Rajasthan

Beri Animal Fair 2026: लम्पी के बीच बेरी पशु मेले को मिली हरी झंडी, इस बार दो चरणों में लगेगा मेला

Last Updated:September 21, 2026, 11:59 IST

Beri Animal Fair 2026: इस बार शेखावाटी का प्रसिद्ध बेरी पशु मेला दो चरणों में आयोजित होगा. प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद 27 सितंबर से 5 अक्टूबर और फिर 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक मेला लगेगा. ऊंट-घोड़ियों की खरीद-फरोख्त, पशु प्रतियोगिताएं और ग्रामीण राजस्थान की पारंपरिक रंगत मेले का खास आकर्षण रहेंगी.

शेखावाटी क्षेत्र का प्रसिद्ध बेरी पशु मेला जल्द शुरू होने वाला है. लम्पी के बीच प्रशासन ने इस मेले के आयोजन को लेकर अनुमति दे दी गई है. पहले इस पशु मेले के आयोजन को लेकर रोक लगा दी गई थी. मेला समिति के बजरंग सिंह चौहान के ने बताया कि इस बार यह मेला दो चरणों में आयोजित होगा. पहला मेला 27 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चलेगा. इसके अलावा दूसरा मेला 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक आयोजित होगा.

उन्होंने बताया कि इस बेरी का पशु मेला सिर्फ खरीद-फरोख्त का बाजार नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और पशुपालन की पुरानी परंपरा से जुड़ा आयोजन है. यहां अलग-अलग क्षेत्रों से पशुपालक अपने पशुओं के साथ पहुंचते हैं. मेले में पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ उनकी नस्ल, कद-काठी और उपयोगिता को लेकर भी चर्चा होती है. ऐसे में इस मेले का इंतजार पशुपालकों के साथ पशु व्यापारियों को भी रहता है.

बेरी पशु मेले में ऊंट और घोड़ियां खास आकर्षण का केंद्र रहेंगी. मेले में इन पशुओं को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. अच्छी नस्ल और बेहतर कद-काठी वाले पशु खरीदारों का ध्यान खींचते हैं. यह मेला केवल व्यापारिक गतिविधि तक सीमित नहीं रहता है. यहां होने वाली पशु प्रतियोगिताओं को देखने के लिए दूर दूर से लोग पहुंचते हैं. पिछली साल यह मेला 6 दिन चला था. लेकिन इस बार दिनों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है.

Add as Preferred Source on Google

बेरी मेले की एक खास पहचान पशुपालकों का आपसी मेलजोल भी है. अलग-अलग गांवों और इलाकों से आने वाले पशुपालक यहां पशुओं की देखभाल, नस्ल और पालन-पोषण से जुड़े अनुभव साझा करते हैं. कई लोगों के लिए यह मेला व्यापार के साथ संपर्क बढ़ाने और नए खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर भी होता है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की भूमिका को देखते हुए ऐसे आयोजनों का अपना महत्व है.

पशु मेलों की राजस्थान में पुरानी परंपरा रही है. पहले गांव-कस्बों के बड़े मेलों में पशुओं की खरीद-बिक्री प्रमुख गतिविधियों में शामिल होती थी. धीरे-धीरे आधुनिक बाजार व्यवस्था और परिवहन के साधन बढ़े, लेकिन पारंपरिक पशु मेलों का आकर्षण अब भी बना हुआ है. बेरी का मेला इसी ग्रामीण परंपरा की कड़ी के रूप में देखा जाता है, जहां आज भी पशुपालक पशुओं के साथ पहुंचते हैं.

इस बार दो चरणों में मेले का आयोजन होने से पशुपालकों और व्यापारियों को अलग-अलग समय पर भाग लेने का अवसर मिलेगा. पहला आयोजन 27 सितंबर से 5 अक्टूबर तक होगा, जबकि दूसरा मेला 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा. समिति को उम्मीद है कि दोनों आयोजनों में बड़ी संख्या में पशुपालक और व्यापारी पहुंचेंगे. इससे पशुओं की खरीद-फरोख्त के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी.

मेले में पशुओं की रौनक के साथ राजस्थान के ग्रामीण जीवन की तस्वीर भी नजर आएगी. पशुपालकों के साथ आने वाले परिवार, पशुओं की सजावट, खरीददारों की बातचीत और ऊंट-घोड़ियों की मौजूदगी मेले को खास माहौल देंगे. प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद अब पशुपालकों और व्यापारियों में उत्साह है. 27 सितंबर से शुरू होने वाला पहला मेला एक बार फिर बेरी की पशु मेला परंपरा को जीवंत करता नजर आएगा.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :

September 21, 2026, 11:59 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj