Published :

October 19, 2026, 09:54 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj