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इन्फ्लुएंसर सारा सरोश को हुई दुर्लभ स्किन की बीमारी, पहले समझती रहीं सनबर्न, जानें क्या है Lichen Planus Pigmentosus

Lichen Planus Pigmentosus: चेहरे या शरीर पर अचानक काले धब्बे दिखाई देने लगें तो ज्यादातर लोग इसे धूप से हुई टैनिंग या सामान्य पिगमेंटेशन समझ लेते हैं. कई बार लोग घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं या फिर यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि कुछ दिनों में त्वचा का रंग अपने आप पहले जैसा हो जाएगा. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. कुछ मामलों में त्वचा पर दिखाई देने वाले काले या भूरे धब्बे किसी बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं. ऐसा ही कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और बिजनेसवुमन सारा सरोश के साथ हुआ. गोवा में छुट्टियां मनाने के दौरान उन्हें अपने शरीर पर पिगमेंटेशन दिखाई देने लगा. शुरुआत में उन्होंने इसे तेज धूप की वजह से हुआ सनबर्न समझा, लेकिन समय बीतने के बाद भी धब्बे कम नहीं हुए. उल्टा उनका रंग गहरा होने लगा और धीरे-धीरे ये शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैलने लगे.

करीब एक साल तक इसे सामान्य स्किन प्रॉब्लम समझने के बाद जब सारा ने त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच कराई, तो उन्हें पता चला कि वह लाइकेन प्लेनस पिगमेंटोसस (Lichen Planus Pigmentosus) नाम की एक असामान्य त्वचा संबंधी बीमारी से प्रभावित हैं. सारा ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए लोगों को इस समस्या के बारे में जागरूक किया है. आइए जानते हैं कि आखिर यह बीमारी क्या है, इसके लक्षण कैसे दिखाई देते हैं और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

गोवा की छुट्टियों के दौरान दिखाई दिए थे काले धब्बेसारा सरोश ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि गोवा की यात्रा के दौरान उन्हें पहली बार त्वचा पर गहरे रंग के निशान दिखाई दिए थे. उस समय उन्हें लगा कि समुद्र किनारे धूप में ज्यादा समय बिताने के कारण उनकी त्वचा टैन हो गई है. उन्होंने सोचा कि कुछ दिनों में यह समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ. धब्बे लगातार बने रहे और धीरे-धीरे उनका रंग भी गहरा होने लगा. इसके बाद पिगमेंटेशन पीठ और छाती के हिस्सों में फैलने लगा. लंबे समय तक सुधार न दिखाई देने पर उन्होंने त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह ली. जांच के बाद डॉक्टर ने उन्हें लाइकेन प्लेनस पिगमेंटोसस होने की जानकारी दी.

मुश्किल दौर के बाद शुरू हुई थी त्वचा की परेशानीसारा ने अपनी बीमारी के बारे में बताते हुए जीवन के एक मुश्किल दौर का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, पिछले साल उनके वेयरहाउस में आग लग गई थी. इस घटना को अपनी जिंदगी के सबसे तनावपूर्ण अनुभवों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि आग बुझने के बाद भी उससे जुड़ी परेशानियां और मानसिक तनाव खत्म नहीं हुए थे. करीब तीन सप्ताह बाद गोवा में उन्हें त्वचा पर पिगमेंटेशन दिखाई देने लगा. सारा ने बताया कि डॉक्टर ने उनसे उस समय चल रहे तनाव और दूसरी परिस्थितियों के बारे में भी पूछा था. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह वैज्ञानिक रूप से यह नहीं कह सकतीं कि वेयरहाउस में लगी आग या उससे पैदा हुआ तनाव ही उनकी बीमारी की वजह था.

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क्या है लाइकेन प्लेनस पिगमेंटोसस बीमारी?लाइकेन प्लेनस पिगमेंटोसस, जिसे LPP भी कहा जाता है, त्वचा में होने वाली एक लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन संबंधी समस्या है. इसमें त्वचा पर भूरे, स्लेटी या गहरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं. यह बीमारी लाइकेन प्लेनस से जुड़ी मानी जाती है और इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित सूजन की भूमिका हो सकती है. हालांकि, इसे हर मामले में सीधे तौर पर एक निश्चित ऑटोइम्यून बीमारी कहना सही नहीं होगा, क्योंकि इसके कारण और पूरी प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं.

इस बीमारी में त्वचा के अंदर होने वाली सूजन के कारण रंगत में बदलाव आ सकता है. कई बार ये निशान लंबे समय तक बने रहते हैं और इन्हें हल्का होने में काफी समय लग सकता है. यही वजह है कि शुरुआत में सामान्य पिगमेंटेशन जैसा दिखाई देने वाला यह बदलाव लोगों को परेशान कर सकता है.

शरीर के किन हिस्सों पर दिखाई दे सकते हैं निशान?लाइकेन प्लेनस पिगमेंटोसस में गहरे रंग के धब्बे चेहरे, गर्दन और शरीर के दूसरे हिस्सों पर दिखाई दे सकते हैं. कुछ लोगों में ये धब्बे पीठ, छाती या धूप के संपर्क में आने वाले हिस्सों पर भी हो सकते हैं. इनका रंग हल्के भूरे से लेकर गहरे भूरे या स्लेटी रंग तक हो सकता है. जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में निशान एक जैसे दिखाई दें. इस बीमारी की खास बात यह है कि कई बार त्वचा पर रंग बदलने के अलावा कोई बहुत स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती. कुछ लोगों को हल्की खुजली या जलन हो सकती है, जबकि कई मामलों में धब्बे बिना किसी खास तकलीफ के दिखाई देते हैं. ऐसे में लोग इसे सामान्य टैनिंग समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज कर सकते हैं.

क्या यह बीमारी ऑटोइम्यून समस्या से जुड़ी है?ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही स्वस्थ ऊतकों पर हमला करने लगती है. लाइकेन प्लेनस से जुड़ी बीमारियों में प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका मानी जाती है. LPP में भी त्वचा के अंदर प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी सूजन की प्रक्रिया हो सकती है. हालांकि, वैज्ञानिक अभी इसके सटीक कारणों को पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं.

इसलिए यह जरूरी नहीं है कि जिस व्यक्ति को LPP हो, उसे कोई दूसरी ऑटोइम्यून बीमारी भी हो. इसी तरह केवल शरीर पर काले धब्बे दिखाई देने से यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को यही बीमारी है. सही पहचान के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ की जांच जरूरी होती है.

क्या तनाव और धूप से बढ़ सकती है परेशानी?LPP के संभावित कारणों और इसे प्रभावित करने वाली परिस्थितियों पर अभी भी अध्ययन किया जा रहा है. कुछ मामलों में धूप और अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क, कुछ रसायनों, दवाओं या दूसरे बाहरी कारणों की भूमिका पर चर्चा की गई है. कुछ लोगों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन हर मरीज में बीमारी की एक निश्चित वजह पता चलना जरूरी नहीं है.

तनाव का असर शरीर की कई सूजन संबंधी समस्याओं पर पड़ सकता है. हालांकि, केवल तनाव को LPP का सीधा कारण साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं. सारा सरोश ने भी अपने अनुभव में इसी बात पर जोर दिया कि वह अपने तनावपूर्ण अनुभव और त्वचा की बीमारी के बीच वैज्ञानिक रूप से सीधा संबंध होने का दावा नहीं कर सकतीं.

सामान्य टैनिंग और LPP में क्या अंतर है?धूप में ज्यादा समय बिताने के कारण त्वचा का रंग गहरा होना सामान्य बात है. इसे आमतौर पर टैनिंग कहा जाता है. धूप से बचाव करने और समय बीतने के साथ सामान्य टैनिंग धीरे-धीरे कम हो सकती है. दूसरी ओर, LPP में त्वचा पर बनने वाले धब्बे लंबे समय तक बने रह सकते हैं और उनका रंग धीरे-धीरे गहरा भी हो सकता है.

हालांकि, केवल धब्बों का रंग देखकर इन दोनों में अंतर करना आसान नहीं है. मेलाज्मा, दवाओं के कारण होने वाला पिगमेंटेशन और त्वचा की दूसरी समस्याएं भी मिलते-जुलते निशान पैदा कर सकती हैं. इसलिए अगर धब्बे लगातार बढ़ रहे हैं या लंबे समय तक कम नहीं हो रहे, तो खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

डॉक्टर कैसे करते हैं इस बीमारी की पहचान?लाइकेन प्लेनस पिगमेंटोसस की पहचान के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ सबसे पहले त्वचा पर बने निशानों को देखते हैं.  कुछ मामलों में डॉक्टर त्वचा की दूसरी बीमारियों से अंतर समझने के लिए स्किन बायोप्सी जैसी जांच की सलाह भी दे सकते हैं. इसमें त्वचा का बहुत छोटा नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है. हालांकि, हर मरीज को इस जांच की जरूरत नहीं होती. जांच का फैसला त्वचा की स्थिति और डॉक्टर के आकलन के आधार पर किया जाता है.

क्या LPP का इलाज संभव है?लाइकेन प्लेनस पिगमेंटोसस का इलाज मरीज की त्वचा की स्थिति, सूजन और धब्बों की गंभीरता पर निर्भर करता है. इसका एक ऐसा इलाज उपलब्ध नहीं है जो हर मरीज में समान रूप से काम करे. डॉक्टर जरूरत के अनुसार सूजन कम करने वाली दवाएं या त्वचा पर लगाने वाले उपचार सुझा सकते हैं. कुछ मामलों में पिगमेंटेशन कम करने के लिए भी इलाज किया जाता है.

इस बीमारी में धब्बों को हल्का होने में समय लग सकता है. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के तेज केमिकल वाले प्रोडक्ट, स्टेरॉयड क्रीम या घरेलू नुस्खे इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. गलत प्रोडक्ट लगाने से त्वचा में जलन और पिगमेंटेशन की परेशानी बढ़ सकती है.

त्वचा पर काले धब्बे दिखाई दें तो क्या करें?अगर चेहरे, गर्दन, पीठ या छाती पर अचानक काले धब्बे दिखाई देने लगें, तो सबसे पहले यह देखें कि वे समय के साथ बदल रहे हैं या नहीं. अगर निशान लगातार फैल रहे हैं, रंग गहरा हो रहा है या कई सप्ताह बाद भी कोई सुधार नहीं दिख रहा, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें. धूप में निकलते समय त्वचा को ढकना और उपयुक्त सनस्क्रीन इस्तेमाल करना भी मददगार हो सकता है. हालांकि, सनस्क्रीन LPP का इलाज नहीं है. त्वचा की देखभाल के लिए हल्के प्रोडक्ट चुनें और बिना सलाह के कई तरह की क्रीम एक साथ लगाने से बचें. खासतौर पर ऐसी क्रीम से सावधान रहें जो कुछ ही दिनों में पिगमेंटेशन पूरी तरह हटाने का दावा करती हैं.

सारा सरोश ने लोगों को दी यह सलाहअपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात करते हुए सारा सरोश ने लोगों से त्वचा पर होने वाले बदलावों को गंभीरता से लेने की अपील की. उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह अपने शरीर पर बने निशानों को सिर्फ सनबर्न समझती रहीं, लेकिन बाद में जांच कराने पर असली वजह सामने आई. उनका संदेश है कि अगर त्वचा पर अचानक पिगमेंटेशन दिखाई दे, वह फैलने लगे, उसका रंग बदलता जाए या लंबे समय तक ठीक न हो, तो उसे केवल टैनिंग समझकर नजरअंदाज न करें. सही समय पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है. सारा का अनुभव यह भी याद दिलाता है कि त्वचा पर दिखाई देने वाला हर बदलाव केवल सुंदरता से जुड़ी परेशानी नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उसके पीछे ऐसी स्थिति भी हो सकती है जिसके लिए मेडिकल जांच जरूरी है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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