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Bharatpur Dairy Farming: साल में एक बार बदलती है पशुओं की खुराक, बाजरे की कड़बी पर टिकी दूध बढ़ने की आस

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गेहूं के भूसे की जगह बाजरे की कड़बी, भरतपुर के पशुपालकों का देसी तरीका

Last Updated:October 18, 2026, 10:53 IST

Bharatpur Cattle Feed Change during Bajra harvest: राजस्थान के भरतपुर में बाजरे की कटाई के बाद पशुओं के आहार में बदलाव कर गेहूं के भूसे की जगह बाजरे की कड़बी की कुट्टी खिलाई जाती है. साल में एक बार होने वाले इस बदलाव से पशुओं को बेहतर पोषण मिलता है और दूध उत्पादन बढ़ने की उम्मीद रहती है. किसान कड़बी की कुट्टी में दलिया मिलाकर पशुओं को देते हैं. संतुलित आहार और सही देखभाल से ग्रामीण पशुपालकों को काफी लाभ मिल रहा है.

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भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ-साथ पशुपालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मुख्य स्तंभ माना जाता है. यहाँ के पशुपालक मौसम और फसलों की उपलब्धता के अनुसार अपने मवेशियों के आहार में बदलाव करते हैं. विशेष बात यह है कि बाजरे की फसल कटाई के बाद पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. इस मौसम में गेहूं के भूसे की जगह बाजरे की कड़बी की कुट्टी पशुओं के मुख्य आहार में शामिल की जाती है. स्थानीय पशुपालकों के अनुसार यह चारा पशुओं के स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है और संतुलित पोषण के साथ दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करता है.

भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में किसान बड़े पैमाने पर खरीफ के मौसम में बाजरे की खेती करते हैं. फसल की कटाई और दाने निकालने के बाद बाजरे के सूखे डंठल यानी कड़बी को सहेज कर रखा जाता है. बाद में विशेष मशीन की सहायता से इसकी कुट्टी तैयार की जाती है. इस कुट्टी में दलिया मिलाकर पशुओं को खिलाया जाता है. इस प्रकार खेतों से मिलने वाले फसल अवशेषों का उपयोग पशु चारे के रूप में हो जाता है और किसानों को अतिरिक्त चारे की व्यवस्था आसानी से मिल जाती है.

साल में एक बार होता है आहार में यह बदलावबाजरे की कटाई के बाद उसकी उपलब्धता के अनुसार साल में केवल एक बार पशुओं के आहार में यह खास बदलाव किया जाता है. सामान्य दिनों में पशुओं को गेहूं का भूसा, हरा चारा और अन्य नियमित आहार दिया जाता है. वहीं बाजरे की कड़बी उपलब्ध होने पर उसे चारे में मुख्य रूप से शामिल किया जाता है, जिससे पशुपालकों के लिए बजट और व्यवस्था दोनों के लिहाज से काफी सहूलियत हो जाती है.

संतुलित पोषण से बढ़ता है दूध उत्पादनविशेषज्ञों और पशुपालकों के अनुसार, केवल चारा बदलने से ही नहीं बल्कि समग्र देखभाल से दूध उत्पादन बढ़ता है. इसके लिए बाजरे की कड़बी की कुट्टी के साथ-साथ पर्याप्त पानी, हरा चारा और जरूरत के मुताबिक पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी है ताकि पशुओं को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें. भरतपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में बाजरे की कड़बी की कुट्टी पशुपालन व्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन चुकी है, जिससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संबल मिल रहा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

October 18, 2026, 10:51 IST

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