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Barmer News | Cruide Oil

Last Updated:July 06, 2026, 14:00 IST

Barmer News : भाग्यम वेलपैड-12 की पाइपलाइन से हुए रिसाव के बाद खेतों में चारों ओर काले तेल की परत जमा हो गई है. करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में फैले क्रूड ऑयल देखकर अब किसानों को चिंता सता रही है. कम्पनी द्वारा 15 से अधिक वैक्यूम टैंकर लगाए गए है जिन्होंने तेल को भरकर मौके से हटाया है लेकिन किसानों का कहना है कि टैंकर तेल तो ले गए, खेतों की बर्बादी कौन लौटाएगा

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बाड़मेर. बाड़मेर के भाग्यम वेलपैड-12 से हुई क्रूड ऑयल पाइपलाइन लीकेज ने एक बार फिर किसानों के खेतों को बर्बादी की कगार पर ला खड़ा किया है. करीब एक किलोमीटर तक फैले क्रूड ऑयल ने खेतों को अपनी चपेट में ले लिया है. लोकल18 की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि एक साल में दूसरी बार हुए इस रिसाव से किसान खासे आक्रोशित हैं.

भाग्यम वेलपैड-12 की पाइपलाइन से हुए रिसाव के बाद खेतों में चारों ओर काले तेल की परत जमा हो गई है. करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में फैले क्रूड ऑयल को देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. कंपनी ने मौके पर 15 से अधिक वैक्यूम टैंकर लगाए, जिन्होंने तेल को भरकर हटाया, लेकिन किसानों का कहना है कि टैंकर तेल तो ले गए, खेतों की बर्बादी की भरपाई कौन करेगा?

नाममात्र का मुआवजा देकर खत्म कर दिया जाता है मामलालोकल18 की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची और प्रभावित किसानों से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में यह दूसरी बड़ी घटना है. किसान दौलत राम मेघवाल के अनुसार, पहले भी पाइपलाइन लीकेज से उनके खेत प्रभावित हुए थे और इस बार भी वही स्थिति बनी हुई है. उनका आरोप है कि कंपनी केवल 2 से 3 हजार रुपये का मुआवजा देकर मामला खत्म मान लेती है, जबकि पूरे परिवार की आजीविका इन्हीं खेतों पर निर्भर है.

खरीफ की फसल पर टिकी है किसानों की आजीविकापश्चिमी राजस्थान में खरीफ की फसल किसानों की आय का सबसे बड़ा साधन है. किसान कमलाराम मेघवाल बताते हैं कि यदि खेत बंजर हो गए, तो पूरे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. उनका कहना है कि यदि बार-बार ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो आने वाले वर्षों में उपजाऊ जमीन भी बंजर होती जाएगी और खेती करना मुश्किल हो जाएगा.

विषैले हाइड्रोकार्बन से घट रही है मिट्टी की उर्वरताकिसानों का कहना है कि क्रूड ऑयल के कारण उनके खेत लगातार बंजर होते जा रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, क्रूड ऑयल में मौजूद विषैले हाइड्रोकार्बन मिट्टी की सतह पर एक परत बना देते हैं. इससे मिट्टी में पानी और ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है. नतीजतन मिट्टी की उर्वरता कम होने लगती है और लंबे समय तक फसल उगाना मुश्किल हो जाता है. किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो उनकी खेती और आजीविका दोनों पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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